क्या Putin के पास वापसी का रास्ता नहीं बचा?

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दुनिया में शायद ही कोई ऐसी सड़क बनी होगी जिसमें यू टर्न न हो पर ज़िन्दगी की सड़का में अक्सर ऐसा क्यों होता है कि कभी कभी चलते चलते यू टर्न नजर ही नहीं आता..क्योंकि यू टर्न बना ही नहीं होता है अक्सर ज़िन्दगी की सड़क पर..
रूस ने किया है यूक्रेन पर हमला परंतु इसे कहा जा रहा है रूस-यूक्रेन युद्ध . पहले रूस ने यूक्रेन पर जंग थोपी उसके बाद यूक्रेन ने जंग पूरी ओढ़ ली. अब मामला एक दो-राहे की तरफ बढ़ रहा है जबकि रूस यूटर्न ढूंढ रहा है. इस सड़क पर नजदीक में एक मोड़ आ तो रहा है पर वह वापसी का रास्ता नहीं है -वह दो तरफा विकल्पों का एक मुश्किल रास्ता है.
इस दो-राहे का एक रास्ता जाता है विश्वयुद्ध की तरफ और दूसरा रास्ता जाता है बिना शर्त युद्ध विराम की ओर. बिना शर्त युद्ध विराम ऊपर से तो दिखता है कि यूटर्न का विकल्प है किन्तु रूस के नज़रिये से ये ठीक नहीं है. रूस के लिये युद्ध विराम तो अच्छा है परयदि यह समझौता बिना शर्त होता है तो उसे दिखाई दे रहा है कि यह संघर्ष विराम उस पर थोपा गया है. दूसरा अर्थ रूस के नजरिये से यहां ये निकलता है कि इस तरह तो समस्या के लिये मूल रूप से वही जिम्मेदार सिद्ध होता है औऱ तभी तो उसने बिना शर्त समझौता स्वीकार कर लिया है. ऐसे में जहां ये युद्ध विराम रूस के लिये राहत की एक सांस है वहीं समानांतर रूप से ये आने वाला दोराहा रूस के लिये एक मुश्किल धर्मसंकट पैदा करने वाला है.
देखा जाये तो रूस और यूक्रेन का संघर्ष तीन स्तरों पर चल रहा है. ज़मीनी स्तर पर रूसी सेना बना यूक्रेनी सेना चल रहा है, विश्व स्तर पर रूस बनाम अमेरिका, यूरोप औऱ नाटो का संघर्ष चल रहा है और व्यापारिक स्तर पर रूस बनाम अमेरिका और मध्यपूर्व के तेली देशों के बीच मल्लयुद्ध चल रहा है. मानना पड़ेगा कि ये रूस का ही जिगरा है कि एक साथ तीन तीन मोर्चों पर जंग लड़ रहा है.
ऐसा नहीं है कि ये एक-तरफा युद्ध है अर्थात रूस की तरफ से यूक्रेन पर थोपा गया युद्ध है. यूक्रेन को अच्छी तरह पता था कि जिस मुद्दे पर दोनो देशों में आज खूनी जंग चल रही है उस मुद्दे की सड़क पर रूस के लिये कोई यूटर्न नहीं है. जेलेन्स्की की गलतफहमी ने भी युद्ध को हवा दी जो युद्ध शुरू होने के एक हफ्ते में ही दूर हो गई कि युद्ध में यूक्रेन अकेला नहीं है.
सच तो यही है कि युद्ध में यूक्रेन अकेला नहीं है पर उससे भी बड़ा सच ये है कि युद्ध में बरबादी की सड़क पर यूक्रेन अकेला खड़ा है और उसे बरबाद करने वाला तूफान आज की तारीख में सिर्फ उसे ही बरबाद किये जा रहा है. शायद जेलेन्स्की को लग रहा है कि वो विश्व में अपनी एक अलग देशभक्त और बहादुर पहचान बना सकेंगे और अपने देश में एक युद्ध नायक बन कर उभरेंगे और शायद अब आजीवन यूक्रेन पर जेलेन्स्की का ही राज रहेगा. ऐसा सिर्फ जेलेन्स्की सोच रहे हो सकते हैं. उन्होंने न आज अपने देश के नागरिकों से ये पूछा है कि वे युद्ध चाहते हैं या शांति? और अधिक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब होगी जब युद्ध के खात्मे के बाद बरबादी के मलबे पर बैठे हुए जेलेन्स्की को इस सवाल का जवाब देने के  लिये कोई नहीं मिलेगा.
हालिया हालत बताती है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेन्स्की ने बयान दिया है कि वे पुतिन से बातचीत को तैयार हैं. और ऐसा यदि वास्तव में हो भी  जाये तो बहुत अच्छा हो क्योंकि दुनिया के लोगों से पूछा जाये तो वे भी यही चाहते हैं. कारण बहुत साफ है अगर  जंग नहीं थमी तो तीसरा विश्व युद्ध तय है.
