Indonasia: यहां पर है एक और सोने की लंका

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सुनने में लगेगा किसी परी कथाओं जैसा परन्तु बिल्कुल सत्य है. अलीबाबा चालीस चोर, गुफा में खज़ाना,नदी में हाथ डालो तो कुल्हाड़ी सोने की हो गई. बचपन में आपने ऐसी कई कहानियाँ सुनी होंगी. जी हाँ कुछ ऐसा ही हुआ है इंडोनेशिया में जहाँ का प्राचीन इतिहास हमारी हिंदू सभ्यता से जुड़ा है. कभी सुना है सोने का द्वीप. ये वही सोने का द्वीप है जो कल्प-वृक्ष की भाँति लोगों की इच्छाएँ पूरी कर रहा है. अब आप सोचेगें कैसे?
इसलिये ज़रा ध्यान लगा कर पढ़िये कि ये सच है, इंडोनेशिया के सुमात्रा इलाके में एक द्वीप है, जहाँ मछुआरों को सोने के बहुमूल्य आभूषण और सिक्के मिल रहे हैं. अजी चौंकिए मत ये उतना ही सत्य है जितना सूरज का उगना, चाँद का ढलना, नदिया का पानी और बुढ़ापे पे जवानी.

पाया गया सोने का द्वीप

यह शुभ कार्य को अंजाम दिया है यहाँ के मछुआरों ने. सूत्रों के अनुसार मछुआरों ने सोने-चाँदी, हीरे-जवाहरात से भरे एक ऐसे द्वीप को खोज निकाला है जहाँ करीब सात सौ वर्ष पूर्व श्रीविजया साम्राज्य हुआ करता था. अपने समय में भी यह बहुत ताकतवर और समृद्धिशाली साम्राज्य था जिसे सोने का द्वीप’ कहा जाता था. दरअसल अब सुमात्रा “सोने के द्वीप” के नाम से जाना जाता है.

मेहनत रंग लाई

आपको बता दें कि मूसी नदी जो कि पालेमबांग के नज़दीक है में मछुआरे पाँच वर्षों से इस अमूल्य ख़ज़ाने की खोज में जुटे थे. यह बेहद खतरनाक और मुश्किल काम था क्योंकि यह नदी खूनी घड़ियालों से भरी पड़ी है. अपनी जान हथेली पर लेकर ये मछुआरे रोज़ उस नदी में मछलियों के साथ-साथ खजाना भी ढूँढ रहे थे. अंतत: नदी की तलहटी से मछुआरे को इस बहुमूल्य खज़ाने की उपलब्धि हुई.

श्रीविजया साम्राज्य-काल

ये सभी श्रीविजया साम्राज्य की अमानत रहे हैं. इस साम्राज्य की समृद्धि और शक्ति गाथा इतिहास के पन्नों में दर्ज है. आपको ये भी बता दें कि श्रीविजया साम्राज्य से भारत का नज़दीकी नाता रहा है. इस साम्राज्य का शासन-काल सातवीं शताब्दी से लेकर 13वीं शताब्‍दी तक रहा.

एक समृद्ध और शक्तिशाली साम्राज्य

बड़ी से बड़ी सभ्यता भी अपने चरम से काल के गर्त में समा जाती है. ऐसा ही कुछ श्रीविजया साम्राज्य के साथ भी हुआ. प्रसिद्ध ब्रिटिश पुरातत्‍व विभाग के जानकार डॉक्‍टर सीन किंग्‍स्‍ले ने यह दावा किया है कि श्रीविजया साम्राज्‍य की खोज में बड़े-बड़े खोजकर्ताओं ने भारत से थाईलैंड तक का इतिहास खंगाल डाला परन्तु कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नही हो पाई थी. अभी हाल ही की जानकारी के अनुसार यह ज्ञात हुआ है कि इस साम्राज्य की राजधानी में 20000 सैनिकों की समृद्ध विशाल सेना हुआ करती थी. एक हज़ार बौद्ध भिक्षुओं के होने का प्रमाण भी मिला है.

मिला खज़ाना भी

पूर्व जानकारी के मुताबिक इस सोने के द्वीप में सोने के आभूषण,सोने के सिक्के,अत्यधिक संख्या में चीनी सिक्के,चीनी मिट्टी के बर्तन के अलावा भगवान बुद्ध की एक अद्भुत प्रतिमा भी मिली है. कई बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित यह प्रतिमा आठवीं शताब्‍दी की है और जिसका मूल्यांकन करोड़ों में किया गया है.
इस साम्राज्य-काल में कांसे के मंदिर होने के भी प्रमाण मिले हैं जिसमें सुंदर स्वर्ण की बौद्ध प्रतिमाएँ विराजमान हुआ करती थीं. मंदिर के द्वार पर राहू का धड़ और इंद्र के वज्र के अवशेष भी पाए गए हैं. लकड़ी के ही घर, मंदिर और महल होते थे. यह साम्राज्य नदी पर ही विकसित व समृद्ध हुआ और नदी में ही विलीन हो गया ऐसा कहा जाता है. चौदहवीं शताब्दी में अंत होने वाले इस शक्तिशाली साम्राज्य का पतन क्योंकर हुआ ये भी एक रहस्य ही बना हुआ है. अब भी इसके विषय में शोध जारी है.

भारत और अन्य देशों से होता रहा है व्यापार 

इतिहासकारों के मुताबिक यह द्वीप दक्षिण-पूर्व एशिया में व्‍यापार का प्रारंभिक बिंदू था. समुद्री व्‍यापार में आई तेजी के परिणामस्वरूप चीन और इंडोनेशिया के मध्य भारी मात्रा में सामानों की आवाजाही होने लगी. फारस और भारत के साथ भी इसके व्यापार संबंध की जानकारी प्राप्त हुई है.
हर सभ्यता का अंत एक दिन निश्चित है.इंडोनेशिया के मछुआरे अभी इस अवसर का लाभ उठा रहे हैं विशेष व्यापारी वर्ग को मूर्तियाँ और सामान बेचकर. सरकार इसको लेकर क्या निर्णय लेगी यह अभी विचाराधीन है तब तक लोग बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं.