Modi के खिलाफ नफरत वाली पद्म पुरुस्कारों पर राजनीति

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पदम पुरुस्कारों पर राजनीति – मोदी के प्रति नफरत की निंदनीय पराकाष्ठा है – सच तो ये है कि मोदी सा राजमर्मज्ञ नहीं मिलेगा.

गुलाम नबी आज़ाद और बुद्धदेब भट्टाचार्य को पदम् भूषण देने से जो बवंडर मच रहा है, वो विपक्षी नेताओं के दिल में मोदी के प्रति नफरत की पराकाष्ठा के सिवाय और कुछ नहीं है.

ये राष्ट्रीय पुरुस्कार देने में मोदी एक राजमर्मज्ञ नेता बन कर बिना भेदभाव किये जो चयन कर रहे हैं उसका कोई मुकाबला नहीं हो सकता मगर फिर भी विपक्ष के नेता संकीर्ण मानसिकता दिखा रहे हैं.

किसी को भी राष्ट्रीय पुरुस्कार देना कोई अपराध नहीं है लेकिन उसे ठोकर मारना अवश्य एक अपराध है –वैसे तो सरकार के विभाग हर किसी अवार्डी को सूचित कर उसकी सहमति ले लेते है और यदि नहीं भी ली गई तो क्या कोई आसमान गिर गया.

कांग्रेस में जयराम रमेश ने बुद्धदेब के अवार्ड लेने से इंकार करने पर कहा है — “बुद्धदेब ने सही किया, उन्होंने गुलाम होने की बजाय आज़ाद रहना पसंद किया”.

ये कह कर जयराम रमेश गुलाम नबी आज़ाद पर तंज कस रहे थे – मतलब मोदी की सरकार से कोई अवार्ड लेना उसका “गुलाम” होना हो गया.

इतनी घटिया सोच है इन लोगों की जो इस कदर मोदी को एक “अछूत” साबित करने की कोशिश कर रहे है जबकि वो बार बार पूरे विश्व में सबसे लोकप्रिय नेता बन कर उभर रहा है.

दूसरी तरफ शशि थरूर ने आज़ाद को बधाई देते हुए कहा है —

“दूसरे पक्ष की सरकार ने भी आपकी उपलब्धियों को पहचाना और सम्मानित किया, इसके लिए बधाई हो”

शशि थरुर जी, ये “दूसरा पक्ष” (मोदी) ही है जो पार्टी लाइन से हट कर ऐसे काम कर रहा है –इसी मोदी ने शरद पवार, संगमा, तरुन गोगोई को पदम पुरूस्कार दिए थे और इसी मोदी ने प्रणब मुख़र्जी को भारत रत्न दिया था.

जयराम रमेश बताएं कि क्या ये लोग मोदी या भाजपा के “गुलाम” हो गए थे अवार्ड ले कर?

मगर कांग्रेस ने कभी किसी जनसंघी या भाजपा वाले कोई पुरुस्कार नहीं दिया –केवल नरसिंह राव ने अटल जी को पदम् विभूषण दिया था मगर राव को तो कांग्रेस के खुद ही बाद में त्याग दिया था.

कांग्रेस किसी जनसंघी भाजपाई को क्या अवार्ड देती, उसने वो अंबडेकर और सरदार पटेल को भी भारत रतन नहीं दिया –अंबेडकर को 1990 में और राव ने पटेल को 1991 दिया था भारत रत्न.

बुद्धदेब का अवार्ड लेने से इंकार कोई नहीं बात नहीं है, 1992 में नंबूदरीपाद ने पदमविभूषण और 2008 में ज्योति बसु ने भारत रतन लेने से इंकार कर दिया था –ये कामरेड केवल चीन के अवार्ड ले सकते हैं.