पिछले तीन हफ्तों से ज्यादा दिनों से चल रही रूस और यूक्रेन का युद्ध और भीषण होता जा रहा है. अब हालात ऐसे हैं कि लगभग संपूर्ण यूक्रेन में रूस के हवाई हमले की आशंका पैदा हो गई है. इस स्थिति ने यूक्रेन की सरकार को पूरे देश में आसमानी बमबारी को लेकर चेतावनी जारी करने को विवश कर दिया है. यूक्रेन के अंदरूनी हालात बिलकुल भी ठीक नहीं है. युद्ध के बीच यूक्रेन के मारियुपोल में बचाव अभियान में शामिल बसों को रोक दिया गया है. यूक्रेन का ही एक दूसरा प्रमुख शहर लवीन में रूस के मिसाइल हमले के बाद अब चारों तरफ धुआं ही धुआं दिखाई दे रहा है.
रूस के यूक्रेन पर हमले दिन प्रति दिन गंभीर होते जा रहे हैं. यूक्रेन पर रूस ने अपनी लेटेस्ट हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) तक से हमला कर दिया है. और अब लग रहा है कि ये 26 दिनों से चल रहा युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच रहा है. एक तरफ यूक्रेन का दावा है कि आज रूस, यूक्रेन के किसी भी हिस्से में हवाई हमला कर सकता है. तो दूसरी तरफ रूस युद्ध को लेकर रूस के होठों पर खतरनाक खामोशी है. ये खामोशी खतरे को बयान करती है जिसको देखते हुए ही यूक्रेन के हर शहर में हवाई हमले की चेतावनी जारी की गई है. उधर यूक्रेन के युद्ध पीड़ित बच्चों से पोप फ्रांसिस की मुलाकात के बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. और ये तस्वीरें भी युद्ध को बुरा कहने के सिवा कुछ भी नहीं कह रही हैं.
कुछ राष्ट्रों के लिए युद्ध विराम रूस की अप्रत्यक्ष पराजय का संकेत मानी जा सकती है. विश्व के सामने क्या ये थूक कर चाटने जैसी स्थिति हो सकती है पुतिन के लिए? हो सकता है पुतिन अपनी कड़क वैश्विक छवि के मद्देनज़र यही सोच रहे हों. पर यदि पुतिन वास्तविकता को अपनी वास्तविकता की आँखों से देखें तो उन्हें स्पष्ट दिख जाएगा कि युद्ध आगे खींचना उनकी तीन तरफ़ा पराजय को जन्म दे सकती है. पहली तो ये कि फिर उनके द्वारा यूक्रेन और उसके मित्रों के लिए निर्विकल्प होने की स्थिति पैदा हो जायेगी और वे सीढ़ी तौर पर भौतिक जंग के लिए मैदान में उतर जाएंगे. दूसरी पराजय की स्थिति जो दिन प्रतिदिन बड़ी होती जा रही है वह जंग में हो रहे खर्च से पैदा हुई रूस की गिरती हुई अर्थव्यवस्था की है. तीसरी स्थिति इसका विस्तारित रूप है अर्थात आने वाले समय में विश्व के प्रमुख देशों से लगे प्रतिबंध रूस के लिए कितनी आर्थिक क्षति तय करेगी इसको अभी तय करना सम्भव नहीं है.
दुनिया मुह खोल कर देख रही है. एक पक्ष दूसरे पक्ष पर हमला करके उसे पीट रहा है. दूसरा पक्ष हड्डियां तुड़वाने को तो तैयार है पर हार मानने को तैयार नहीं है. तीसरा पक्ष दूर से खड़े हो कर पीटने वाले पक्ष को धमकियां दे रहा है और चौथा पक्ष है बची हुई दुनिया, जिसकी आंखें भी उतनी ही खुली हुई हैं जितना उसका मुह. देखा तो नहीं जा रहा पर देखना पड़ रहा है. कुछ किया नहीं जा रहा पर डर तो लग रहा है. ये डर है कि मानता नहीं – कि कहीं विश्व युद्ध न शुरू हो जाये!
दूसरी तरफ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने युद्ध को लेकर इजरायल की संसद को संबोधित किया है. अपने संबोधन में उन्होंने कह दिया है कि वे युद्ध विराम हेतु पुतिन से बात करने को तैयार हैं. उन्होंने ये चतावनी भी दी है कि बातचीत के ये प्रयास विफल रहते हैं तो एक नया विश्व युद्ध शुरू हो सकता है.
जेलेंस्की आज भी अभिमान से कह रहे हैं कि हमारा देश, हमारी जमीन ही हमारे लिए सोना है. जबकि उनकी जिद के कारण ही उनके देश की जमीन में आज मलबे का ढेर बढ़ता जा रहा है. यूक्रेनी राष्ट्रपति का दफ्तर ने जो ट्वीट किया है वह भावुक कर देता है. इस ट्वीट में कहा गया है कि देश हमारा बहुत बड़ा नहीं है. हमारे पास परमाणु हथियार भी नहीं हैं. दुनिया को देने के लिए हमारे पास तेल और गैस भी नहीं हैं. पर हमारे पास अपने लोग हैं,  अपनी जमीन है. हमारे अपने लोग और हमारी जमीन ही हमारे लिए सोना हैं.