Karvaa Chauth: क्या है पत्नी के लिए सबसे अच्छा गिफ्ट करवा चौथ पर?

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गिफ्ट वही जो पिया मन भाये..बाकी सारे गिफ्ट चूल्हे में जाएँ. करवा चौथ पर भी यही फॉर्मूला काम करता है. हर हिन्दू सुहागिन अपने पति के लिए व्रत रखती है और दिन भर पानी भी नहीं पीती है तो दूसरी तरफ पतिदेव उनको आशीर्वाद दे कर काम चला लेते हैं और साथ में कोई छोटा-मोटा तोहफा दे कर अपने कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं. पर सवाल ये है कि क्या आपने कभी अपनी पत्नी से पूछा है कि उसे क्या चाहिए?

आपकी उमर बढ़ा दी उसने

दिन भर खुद को भूखा रख कर उमर बढ़ा दी उसने तेरी..बदले में क्या देगा उसको जो भूल न पाए पत्नी तेरी? – ये एक सच्चाई है जो बहुत कम लोगों को समझ आई है. पति सोचते हैं पत्नी उनको इम्प्रेस करने के लिए व्रत रख रही है. उनको लगता है कि करवा चौथ एक फैशन है और पत्नियों को ये फैशन करने में मजा आता है. सच तो ये है कि पत्नियों को मजा आता है व्रत रखने में क्योंकि उस व्रत के पीछे उनकी अभिलाषा और विशवास यही है कि इससे मेरे पति की आयु बढ़ जायेगी.

हम तो राजा जी हैं आज

ये बात खुला सच है कि पतियों को उमर बढ़वाने में तो बड़ा मज़ा आता है पर बदले में पत्नी को कुछ देने में उनको उतना मज़ा नहीं आता. दिन भर हीरो जैसी फीलिंग रहती है दिमाग में कि आज तो अपना राज है आज अपना दिन है पत्नी आज आज्ञाकारी बन कर रहेगी शाम को चरण वंदना करके हमारा आशीर्वाद प्राप्त करेगी हम तो आज महान हो गए. ऐसी ही फीलिंग एक बार और आई थी जब शादी के मंडप में दूल्हा बन कर बैठे हुए थे उस दिन भी तो हम राजा ही थे.

आपने उसे क्या दिया?

आपको ये बात बुरी लगेगी और लगनी भी चाहिए जब आपको हम पूछेंगे कि जो आपके लिए दिन भर भूखी रही जो आपके लिए दिन भर प्यासी रही और आप बड़े मजे से खाना खाते रहे -उसे आपने क्या दिया?..अगर ऑफिस में होते तो और भी बढ़िया बाहर के पकवान खाते रहते जूस और शेक पीते रहते पर पत्नी के द्वारा किये जा रहे इस एक दिवसीय तपस्या की पीड़ा आपको छू नहीं पाती. आपका कर्तव्य तो ये बनता है कि आप भी वैसा ही करते उसके साथ – आप भी व्रत रखते कुछ न खाते कुछ न पीते. पर आपने ऑफिस का बहाना लगा दिया. चलो कोई बात नहीं. पर ज़रा सोचो आपने बदले में पत्नी को क्या दिया?

गिफ्ट तो हैं चार दिन के

कोई भी गिफ्ट दे कर अगर आप चौड़े हो रहे हैं तो ग़लतफ़हमी है आपकी. पत्नी के चेहरे पर कुछ पलों की मुस्कान तो आप दे सकते हैं उस गिफ्ट के जरिये पर उसके दिल की ख़ुशी वो नहीं है. क्या आपने सोचा है कि क्या है वो चीज़ जो उसके दिल को ख़ुशी दे सके. हम बताते हैं आपको क्या है वो चीज़.

दिल की ख़ुशी दीजिये

चार पैसे का गिफ्ट चार दिन का गिफ्ट होता है. चार दिन में चल बसता है. दिल की ख़ुशी ज़िंदगी भर रह सकती है. पर देनी दिल से ही पड़ती है याने कि पूरी ईमानदारी से. दिल की ख़ुशी आपकी पत्नी को मिलेगी जब आपकी सच्चाई उसे मिलेगी. वो सच्चाई आपके प्यार की भी हो सकती है और आपके बलिदान की भी. प्यार तो आप सोचते होंगे सच्चा ही दे रहे हैं पत्नी को ..तो फिर और क्या बचा? कैसा बलिदान?

छोड़ दीजिये अपनी बुरी आदत

ये है बलिदान. जिस को सुनते ही आपको बुरा भी लग सकता है और गुस्सा भी आ सकता है. लगेगा बड़ी नाजायज सी चीज़ मांग ली. अरे ऐसा कैसे हो सकता है. जो बुरी आदत सालों से साथ चली आ रही है उसे एक दिन में कैसे छोड़ सकते हैं? ये तो नहीं हो सकता जी !

तो फिर अगली बार आप व्रत कीजिये

हाँ, ये नहीं हो सकता क्योंकि आप से ये हो ही नहीं सकता. बलिदान इसी को कहते हैं. छोटी-मोटी चीज़ तो कोई भी छोड़ सकता है मगर छोड़ना उसे कहेंगे जो छोड़ा न जाए- जैसे जान जैसे ज़िंदगी जैसे प्राण जैसे साँसे. बुरी आदत ऐसी ही जबरदस्त मजबूरी बन चुकी है आपकी. उसे छोड़ने में जान जाती है, प्राण निकलते हैं. तो फिर अगर आपसे बुरी आदत नहीं छोड़ी जा सकती तो ऐसा कीजिये अगली बार से आप व्रत रखिये अपनी पत्नी के लिए और दिन भर कुछ न खाइये और न ही कुछ पीजिये. अपनी पत्नी की लम्बी उमर की कामना कीजिये और कह दीजिये भगवान से और अपनी भागवान से भी कि आप ज़िंदगी के हारे हुए खिलाड़ी हैं..सब कुछ कर सकते हैं लेकिन बुरी आदत नहीं छोड़ सकते! बस हो गया..अब नहीं बचा कुछ कहने को!