क्या आप हजार साल की जिन्दगी जीना चाहते हैं?

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ज़िन्दगी भर दौड़ भाग करते हैं हम – किस लिए?
जीने के लिए – हाँ हमारा सारा जतन जीने के लिए होता है
लेकिन कितना जीते हैं हम ज़िंदगी में
कब जीते हैं हम ज़िंदगी में
क्या क्या याद है हमे अपनी ज़िंदगी का
जिसको हम कह सकें कि हमने जी थी ज़िंदगी
चलो इन बातों को सोच कर निगेटिव नहीं होते
ये सोचते हैं कि जितनी बची है अब उसे काटें नहीं
ज़िंदगी कट रही है ये सोचें नहीं
ज़िंदगी को जी लें हम
देख लेना अगर ये कर पाए, तो ये वादा है मेरा
ज़िंदगी बहुत बड़ी हो जायेगी
हज़ार साल की
क्या तैयार हो हज़ार साल की ज़िंदगी जीन के लिए
हम सब जी सकते हैं हज़ार साल की ज़िंदगी
लेकिन उसके लिए जो करना होगा – क्या हम कर पाएंगे
कर भले ही न पाएं -कोशिश तो कर ही सकते हैं
चलो आज से ही – इस वक्त से ही जाग जाएँ
अरे जागने का मतलब आँखें खोल कर ज़िंदगी को देखना शुरू करें
और फिर उसके साथ ही ज़िंदगी जीना शुरू करें
हर लम्हा
लम्हे लम्हे ज़िंदगी जी सकेंगे तो हमारा दिन भी बहुत बड़ा हो जाएगा
चौबीस घंटे का दिन अड़तालीस घंटे का हो जाएगा
पर क्या कर सकेंगे हम ऐसा?
क्या हर लम्हे हम ज़िंदगी को जी सकेंगे
क्या कर पाएंगे कोशिश इस अभी के लम्हे में जीने की
क्या हो पायेगा ऐसा हमसे कि हम इस लम्हे में ही रहें अगले लम्हे की न सोचें
हमारे दिमाग के घोड़े ज़िंदगी से तेज़ भागते हैं
हमको अपने लम्हे में रहने नहीं देते
हमको जीने नहीं देते
कहीं ये कोई श्राप तो नहीं
कि जियेंगे सारी ज़िंदगी और जी पाएंगे बस ज़रा सी ज़िंदगी
उन लम्हों की जब कभी हम बहुत खुश थे और कुछ लम्हों को
ईमानदारी से जी रहे थे
यही है ज़िन्दगी का आर्ट
यही है आर्ट ऑफ़ लाइफ
ज़िंदगी जीना सबसे बड़ा आर्ट है
ज़िंदगी जीना सीख जाइये
और अपनी उम्र को हज़ार साल का बना लीजिये
लेकिन क्या ऐसा कर सकते हैं आप?
वैसे ये इतना मुश्किल भी नहीं है और
बहुत आसान भी नहीं
चलो कोशिश करते हैं
और आज से ही शुरू करते हैं ज़िंदगी जीना
इस लम्हे से शुरू कर देते हैं ज़िंदगी जीना
अब ये है हमारी नई ज़िंदगी
और ये है हमारी पूरी ज़िंदगी
एक भरीपूरी ज़िंदगी
और एक शानदार ज़िन्दग़गी
जिसके बाद हम कह पाएंगे खुद से
कि हमने जी ली ज़िंदगी
और बहुत प्यारी है ज़िंदगी
चाहे जैसी भी है तू
आई लव यू ज़िंदगी !!