Haryana के De-Addiction Centre में दी जाती थी यौन प्रताड़ना, पुलिस ने मारी Raid, बचाई 37 जानें

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ये बड़ी खबर है जो हरियाणा से आई है. इसकी जानकारी से ये पता चलता है कि ऐसा भी होता है. वो लोग जो सोचते हैं कि यहां जा कर उनके घर का चिराग बुरी आदत छोड़ देगा, उनको पता ही नहीं चल पता कि यहां उनके लाल के साथ क्या क्या होता है और कैसे कैसे सलूक किये जाते हैं. उनकी चीखों की आवाज उनके घर वालों तक नहीं पहुंच पाती थीं. पर अब ऐसा नहीं होगा.
नशा मुक्ति केन्द्र के नाम से चल रहा था क्रूरता का केन्द्र

दस हज़ार लेते थे ये लोग

जिन लोगों के बच्चों को नशे की लत लग जाती है वो अपने बच्चों की ये लत छुड़ाने के लिए क्या क्या नहीं करते. इस क्रम में ही घर के चिराग को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए जब माता-पिता ने इस नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया और साथ में 10 हजार रुपये का शुल्क भी चुकाया तो वे निश्चिन्त हो गए कि उनका बच्चा अब नशे से मुक्त हो जायेगा. लेकिन उनकी पीठ पीछे यहां बच्चों के साथ कैसा अमानवीय व्यवहार होता था इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे ये लोग.

पुलिस की गाड़ी में बैठाये जा रहे हैं छुड़ाये गये युवक

मामला है पानीपत का

हरियाणा के पानीपत जिले में ये मामला प्रकाश में आया है. यहाँ के नशा मुक्ति केंद्र में लोगों के बच्चों को साथ हो रहा था अमानवीय व्यवहार. लेकिन ऊपर वाले के घर में देर है पर अंधेर नहीं. ये छुपा हुआ क्रूरता का खेल किसी तरह स्वास्थ्य विभाग की नज़रों में आ गया और फिर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने पुलिस के साथ जब यहां छपा मारा तो बर्बरता की एक लम्बी कहानी सामने आ गई.

युवकों को छुड़ा कर ले जाती हुई पुलिस

बिझौल में चल रहा था नशा मुक्ति केन्द्र

दरअसल पुलिस को ये शिकायत मिली थी जिस पर कार्यवाही के पूर्व पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से संंपर्क किया और स्वास्थ्य विभाग की एक टीम के साथ गांव बिंझौल में चल रहे नशा मुक्ति केंद्र पर छापा मारा. तब पता चला कि यह नशा मुक्ति केंद्र को पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था. पुलिस की ये कार्यवाही पांच घंटे चली जिसमें स्वास्थ्य विभाग ने यहां से 37 युवाओं को मुक्त कराने में सफलता पाई.

यहां चलता था डि-एडिक्शन सेन्टर

क्रूरता की दास्तान सामने आई

नशा मुक्ति केन्द्र से छुड़ाये लड़कों से जब पुलिस ने पूछताछ की तो क्रूरता के कई किस्से सामने आये. नशा मुक्ति केन्द्र में अब तक बन्धक बने इन युवकों ने स्वास्थ्य विभागीय के अधिकारियों को बताया कि उनको वजन लेकर खड़ा रखा जाता था, इतना ही नहीं उनको नंगा करके यौन प्रताड़ना दी जाती थी और कमरे में बंद कर दिया जाता था साथ ही पीटा भी जाता था.

नई किरण नशा मुक्ति केन्द्र का है ये मामला

ये मामला गांव बिंझौल में रजवाहे के पास चल रहे नई किरण नशा मुक्ति केंद्र का है. स्वास्थ्य विभाग को इस अमानवीय नशा मुक्ति केन्द्र को लेकर जानकारी करनाल निवासी एक युवक से मिली. इस युवक की शिकायत पर अमल करते हुए स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने कार्यवाही का आदेश जारी कर दिया. इसके बाद बुधवार 10 फरवरी की सुबह 11 बजे नई किरण नशा मुक्ति केंद्र पर सिविल सर्जन डॉ. संतलाल वर्मा, एसडीएम पानीपत एस रवींद्र पालिट और जिला समाज कल्याण विभाग अधिकारी  सत्यवान ढिलौड टीम के द्वारा छापा मारा गया.

पांच घंटे चली कार्यवाही 

स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह सावधान थी और उसने अपने साथ पुलिस बल को भी शामिल किया था जिसके कारण किसी तरह की अनपेक्षित घटना सामने नहीं आई. छापामारी की कार्रवाई शाम चार बजे तक चली औऱ इस दौरान पुलिस ने जहां 37 युवकों को यहां से मुक्त कराया वहीं उसने केन्द्र में कार्यरत दो कर्मचारियों किशनपुरा निवासी अंकित और जौरासी निवासी नरेंद्र को गिरफ्तार भी किया. किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण ये रहा कि केन्द्र के संचालक विकास नगर निवासी संजय को और जिस मकान में केंद्र चल रहा था, उसके मालिक दिलबाग को छापा पड़ने की सूचना पहले ही मिल गई थी और वे पुलिस के हाथ आने से पहले ही फरार होने में कामयाब हो गए.

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