Heart Attack: रखें दिल पर निगाह, दिल का दौरा दबे पाँव आता है

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हार्ट अटैक हार्ट का मामला है, इसलिए दिमाग को चकमा देकर अक्सर चुपके-चुपके दबे पांव आ जाता है हार्ट अटैक. लेकिन एक सच्चाई और है इसके साथ ही कि दौरा पड़ने से पहले दस्तक देता है बेआवाज़ और बिना कुछ कहे कह देता है कि आ रहा हूँ मैं बहुत जल्दी आपका मेहमान बनने.

चुपके चुपके आता है दुश्मन दिल का

हार्ट अटैक का मारा है दिल बेचारा है. सब पर लागू होती है ये बात और किसी को भी कभी भी पड़ सकता है हार्ट अटैक. हम चाहे कितना भी नज़रअंदाज़ कर दें, दिल का दौरा पड़ने से पहले उसके आने की आहट आती जरूर और हम अक्सर ऐसी आहटों की उपेक्षा कर देते हैं. इस वजह से दिल का दौरा किसी भी दिन किसी पर भी भारी पड़ सकता है. इसलिए समझदारी इसमें है कि आप अपने स्वास्थ्य से पहले दिल के स्वास्थ्य पर नज़र रखें.

लक्षण नंबर वन है छाती में दर्द

जब भी कभी आपको चेस्ट पेन हो तो उसके साथ निर्ममता का व्यवहार न करें अर्थात उसकी उपेक्षा न करें. पूरी आशंका होती है कि ये दस्तक हो सकती है एक बड़े संकट की जिसे दिल का दौरा कहा जाता है. बर्मिंघम में हुए एक शोध से एक तथ्य सामने आया है कि पचास फीसदी दिल के दौरे ही सीने में असहनीय दर्द दे कर आते हैं. इस बात को दूसरे शब्दों में कहें तो पचास फीसदी अर्थात दिल के दौरों के आधे मामलों में लक्षण दूसरे ही होते हैं.

हार्ट अटैक का दूसरा लक्षण

यह अध्ययन बर्मिंघम के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हुआ है जिसका परिणाम ये भी बताता है कि ब्रिटेन में हर साल सामने आने वाले हार्ट अटैक के पचास प्रतिशत मामलों में चेस्ट पेन की शिकायत देखी जाती है. देखा गया है कि पहले मरीजों के शरीर में कमज़ोरी, थकान और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देते हैं जो बाद में दिल के दौरे का कारण बन जाते हैं.

अब लक्षण वो नहीं हैं

ब्रिटेन में किया गया यह अध्ययन पचास हजार दिल के मरीजों पर हुआ है. इस अध्ययन से पता चला है कि इन दिनों  कई देशों में एसएमआई अर्थात ‘साइलेंट म्योकार्डियल इनफैक्शन’ के मरीजों की संख्या में बढ़त देखी जा रही है. ‘एसएमआई’ को साइलेन्ट किलर कह सकते हैं क्योंकि इसमें मरीज को हार्ट अटैक की आहट सुनाई नहीं देती और सामान्यतः होने वाले चेस्ट पेन, सांस लेने में तकलीफ, बाजू में दर्द और बहुत अधिक पसीना आने जैसी शिकायतें ऊपर से दिखाई नहीं देतीं.

ईसीजी में पता चलता है मामलों का

सबसे महत्वपूर्ण बात जो इस शोध से सामने आई है वो ये है कि ‘एसएमआई’ के अधिकतर मामले तब पता चलते हैं जब किसी कारण से ऑपरेशन अथवा चेकअप के लिये रोगी अस्पताल में भर्ती होता है. उस समय जब उसका ईसीजी किया जाता है तो उसमें उसकी हृदय कोशिकाओं को ठीक वैसा नुकसान दिखाई देता है जैसा कि दिल का दौरा पड़ने पर होता है.
 

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