Jai Shri Ram: प्रभु हनुमान जी को ही साथ क्यों बैठाते हैं?

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कुछ लोग पूछते हैं कि क्या कारण है कि भगवान राम हनुमान जी को सदा अपने पास बैठाते ह. जो लोग रामायण पढ़ते हैं वे इसका कारण अवश्य जानते होंगे. कारण ये है कि हनुमान जी ने चार ऐसे काम किये और इसीलिए भगवान् उन्हें अपने पास सदा रखते है !
(१).पहली बात तो ये कि हनुमान जी ने अपना कोई नाम नहीं रखा ! हनुमान जी के जितने भी नाम है सभी उनके कार्यों से अलग अलग नाम हुए है !
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हनुमान जी से जब किसी ने पूछा कि आपने अपना कोई नाम क्यों नहीं रखा तो हनुमान जी बोले – नाम तो दो ही सुन्दर है राम और कृष्ण का !
लंका में जब विभीषण के पास हनुमान जी गए तो उनके राम नाम गुणगान से प्रभावित विभीषण ने पूछा  – आपने भगवान की इतनी सुन्दर कथा सुनाई आप अपना नाम तो बताईये ! हनुमान जी बोले -नाम की तो बड़ी महिमा है।
हनुमान जी ने अपने को छोटा मानते हुए कहा –
प्रात लेई जो नाम हमारा ; तेहि दिन ताहि न मिलै अहारा !
अर्थात प्रात:काल हमारा नाम जो लेता है उस दिन उसे आहार तक नहीं मिलता ! अतः मेरा नहीं मेरे प्रभु का नाम लीजिए उनका नाम लेने से मैं अधिक प्रसन्न होता हूँ ।
हनुमान जी ने नाम छोड़ा और हम नाम के पीछे ही मरे जाते है ! मंदिर में एक पत्थर भी लगवाते है तो पहले अपना नाम उस पर खुदवाते है !
एक व्यक्ति ने एक मंदिर में पंखे लगवाए, पंखे की हर पंखङी पर अपने पिता जी का नाम लिखवाया !
एक संत ने पूछा -ये पंखे पर किसका नाम लिखा है ! उसके बेटे ने कहा -मेरे पिता जी का नाम है !
संत बोले -जीते जी खूब चक्कर काटे कम से कम मरने के बाद तो छोड़ दो क्यों चक्कर लगवा रहे हो !
(२). हनुमान जी बंदर का रूप लेकर आये ! हमें किसी का मजाक उड़ाना होता है तो हम कहते है कैसा बंदर जैसा मुख है कैसे बंदर जैसे दाँत दिखा रहा है !
हनुमान जी से किसी ने पूछा -आप रूप बिगाड़कर क्यों आये तो हनुमान जी बोले यदि मेरी और मत देखो, मेरे प्रभु को देखो । वो कितने सुंदर है उनकी आभा कितनी निराली है ।
इस पर भगवान् बोले -चिंता मत करो हनुमान मेरे नाम से ज्यादा तुम्हारा नाम होगा और ऐसा ही हुआ ।
मेरे दरबार में पहले तुम्हारा दर्शन होगा (राम द्वारे तुम रखवाले ) !
हम थोड़ा सा भी बड़ा और अच्छा काम करते है तो चाहते है पेपर में हमारी फोटो छपे नाम छपे पर हनुमान जी ने कितने बड़े-2 काम किये पर यश स्वयं नहीं लिया !
(३). प्रभु मुद्रिका मेली मुख माहीं : एक बार भगवान वानरों के बीच में बैठे थे, सोचने लगे हनुमान तो अपने मुख से स्वयं कहेगा नहीं इसलिए हनुमान की बडाई करते हुए बोले..
हनुमान तुमने इतना बड़ा सागर लांघा जिसे कोई नहीं लांघ सका !
हनुमान जी बोले -प्रभु इसमें मेरी क्या बिसात
प्रभु मुद्रिका मेल मुख माही !
आपके नाम की मुंदरी ने पार लगाया !
भगवान् बोले -अच्छा हनुमान चलो मेरी नाम की मुंदरी ने उस पार लगाया फिर जब तुम लौटे तब तो मुंदरी जानकी को दे आये थे फिर लौटते में तो नहीं थी फिर किसने पार लगाया ?
इस पर हनुमान जी बोले -प्रभु आपकी कृपा ने (मुंदरी) ने उस पार किया और माता सीता की कृपा ने (चूड़ामणि) इस पार किया !
(४). लंका सो कोट समुद्र से खाई ।
भगवान् ने मुस्कराते हुए पूछा, और लंका कैसे जली ?
हनुमान जी, लंका को जलाया आपके प्रताप ने, लंका को जलाया रावण के पाप ने, लंका को जलाया माँ जानकी के श्राप ने !
भगवान् ने मुस्कराते हुए घोषणा की.. हे हनुमान तुमने यश छोड़ा है इसलिए न जाने तुम्हारा यश कौन-2 गायेगा !
सहस बदन तुम्हारो यश गावे
सारा जगत तुम्हारा यश गायेगा !
जो इन चारों को छोड़ता है भगवान् फिर उसे नहीं छोड़ते सदा अपने साथ रखते है ! इसीलिये राम भगवान सदा ही हनुमान जी को अपने पास रखते हैं।