कहीं World War में न बदल जाए फिलीस्तीन के खिलाफ Israel का वार ?

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आज की तारीख में पिछले तीन दिनों से इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच चल रही जंग सारी दुनिया की हेडलाइन बनी हुई है. सब जानते हैं कि इज़राइल किसी को छेड़ता नहीं है लेकिन कोई उसे छेड़ता है तो वो उसे छोड़ता भी नहीं है. यहाँ बिलकुल यही हुआ है. आज दिन पर दिन विकराल होती जा रही इस जंग की शुरुआत तो हमास ने कर दी लेकिन इज़राइल के गुस्से को देखते हुए अब उसे खुद भी नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है.

शुरुआत की थी हमास ने

अशांति तो पिछले एक माह से चल रही थी लेकिन एक हफ्ते पहले पिछले सोमवार से ही यहूदियों और मुसलमानों दोनों के लिए पवित्र माने जाने वाले यरुशलम में भीषण हिंसा की शुरुआत हो गई. और जो दंगाई शुरुआत फिलीस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास ने यरुशलम में की, वही उसने इज़राइल के ऊपर हमला करके आगे बढ़ा दी. हमास ने इज़राइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इज़राइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. इसके बाद शुरू हो गई हिंसा जो एक सप्ताह बाद अभी तक चल रही है.

जवाब में वायलेंट हुआ इज़राइल

बरसों से चली आ रही तनातनी और संघर्ष के बाद जो दौर अब आया है वह काफी खतरनाक रुख इख्तियार कर सकता है क्योंकि इज़राइल का रोष अपने चरम पर है. और ऐसा लगता है इस बार इज़राइल समझौता करने के बजाये फैसला करने के मूड में है क्योंकि इज़राइली सेना प्रमुख का बयान आ चूका है कि इस बार जब भी युद्ध विराम होगा तो हमारी सेना जहां तक पहुंच चुकी होगी वहां तक का इलाका हमारा होगा. इज़राइल के इस रौद्र रूप से हमास को भी आभास हो गया है कि इस बार पूरा ही बेड़ा गर्क हो सकता है.

तुर्की बना चौधरी, दी धमकी

इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच की आपसी लड़ाई में पड़ौसी तुर्की को चौधरी बनने का मौका मिल गया है. वैसे भी तुर्की दुनिया के 57 मुस्लिम देशों का नेता बनना चाहता है. और इज़राइल के खिलाफ इससे अच्छा मौका उसे मिल नहीं सकता. कबायली संस्कृति के अवशेष इस देश के लिए लड़ना मरना बड़ी बात नहीं है लेकिन कट्टरता बड़ी बात है जिसको लेकर कोई समझौता ऐसे देशो की डिक्शनरी में नहीं होता. तुर्की ने इज़राइल को धमकी दे दी और इसके पहले उसने अपने आका से बात भी कर ली.

तुर्की का आका है रूस

इज़राइल का बड़ा भाई अगर अमेरिका है तो तुर्की का आका है रूस. रूस से बात करने के बाद ही तुर्की ने अपना बयान जारी किया है. अपने बयान में तुर्की ने कहा है कि चाहे सारी दुनिया स्वीकार कर ले किन्तु इज़राइल का फिलिस्तीन पर अतिक्रमण तुर्की कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. तुर्की के राष्ट्रपति एड्रोगेन के इस बयान का अर्थ है कि वह भी युद्ध में उतरने का विचार कर रहा है. अगर तुर्की इज़राइल के खिलाफ फिलिस्तीन के समर्थन में युद्ध में उतरता है तो रूस को उसे अपना समर्थन देना है होगा.

अमेरिका फ़्रांस ब्रिटेन आये समर्थन में

इज़राइल न पहले कभी अकेला था न आज है. बरसों से पड़ोसी इस्लामिक राष्ट्रों से घिरा हुआ ये बहादुर देश कभी भी कोई युद्ध नहीं हारा है और अपनी आज़ादी के सात दशक उसने चारों तरफ से घिरे दुश्मनों के खिलाफ जंग लड़ने में बिताये हैं. जितना इज़राइल के पड़ौसी इस्लामिक राष्ट्रों को इज़राइल की बहादुरी के बारे में पता है उतना ही इज़राइल को अपने इन पारम्परिक शत्रुओं के बारे में पता है.इज़राइल जानता है कि इनके विरुद्ध आक्रमण ही सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा है. अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इज़राइल को खुला समर्थन दे दिया है.

मुस्लिम देश हुए लामबन्द

दुनिया में सबसी बड़ी एकता इस्लामी एकता है -इस बात को एक बार फिर सत्य सिद्ध कर दिया है इस्लामी देशों की लीग ने. दुनिया के सभी 57 देश इस लीग में भले ही शामिल न हों किन्तु बहुत से बड़े-बड़े मुस्लिम मुल्क इस्लामी देशों के इस अंतर्राष्ट्रीय लीग में शामिल हैं. इन देशों ने फिलीस्तीन को अनकंडीशनल समर्थन दिया है. किन्तु अभी तक पाकिस्तान और तुर्की के अतिरिक्त किसी ने भी खुल कर इस युद्ध में उतरने और इज़राइल को सबक सिखाने की अभिलाषा प्रकट नहीं की है.

बयानों ने डाला आग में घी

तुर्की के राष्ट्रपति ने फिलीस्‍तीन के समर्थन में आवाज उठाई और एक बड़ा बयान जारी करी दिया जिसमें उन्होंने दुनिया के सभी इस्लामी देशों का आवाहन करते हुए उनसे अपील की है कि इजरायल के खिलाफ सभी मुस्लिम देश एकजुट होकर जवाब दें. उधर सदा की भाँति अमेरिका ने एक बार फिर से इजरायल का पक्ष लिया है और इस सिलसिले में अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का बयान आया है कि इज़राइल के फिलीस्तीन पर किये गये हवाई हमले जायज़ हैं और इज़राइल को अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है.

ओआईसी ने की आपात बैठक

इस्‍लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) दुनिया के 57 इस्‍लामिक देशों का संगठन है. ओआईसी ने इजरायल के प्रधानमन्त्री बेन्जामिन नेतान्याहू से अपील की है कि वो तत्‍काल गाजा पर हमले रोकने का आदेश दें. औआईसी ने फिलीस्तीन के प्रति चिन्ता जताते हुए अपनी एक आपात बैठक कल रविवार को बुलाई. इन इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने बैठक में हिस्‍सा ले कर पूर्वी येरुशलम को फिलीस्‍तीन का हिस्‍सा बताया. इतना ही नहीं इस क्षेत्र को फिलीस्तीन की राजधानी भी बताया गया. तुर्की ने इजरायली हमलों को देखते हुए सभी इस्‍लामिक देशों से कहा है कि हमें अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर जरा भी विश्‍वास नहीं करना है क्‍योंकि ये कानून हमारा साथ नहीं देने वाले हैं.

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