कांग्रेस का ‘हाथ’ थामने वाले बीजेपी के ‘शत्रु’ क्या पटना साहिब में बिगाड़ सकेंगे रविशंकर का गणित?

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बीजेपी में जब सिचुएशन बिगड़ गई और लोकेशन छिन गई तो बिहारी बाबू ने आखिर उस पार्टी को अलविदा कहने का मन बना ही लिया जिसका कमल थाम कर उन्होंने राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी. बिहारी बाबू यानी शत्रुघ्न सिन्हा अब 28 मार्च को कांग्रेस में शामिल होंगे.

कांग्रेस में शामिल होने की बड़ी वजह ये है कि पटना साहिब से उनका टिकट कट गया और वहां से रविशंकर प्रसाद को बीजेपी ने उम्मीदवार बना दिया. हालांकि रविशंकर प्रसाद को अपने ही चुनाव क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के सहयोगी आर के सिन्हा के समर्थकों का विरोध झेलना पड़ा. ऐसे में अगर कांग्रेस शत्रुघ्न सिन्हा को रविशंकर के सामने उम्मीदवार उतारती है तो रविशंकर प्रसाद के सामने अपनी ही पार्टी के दो धुरंधर नेताओं की चुनौती हो सकती है.

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा था कि ‘सिचुएशन’ चाहे कोई भी हो लेकिन ‘लोकेशन’ नहीं बदलेगी. पटना साहिब के लिए उन्होंने पार्टी ही छोड़ दी क्योंकि पार्टी की वजह से राजनीति कोई कैसे छोड़ सकता है. तभी राजनीति में उन्होंने मास्टरस्ट्रोक चलते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की शान में ट्विटर पर कसीदे गढ़े. शत्रु लिखते हैं कि ‘न्यूनतम आय गारंटी योजना की घोषणा करना ‘मास्टर ऑफ सिचुएशन’ राहुल गांधी का मास्टरस्ट्रोक है.’ इसने हमारे कुछ अहम लोगों को परेशान कर दिया है और उन्होंने तुरंत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घोषणा को छल कपट करार दे दिया.’

शत्रुघ्न ने बीजेपी के भीतर रहकर बीजेपी को घेरा और राहुल की तारीफ में ट्विटर पर उंगलियों को फेरा. अब बारी शत्रुघ्न की उस बगावत की है जिसका ऐलान उन्होंने कोलकाता में ममता बनर्जी की रैली में किया था. लेकिन सोचने वाली बात ये है कि हाल ही में बिहार की पूर्व सीएम रहीं राबड़ी देवी से उनके घर जा कर मुलाकात करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने आरजेडी क्यों नहीं ज्वाइन की? क्या राष्ट्रीय जनता दल में उनके लिए ‘लोकेशन’ और ‘सिचुएशन’ नहीं बन सकी?

बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में दो पूर्व क्रिकेटर ही शामिल हुए थे तो अब बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा भी उस टीम में शामिल हो गए हैं. इससे पहले नवजोत सिद्धू और कीर्ति आजाद बीजेपी का दामन छोड़ कर कांग्रेस का हाथ थाम चुके हैं.

कहते हैं कि लोहा लोहे को काटता है. पटना साहिब की सीट कायस्थ बहुल सीट है और पारंपरिक रूप से बीजेपी की सीट मानी जाती है. लेकिन इस बार रविशंकर के इस सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा की चुनौती से मुकाबला रोचक हो सकता है. पटना साहिब सीट से बीजेपी के भीतर की कलह का फायदा शत्रुघ्न सिन्हा को मिल सकता है. इस सीट से आर के सिन्हा की दावेदारी देखी जा रही थी लेकिन रविशंकर प्रसाद को तरजीह मिली. ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा और आर के सिन्हा मुकाबले में रोमांच डाल सकते हैं. वैसे भी शत्रुघ्न सिन्हा खामोश रहने वाले राजनीतिज्ञों में कभी रहे नहीं.

बहरहाल, शत्रुघ्न सिन्हा का एक ट्वीट बीजेपी जरूर याद रखेगी.

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे. लेकिन तेरी महफिल में हम न होंगे.

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