मैं झुकेगा नहीं साला!

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हैरानी हुई ये जानकर कि फिल्मों का कितना प्रभाव पड़ता है हमारी ज़िंदगी पर. प्रभाव बुरा हो या अच्छा लेकिन पड़ता जोरदार है

मैं पुष्पा देख के टाकीज़ से बाहर निकला और पार्किंग से स्कूटर निकाला तो उसने नखरे दिखाने शुरू कर दिए. स्टार्ट ही नहीं हो रहा था. कई बार किकें मारने के बाद मैंने रुमाल निकाल कर पसीना पोंछा फिर सोचा झुका के स्टार्ट कर लेता हूँ. झुकाया तो नयी मुसीबत – वो बोला मैं झुकेगा नहीं साला..मैंने कहा अरे फिल्म मैंने देखी है असर तेरे ऊपर आ गया. मैंने भी कसम खा ली -मैं तो झुकायेगा साला, लेकिन वो भी डटा रहा, स्टार्ट ही नहीं हुआ. टाकीज़ के बगल वाले मैकेनिक को दिखाया. उसने बोला -तो वो हंसने लगा. मैंने कहा क्या हुआ भइआ- वो बोला तो आप भी.. मैंने कहा क्या मैं भी? क्या मतलब है तुम्हारा? वो बोला -जबसे ये फिल्म लगी है मेरा धंधा चमक रहा है. हर हर दुपहिया वाहन एक ही बात बोल रहा है – मैं झुकेगा नहीं साला !

घर पहुंचा तब तक स्कूटर तो भूल गया पर फिलम नहीं भूल पाया. बीबी ने लेट आने के लिए खरी खोटी सुनानी शुरू की तो रोज़ की तरह मैं आखें झुका के बाथरूम में नहीं घुस गया. वो हैरान रह गई जब उसने देखा मैं टेढ़ा खड़ा हो गया उसके सामने..और मेरे मुँह से एक ही बात निकली – मैं झुकेगा नहीं साला!

ऐसा पहली बार हुआ था सोलह सत्रह सालों में. वो समझ गई थी आज मामला गड़बड़ है. उसने झट से अपनी बहन को फोन मिला दिया. उसकी बहन और भी हैरान – तो क्या तेरे यहां भी?..तो इसने भी पूछा – तो क्या तेरे यहां भी? वो बोली सब तरफ यही हाल है यार..खैर, मैंने तो अपने वाले को सीधा कर लिया. मेरी वाली ने पूछा -कैसे? -कैसे क्या- वो बोली – खाना नहीं दिया..सीधा हो गया. तू भी मत दे खाना. फिर देख कैसे सीधा नहीं होता है! मैं खड़े-खड़े सब सुन रहा था. मैंने हालात बिगड़ते उसके पहले सरेंडर कर दिया, हँसके बीवी से बोलै – जस्ट जोकिंग यार,, तुम भी न बड़ी वो हो..जरा सी बात पे हेडक्वार्टर फोन लगा देती हो..

खैर ..सुबह तक रात वाली बात तो भूल गया लेकिन फिलम अभी तक नहीं भूल पाया था. रोज़ की तरह आज भी मैं हाफ टाइम पर ऑफिस पहुंचा तो आज गलती से बॉस मुझसे पहले ही ऑफिस आ गया था. मुझे इतना लेट देख कर बुरी तरह मुझ पे चिल्लाया. मैं लेकिन आज कुछ दुसरे ही मूड में था. बॉस के केबिन के दरवाजे पर टेढ़े खड़े हो मैंने एक हाथ दरवाजे पर टिकाया और आँखें उसकी आँखों में डालीं फिर बोला – मैं झुकेगा नहीं साला.

अरे मगर यहां तो उलटा हो गया.. बॉस और भी बुरी तरह गुस्से से लाल पीला हो गया..जोर से बोला – मैं भी साला झुकेगा नहीं.. तू तो हो गया फायर ..अब गेट से निकल बाहर ..उसका गुस्सा देख के मैं झट से बाहर आ गया..बाहर आके चपरासी से पूछा -साहब कोई फिलम देख कर आये क्या? – उसने बोला हाँ – आज पुष्पा देखी उन्होंने.. मैंने कहा -शिट यार..फिर से धोखा हो गया..

कोई बात नहीं मैं घर आने के लिए बस में चढ़ा तो एक बंदे को धक्का लग गया.. मैंने कहा – भाईसाहब देख के नहीं चल सकते क्या..उसने ऐसे घूर के देखा मुझे जैसे आखों से कह रहा हो मैं झुकेगा नहीं साला..मैंने कहा साला सब उलटा हो रहा है आजकल, इसके मुँह लगना ठीक नहीं. फिर देखा वही बंदा दस का पड़ा हुआ नोट उठाने के लिए पूरा झुक गया और झट से नोट उठा के जेब में धर लिया. मतलब साला झुकेगा नहीं पर नोट के लिए रुकेगा भी नहीं. बस से उतरा तो जमीन पर बैठे एक कुत्ते की पूंछ को मेरी चप्पलों ने बस जरा सा छू क्या लिया, वो तो खड़ा हो के काटने दौड़ पड़ा – बड़ी मुश्किल से मैने जान बचाई – मैं समझ गया था कि ये भी झुकेगा नहीं साला!

खैर, जो भी आपको बता दूँ. या तो पुष्पा मत देखना या फिर डायलॉग मत मारना – क्योंकि झुकेगा नहीं साला तो बंदा जाएगा किधर साला? झुकना तो पड़ेगा ही ..घर में बीबी को खुश रखना है तो झुकना तो पड़ेगा ही..बाहर बॉस को खुश रखना है तो झुकना तो पड़ेगा ही.. और इन दोनों के बीच में दुनिया को खुश रखना है तो झुकना तो पडेगा ही, साला..