कंगाल पाकिस्तान को कमा कर देंगे गधे, करेंगे चीन यात्रा, पाक-चीन में हुई मोटी डील

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पाकिस्तान की कंगाली को अब वहां के गधे ज्यादा नहीं देख सकते हैं. गधों ने कसम खाई है कि वो अब कंगाल पाकिस्तान को कमा कर देंगे. घर के बड़े बेटे की भूमिका में पाकिस्तान के गधे आ गए हैं. गधे अब एक्सपोर्ट के बिज़नेस के जरिए इमरान खान की जेब भरेंगे. उनकी सरकार का खजाना भरेंगे. दरअसल पाकिस्तान ने चीन के साथ गधों को लेकर एक डील साइन की थी जिसके तहत पाकिस्तान के गधे चीन यात्रा पर जाएंगे. हालांकि ये वन वे यात्रा होगी. सिर्फ जाने का वीज़ा होगा. लौटने का टिकट नहीं. पाकिस्तान से पहुंचे गधे चीन में खपा दिए जाएंगे.

गर्म खौलते कड़ाहों में उबालने के बाद उनकी खाल से चीन दवाई बनाएगा. दवाई बना कर बेचेगा. उस पैसे से पहले तो गधों की कॉस्ट निकालेगा. फिर फायदा देखेगा. कुल मिलाकर पाकिस्तान को गधे कमा कर देंगे.

पाकिस्तान का कमाऊ पूत बना गधा

अब आते हैं खबर पर….पाकिस्तान और चीन की की दोस्ती के बीच गधा पुल का काम कर रहा है. वहीं पाकिस्तान के लिए कमाऊ पूत का काम करेगा.  चीन से अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान उसे गधों का एक्सपोर्ट बढ़ाने जा रहा है. इसके लिए पाकिस्तान की तैयारी भी जान लीजिए. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ओकारा जिले में गधों की ब्रीडिंग का एक फार्म बनाया गया है.

3 हज़ार एकड़ पर बना गधों का फार्म

Ary News के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बहादुरनगर में 3 हजार एकड़ जमीन पर गधे का फार्म बनाया गया है.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में  खैबर पख्तूनख्वा की सरकार ने 1 अरब डॉलर का चीन के साथ ‘Khyber-Pakhtunkhwa-China Sustainable Donkey Development Programme’ की घोषणा की थी. पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट के जरिए खैबर पख्तूनख्वा में गधों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखा था. दरअसल, पाकिस्तान कृषि क्षेत्र में CPEC यानी China-Pakistan Economic Corridor के जरिए अतिरिक्त निवेश की आस लगाए हुए है.

चीन को क्यों चाहिए पाकिस्तानी गधा?

वैसे तो दुनिया में सबसे ज्यादा गधे की ब्रीडिंग चीन में होती है लेकिन अब गधों को लेकर चीन अब पूरी तरह से पाकिस्तान पर निर्भर है. दरअसल पाकिस्तान से पहले चीन नाइजीरिया और बुरकिना फासो से जैसे पश्चिमी अफ्रीकी देशों से गधे का एक्सपोर्ट कर रहे थे.  लेकिन इन दोनों ही देशों ने चीन के साथ गधे का एक्सपोर्ट बैन कर दिया है.

जिस वजह से साल 2019 में आई गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में 1992 से गधों की संख्या 76% तक कम हो चुकी है. चीन में 1992 में 11 लाख  से 2019 तक गधों की आबादी में तीन-चौथाई कमी आई है. इसकी वजह से चीन की पाकिस्तान पर निर्भरता बढ़ गई है.

चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन को cosmetic products और इजियाओ की मैन्युफैक्चरिंग के लिए हर साल 40 लाख गधों की जरूरत है.लेकिन उसके पास सप्लाई 18 लाख सालाना से भी कम है.

चीन जाने से गधे क्यों डरते हैं?

चीन गधे की खाल को गर्म पानी में उबालकर इसका इस्तेमाल इजियाओ में करता है.इजियाओ चीन की एक पारंपरिक दवा है जिसे शरीर के तमाम रोगों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ब्लड सर्कुलेशन, एनीमिया और प्रजनन संबंधी समस्याओं में इजियाओ का इस्तेमाल होता है . एक अनुमान के मुताबिक, इजियाओ इंडस्ट्री की गधों की मांग को पूरा करने में 20 साल और लग जाएंगे. फिलहाल चीन और पाकिस्तान की दोस्ती में गधा लकी मैस्कट साबित हो सकता है

Disclaimer: ये खबर उनके लिए कतई नहीं है जो गधों का मज़ाक उड़ाते हैं. खासतौर से किसी आदमी को गधा कह कर बुलाते हों.

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