Hindu Dharma: सनातन धर्म में एक से दस तक इन संख्याओं का महत्व विशेष है

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सनातन धर्म से संबन्धित प्रत्येक व्यक्ति को ये जानना चाहिये कि एक से लेकर दस तक हमारे हिन्दू धर्म की संख्याओं का विशेष महत्व आखिर है क्या –

 

1) एक ओम्कार (ॐ)

2) दो लिंग – नर और नारी ।

दो पक्ष – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।

दो पूजा – वैदिकी और तांत्रिकी।

दो अयन- उत्तरायन और दक्षिणायन।

3) तीन देव – ब्रह्मा, विष्णु, शंकर।

तीन देवियाँ – सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती।

तीन लोक – पृथ्वी, आकाश, पाताल।

तीन गुण – सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।

तीन स्थिति – ठोस, द्रव, गैस।

तीन स्तर – प्रारंभ, मध्य, अंत।

तीन पड़ाव – बचपन, जवानी, बुढ़ापा।

तीन रचनाएँ – देव, दानव, मानव।

तीन अवस्था – जागृत, मृत, बेहोशी।

तीन काल – भूत, भविष्य, वर्तमान।

तीन नाड़ी – इडा, पिंगला, सुषुम्ना।

तीन संध्या – प्रात:, मध्याह्न, सायं।

तीन शक्ति – इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।

4) चार धाम – बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम्, द्वारका।

चार मुनि – सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।

चार वर्ण – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।

चार नीति – साम, दाम, दंड, भेद।

चार वेद – सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।

चार स्त्री – माता, पत्नी, बहन, पुत्री।

चार युग – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।

चार समय – सुबह, शाम, दिन, रात।

चार अप्सरा – उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।

चार गुरु – माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।

चार प्राणी – जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।

चार जीव – अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।

चार वाणी – ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।

चार आश्रम – ब्रह्मचर्य, ग्राहस्थ, वानप्रस्थ, सन्यास।

चार भोज्य प्रकार – खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।

चार पुरुषार्थ – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष।

चार वाद्य – तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।

5) पाँच तत्व – पृथ्वी, आकाश, अग्नि, जल, वायु।

पाँच देवता – गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।

पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ – आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।

पाँच कर्म – रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।

पाँच – उंगलियां – अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।

पाँच पूजा उपचार -गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।

पाँच अमृत – दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।

पाँच प्रेत – भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।

पाँच स्वाद – मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।

पाँच वायु – प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।

पाँच इन्द्रियाँ – आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा, मन।

पाँच वटवृक्ष – सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (इलाहाबाद), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।

पाँच पत्ते – आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।

पाँच कन्या – अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।

6) छ: ॠतु – शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।

छ: ज्ञान के अंग – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।

छ: कर्म – देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।

छ: दोष – काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच), मोह, आलस्य।

7) सात छंद – गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।

सात स्वर – सा, रे, ग, म, प, ध, नि।

सात सुर – षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।

सात चक्र – सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।

सात वार – रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।

सात मिट्टी – गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।

सात महाद्वीप – जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।

सात ॠषि – वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।

सात ॠषि 2 – वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।

सात धातु (शारीरिक) – रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।
सात रंग – बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।

सात पाताल – अतल, वितल, सुतल, तलातल,महातल, रसातल, पाताल।

सात पुरी – मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।

सात धान्य – उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।

8) आठ मातृका – ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।

आठ लक्ष्मी – आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।

आठ वसु – अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।

आठ सिद्धि – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।

आठ धातु – सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।

9) नवदुर्गा – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

नवग्रह – सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।

नवरत्न – हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।

नवनिधि – पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।

10) दस महाविद्या – काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।

दस दिशाएँ – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।

दस दिक्पाल – इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।

दस अवतार (विष्णुजी) – मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।

दस सती – सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।

(प्रस्तुति : पंडित अनिल वत्स)