मोदी सरकार मनरेगा पर बुलडोजर: सोनिया गांधी के सवालों का जवाब?
मोदी सरकार मनरेगा पर बड़ा बदलाव किया है। पुरानी मनरेगा योजना को अब ‘विकसित भारत-जी राम जी’ VB-G RAM G बिल के तहत नया रूप दिया गया है, जिसमें काम के दिन बढ़ाकर 125 कर दिए गए हैं। विपक्ष इसे कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, लेकिन सरकार इसे ग्रामीण रोजगार के लिए मजबूत कदम बता रही है ।
मोदी सरकार मनरेगा सुधार: पूरी कहानी
मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 से गरीब ग्रामीणों के लिए 100 दिन का काम गारंटी देता आ रहा है। मोदी सरकार ने दिसंबर 2025 में इसे अपडेट करते हुए नाम बदल दिया और कई सुधार जोड़े। अब ये योजना ‘विकसित भारत ग्रामीण रोजगार गारंटी’ बन गई है। मुख्य बदलाव ये हैं कि काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 हो गए, डिजिटल मजबूत किया गया और केंद्र से ज्यादा नियंत्रण बढ़ा। सोनिया गांधी ने इसे ‘बुलडोजर’ चलाने जैसा बताया, लेकिन हकीकत में योजना खत्म नहीं हुई, बल्कि आधुनिक बनाई गई । ग्रामीण इलाकों में लाखों परिवार इससे जुड़े हैं, और ये बदलाव उन तक ज्यादा रोजगार पहुंचाने का दावा कर रहे हैं।
सोनिया गांधी के आरोप: कितने सही?
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने 19 दिसंबर 2025 को कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया। उनका कहना था कि महात्मा गांधी का नाम हटाकर योजना को कमजोर किया गया और बिना चर्चा दिल्ली से कंट्रोल कर लिया गया। कोविड में ये गरीबों की संजीवनी बनी थी, अब नए ‘काले कानून’ से मजदूरों का नुकसान होगा। लेकिन सरकार का पक्ष है कि नाम बदलाव विकास के प्रतीक के लिए है और 125 दिन की गारंटी से ज्यादा कमाई होगी। ये राजनीतिक बहस है, जहां विपक्ष पुरानी व्यवस्था बचाने की बात करता है और सरकार भविष्योन्मुखी सुधार ।
VB-G RAM G बिल: क्या हैं मुख्य फायदे?
नया VB-G RAM G बिल ग्रामीण विकास को तेज करने के लिए लाया गया। पहले 100 दिन का काम था, अब 125 दिन मिलेगा। डिजिटल पेमेंट और ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार कम होगा। ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग जोड़ी गई। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां MGNREGA से लाखों मजदूर जुड़े हैं, अब ज्यादा दिन काम मिलने से परिवार की आय बढ़ेगी। सरकार दावा कर रही है कि ये ‘विकसित भारत’ का हिस्सा है, जहां जी राम जी यानी ग्रामीण आत्मनिर्भरता पर फोकस । हालांकि, कुछ राज्यों में फंडिंग और लागू करने में चुनौतियां बताई जा रही हैं।
नरेगा बदलाव से ग्रामीणों को फायदा या नुकसान?
ग्रामीण इलाकों में मनरेगा मजदूरों की रीढ़ है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज या संत कबीर नगर जैसे जिलों में ये योजना सूखे और बाढ़ में सहारा देती है। नया बिल ज्यादा दिन का काम देगा, लेकिन नाम बदलाव से गांधी जी के योगदान को भुला दिया गया- ये विपक्ष का तर्क है। वास्तव में, 2025 तक मनरेगा पर 2 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुका, और नया रूप इसे सस्टेनेबल बनाएगा। अगर सही लागू हुआ तो गरीबी कम होगी, लेकिन देरी हुई तो असर उल्टा ।
पुरानी मनरेगा
नया VB-G RAM G
100 दिन काम
125 दिन काम
गांधी नाम
विकसित भारत नाम
राज्य केंद्रित
केंद्र मजबूत नियंत्रण
मैनुअल ट्रैकिंग
डिजिटल ट्रैकिंग
मोदी सरकार का विजन: क्यों ये जरूरी?
मोदी सरकार का कहना है कि पुरानीMGNREGA में लीकेज ज्यादा था। अब आधार लिंकिंग और जीपीएस से पारदर्शिता आएगी। 2025 बजट में ग्रामीण रोजगार पर फोकस बढ़ा। ये बदलाव पीएम के ‘सबका साथ सबका विकास’ से जुड़े हैं। विपक्ष को ये पसंद न आए, लेकिन ग्रामीण वोटर तय करेंगे कि सुधार सही हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य जहां NGO और कम्युनिटी वर्क ज्यादा है, वहां ये योजना सामाजिक बदलाव ला सकती है ।
भविष्य में क्या होगा?
2026 तक नया बिल पूरी तरह लागू हो जाएगा। ग्रामीण युवा अब स्किल के साथ काम पाएंगे। लेकिन सफलता लागू करने पर निर्भर। अगर फंडिंग समय पर मिली तो लाखों परिवार लाभान्वित। सोनिया जी जैसे नेता लड़ाई जारी रखेंगे, लेकिन डेटा दिखाएगा असली तस्वीर। मनरेगा हमेशा गरीबों का हथियार रहेगा, बस रूप बदल गया ।