इतिहास में काला चेहरा कम्यूनिस्टों का

1916 में एक तरफ विश्व युद्ध चल रहा था, रूस के राजा निकोलस द्वितीय सैनिको का उत्साहवर्धन करने के लिये साइबेरिया गए हुए थे।
ठीक इसके विपरीत रूस की कम्युनिस्ट पार्टी देशद्रोह का परिचय देते हुए राजा के खिलाफ बगावत कर चुकी थी।
रूस की सेना ने कम्युनिस्टो की लाल सेना को खदेड़ दिया और उनका नेता व्लादिमीर लेनिन भागता फिरा मगर एक साल में सबकुछ बदल गया। रूस के आधे से ज्यादा सैनिक जर्मनी से लड़ रहे थे ऐसे में लाल सेना की विजय हुई।
राजा निकोलस द्वितीय को उनके परिवार के साथ बंदी बना लिया गया और साइबेरिया ही लाया गया। वहाँ उन्हें एक अच्छे बंगले में नजरबंद किया गया, खाने के लिये उन्हें पर्याप्त ब्रेड ही मिलती थी। कम्युनिस्ट उनका बार बार अपमान करते रहते थे।
लेकिन उन्हें एक ही आशा थी कि उनका चचेरा भाई जॉर्ज पंचम जो कि ब्रिटेन का राजा है वह उन्हें बचा लेगा। जॉर्ज पंचम ने शुरू में तो कई प्रयास किये की निकोलस और उनके परिवार को छुड़ा ले मगर जब उन्होंने विचार किया कि निकोलस के चक्कर मे कही रूस की क्रांति ब्रिटेन ना पहुँच जाए तो उन्होंने निकोलस को भगवान भरोसे छोड़ दिया।
जब जॉर्ज पंचम द्वारा की जाने वाली मदद की बात रूस पहुँची तो कम्युनिस्टो ने एक फैसला लिया। 16 से 17 जुलाई 1918 के आसपास राजपरिवार को जगाया गया और मौत का फरमान सुनाकर एक कमरे में लाकर बेरहमी से गोली मार दी गयी। उनके शवो को क्षत विक्षत किया गया और किसी अनजान जगह दफन कर दिया।
इसके बाद रूसी साम्राज्य का नाम बदलकर सोवियत संघ कर दिया, 1977 में राजपरिवार के अवशेष लोगो को मिले और 1998 में उनकी 80वी वर्षगांठ पर परिवार का दाह संस्कार ईसाई परंपरा के अनुसार हो सका। रूस के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने इसमें भाग लिया और पहली बार दुख प्रकट किया।
लेकिन यह सब हुआ ही क्यों? कम्युनिस्ट चाहते थे कि एक व्यक्ति की तानाशाही खत्म हो क्या वो हो गयी? आज भी रूस में वन पार्टी रूल है, क्या भ्रष्टाचार खत्म हुआ तो उसमें भी रूस शीर्ष पर है। दरसल कम्युनिस्टो का आरंभ से यही ढंग रहा है कि पहले बना हुआ कपड़ा फाड़ दो और उसे फिर से अपने ढंग से बुनो।
रूस के इतिहास का यह काला अध्याय सदा ही मानव को कम्युनिस्टों का घिनौना चेहरा याद दिलाता रहेगा। ज्ञातव्य हो त्रिपुरा में जब कम्युनिस्टो की सरकार थी तब उन्होंने व्लादिमीर लेनिन की ही मूर्ति बनवाई थी फिर जब बीजेपी सत्ता में आयी तो बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओ ने उसे धराशायी कर दिया।
हमे इसी तरह कम्युनिस्टो से देश को बचाना है अन्यथा रूस का अतीत भारत का भविष्य हो सकता है।