क्या टाइटेनिक के यात्रियों को डूबने से बचाया जा सकता था?

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टाइटेनिक जहाज के बारे में एक समय कहा जाता था कि यह जहाज कभी नहीं डूबेगा, लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। और फिर आई रात 14-15 अप्रैल के बीच की जब वर्ष 1912 में उस रात ये ब्रिटिश जहाज टाइटैनिक बर्फ के एक पहाड़ से टकराकर उत्तरी अटलांटिक सागर में डूब गया। इस दुर्घटना में 1513 लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे के 75 साल बाद डूबे हुए टाइटैनिक के मलबे को भी धीरे धीरे बाहर निकाला लिया गया था.
इस टाइटेनिक को लेकर सोशल मीडिया की इस पोस्ट का दावा है कि टाइटेनिक जहाज के डूबते यात्रियों की जानें बचाई जा सकती थीं. आइये देखते हैं क्या कहती है ये पोस्ट:
जब टाईटेनिक समुन्द्र में डूब रहा था तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे।
सबसे करीब जो जहाज़ मौजूद था उसका नाम SAMPSON था और वो हादसे के वक्त टाईटेनिक से सिर्फ सात मील की दूरी पर था।
SAMPSON के कैप्टन ने न सिर्फ टाईटेनिक की ओर से फायर किए गए सफेद शोले (जो कि बेहद खतरे की हालत में हवा में फायर किये जाते हैं।) देखे थे, बल्कि टाईटेनिक के मुसाफिरों के चिल्लाने के आवाज़ को भी सुना भी था। लेकिन सैमसन के लोग गैर कानूनी तौर पर बेशकीमती समुन्द्री जीव का शिकार कर रहे थे और नहीं चाहते थे कि पकड़े जाएं, अपने जहाज़ को दूसरी तरफ़ मोड़ कर चले गए।

यह जहाज़ हम में से उन लोगों की तरह है जो अपनी गुनाहों भरी जिन्दगी में इतने मग़न हो जाते हैं कि उनके अंदर से इनसानियत खत्म हो जाती है।
दूसरा जहाज़ जो करीब मौजूद था उसका नाम CALIFORMIAN था, जो हादसे के वक्त टाईटेनिक से चौदह मील दूर था, उस जहाज़ के कैप्टन ने भी टाईटेनिक की ओर से निकल रहे सफेद शोले अपनी आखों से देखे,  क्योंकि टाईटेनिक उस वक्त बर्फ़ की चट्टानों से घिरा हुआ था और उसे उन चट्टानों के चक्कर काट कर जाना पड़ता, इसलिए वो कैप्टन सुबह होने का इन्तजार करने लगा।और जब सुबह वो टाईटेनिक की लोकेशन पर पहुंचा तो टाईटेनिक को समुन्द्र की तह मे पहुचे हुए चार घंटे गुज़र चुके थे और टाईटेनिक के कैप्टन Adword_Smith  समेत 1569 मुसाफिर डूब चुके थे।
यह जहाज़ हम लोगों मे से उनकी तरह है जो किसी की मदद करने के लिए अपनी सहूलियत और आसानी देखते हैं और अगर हालात सही न हों तो अपना फ़र्ज़ भूल जाते हैं।
तीसरा जहाज़ CARPATHIA था जो टाईटेनिक से 68 मील दूर था, उस जहाज़ के कैप्टन ने रेडियो पर टाईटेनिक के मुसाफारों की चीख पुकार सुनी, जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था, उसने फौरन अपने जहाज़ का रुख मोड़ा और बर्फ़ की चट्टानों और खतरनाक़ मौसम की परवाह किए बगैर मदद के लिए रवाना हो गया। हालांकि वो दूर होने की वजह से टाईटेनिक के डूबने के दो घंटे बाद लोकेशन पर पहुच सका लेकिन यही वो जहाज़ था, जिसने लाईफ बोट्स की मदद से टाईटेनिक के बाकी 710 मुसाफिरों को जिन्दा बचाया था और उन्हें हिफाज़त के साथ न्यूयार्क पहुचा दिया था।

उस जहाज़ के कैप्टन “आर्थो रोसट्रन ” को ब्रिटेन की तारीख के चंद बहादुर कैप्टनों में शुमार किया जाता है और उनको कई सामाजिक और सरकारी आवार्ड से भी नवाजा गया था।

हमारी जिन्दगी में हमेशा मुश्किलें रहती हैं, चैलेंज रहते हैं लेकिन जो इन मुश्किल और चैलेंज का सामना करते हुए भी इन्सानियत की भलाई के लिए कुछ कर जाए वही सच्चा इन्सान है।

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