#MissonChandrayan-2 : भारत का मून मिशन रचेगा इतिहास

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ये होगी अंतरिक्ष में भारत की लम्बी छलांग..

भारत दुनिया की एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति के तौर पर अपनेआप को स्थापित कर रहा है. मिशन शक्ति के बाद अब है ये मिशन चंद्रयान. यह मून मिशन 2 है. मून मिशन 2 के अंतर्गत भारत अंतरिक्ष में दुनिया के सामने अपना लोहा मनवायेगा और आज सोमवार 13 जुलाई को अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगायेगा. मून मिशन 2 का उद्देश्य अंतरिक्ष में ‘चंद्रयान-2’ का प्रक्षेपण करना. ‘चंद्रयान-2’ को बाहुबली नाम वाले सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी-एमके तृतीय यान के माध्यम से भेजा जाएगा. चंद्रयान-2 चंद्रमा के उस क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंच पाया है और यह स्थान है चन्द्रमा का दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र. मिशन 2 के द्वारा इससे चांद के बारे में समझ सुधारने में मदद मिलेगी और इससे इस तरह के नए अन्वेषण होंगे जो कि भारत और पूरी मानवता के लिए लाभदायी सिद्ध होंगी. तीन चरणों का 3,850 किलोग्राम वजनी यह अंतरिक्ष यान ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर को लेकर उड़ान भरेगा. आज रात दो बजकर इक्यावन मिनट पर इस प्रक्षेपण को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अंजाम दिया जाएगा.

भारत के प्रमुख अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र इसरो द्वारा इस महात्वाकांक्षी अभियान पर कार्य चल रहा है. इसरो के प्रतिनिधियों के अनुसार आज रविवार को इस मिशन की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. इसरो ने अपने जीएसएलवी-एमके तृतीय-एम1/चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती भारत के समय के अनुसार आज सुबह छह बजकर इक्यावन मिनट पर गिनती शुरू की थी. यह अभियान इसरो का अब तक का सबसे जटिल और सबसे प्रतिष्ठित अभियान माना जा रहा है और चंद्रयान-2 के बाद भारत, रूस, अमेरिका और चीन के बाद चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन जाएगा.

(सुनैना अवस्थी)

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