Kaam ki baaten: कौन सी बात आपको खाये जा रही है ?

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चाहे वो टाटा हो या बिड़ला या हों अम्बानी या अडानी – सभी इंसान हैं. पैसे वाले होने से भी उनकी हर समस्या का समाधान नहीं हो जाता ऐसे में कुछ उनके जीवन में भी ऐसा होता है जो वे किसी से कह नहीं पाते लेकिन वो परेशानी उन्हें दिन रात अपने भीतर महसूस होती रहती है..

चिन्ता डायन खाये जात है!

खाना किसे कहते हैं? जब कोई बात आपके भीतर रोज़ पकती रहती है तो वह बात आपको ही किसी डिश की तरह खाने लगती है. रोज़ आप उस परेशानी के  बारे में सोचते रहते हैं और रोज़ आपको लगता है कि आपके पास इसका समाधान नहीं है तो वह बात आपको और परेशान करने लगती है. समस्या तो सबके जीवन में है पर ऐसी समस्या जिसे हम किसी को बता नहीं सकते हमारे भीतर दीमक बन जाती है और हमे धीरे धीरे खाने लग जाती है.

कैसी हो सकती है ये चिन्ता?

वो बात बहुत सी हो सकती हैं और बहुत प्रकार की हो सकती हैं. उदाहरण के लिए हो सकता है आपको दिन-रात ये डर लगा रहता हो कि आपकी नौकरी चली जायेगी तो क्या होगा..हो सकता है आपको ये डर लगा रहता हो कि आपकी पत्नी का किसी से एफेयर है या आपके पति का किसी से चक्कर चल रहा है या फिर आपको ये डर भी हो सकता है कि जो गलत काम आप कर रहे हैं कहीं उसका भेद खुल न जाये अथवा आपकी किसी से दुश्मनी है और आपको ये भय भी हो सकता है कि कहीं वह आपके खिलाफ कोई साजिश न करे या आप पर हमला न करवा दे..

आपको लगता है कोई हल नहीं इसका

बहुत सारी ऐसी वजहें जो आपको भीतर ही भीतर डरा रही हो सकती हैं पर आपको लगता होगा कि इसका कोई समाधान नहीं..कई बार आपको ये भी लगेगा कि मुझे इस खतरे से कोई नहीं बचा सकता और धीरे-धीरे मैं इस खतरे के भीतर चला जा रहा हूं..और एक दिन मैं बिलकुल इसका शिकार हो जाउंगा. ये भय आपको अपने धूम्रपान की आदत के कारण हो सकता है या आप तंबाकू खाते हों तो भी हो सकता है कि कहीं आपको कैन्सर न हो जाये या फिर आपको डायबिटीज है तो आपको ये डर होगा कि कहीं आप इसके बड़े और बुरे शिकार न हो जायें..या फिर हो सकता है कोई आपको ब्लैकमेल कर रहा हो तो आपको लगता होगा कि मेरी जिन्दगी का खेल अब खतम ही होने वाला है.. बातें तमाम हो सकती हैं जिन्दगी में..

ये रहा समाधान नंबर वन

अब हम बताते हैं कि क्या करें जब आपको कोई बात खाने लग जाये तो सबसे पहला काम आप ये करें कि उस बात को अपने मन में छुपाने की बजाये उसे बताना शुरू कर दें. सबसे पहले अपने परिवार के लोगों को बतायें फिर जरूरत के मुताबिक उससे जुड़े विशेषज्ञों को बतायें जैसे पुलिस को बतायें या डॉक्टर को बतायें या मनोचिकित्सक को बतायें या जिस पर आपको संदेह है आपका पति या पत्नी -उसे साफ बता दें कि आपको उन पर संदेह है और इस संदेह से आपका जीना हराम हुआ जा रहा है. मान कर चलिये हमारी बात कि आपको आपका समाधान मिल जायेगा. आप खुद हैरान रह जायेंगे कि कहां से चल कर आपकी समस्या का समाधान आप तक पहुंच गया. पर सच ये है कि आपकी कोशिश का परिणाम है आपका समाधान. आप छुपाये रहते तो अपनी समस्या के शिकार बता देते -लेकिन आपने बताया तो समाधान आपके पास चल कर आया -अब जिन्दगी पहले से आसान हो जायेगी. याद रखिये हमारी सबसे आखिरी औऱ सबसे अहम बात कि दुनिया में कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान नहीं है !