Motivation: आपके पास है कुछ खास जो पता नहीं है आपको

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एक शेर है बहुत जबरदस्त. वो शेर होने की वजह से तो जबर्दस्त है ही, उसके अंदर मौजूद सन्देश उसे और भी जबरदस्त बना देता है. शेर सुनिए पहले फिर तौलिये इसे कि कैसा है ये शेर और है कितना भारी –
दौलतमंद हो के भी उसे लगता फकीर है
मगर हर शख्स अपनी जगह बेनज़ीर है !
ये शब्दों का सत्य नहीं है बल्कि शाश्वत सत्य है और यह सत्य सर्वकालिक भी है तथा सार्वभौमिक भी. अर्थात हमेशा से ऐसा होता आया है और हमेशा ही ऐसा होता रहेगा. यत्र भी तत्र भी और सर्वत्र भी कि -दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर ने कुछ ऐसा दे दिया है जो किसी और को नहीं दिया है. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने अपने वैश्विक गायत्री परिवार में यह संदेश दिया था – आप अचंभित न हों इस सत्य को जान कर कि आप इस विश्व के सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं!
ये बात अगर आसानी से समझ आ जाए तो बहुत अच्छा. न समझ आये तो अपने आसपास निगाहें उठा के देख लीजिये. और हाँ, ज़रा गौर से देखिएगा तो आपको दिख जाएगा कि सबके पास है वो कुछ ख़ास जो बाकियों के पास नहीं है और आपके पास भी नहीं है. कारण ये है कि आपके पास भी तो ऐसा ही कुछ है जो बाकियों के पास नहीं है.
बस इसकी को कहते हैं कुछ ख़ास का होना और ये ख़ास होना आपको बहुत ख़ास बना देता है क्योंकि बाकी दुनिया पर आप उस मामले में भारी पड़ते हैं. मगर इसके साथ ही ये जानना भी तो आपके लिए जरूरी है कि ऐसा वो क्या है जो आपमें ख़ास है और बाकी लोगों के मुकाबले आपको बहुत भारी बना देता है.
यदि आपको पता नहीं अपनी विशेषता तो उसको ढूंढना होगा. या तो वह आपके परिवार को पता होगा कि आपकी एक बड़ी विशेषता जो बचपन से आपकी पहचान बनी हुई है. अगर उनको पता नहीं होगा तो हो सकता है आपको पता हो कि कुछ ख़ास है ऐसा आपमें जो आपको प्रायः लगता है आपके भीतर बहुत सशक्त उपस्थिति दर्शाता है. पर यह भी आवश्यक नहीं है सदा कि वह ही आपकी सबसे बड़ी और सबसे ख़ास विशेषता है. तो ऐसी स्थिति में फिर आपको ध्यान देना होगा और खुद पर नज़र रखनी होगी क्योंकि कभी कहीं किसी रोज़ आपके साथ कोई ऐसी घटना घटेगी कि उस दिन आप कुछ ख़ास ऐसा कर बैठेंगे कि आप खुद चकित रह जाएंगे कि ये आपने कैसे किया. यह विशेषता ही शायद वो खासियत हो सकती है जो आपको सबसे अलग करती है और सबसे बेहतर भी.
यदि आप ढूंढने में भी कामयाब नहीं हो पा रहे और आपके पास पर्याप्त धीरज भी नहीं कि आप उस ऐसे किसी दिन की प्रतीक्षा करें जिस दिन आप कुछ विशेष कर दिखाएं तो ऐसी स्थिति में भी आपके पास एक रास्ता है जो आपको आपकी विशेषता की पहचान करा सकता है. करना कुछ ख़ास नहीं है. बस एक पेन पेपर उठाइये और लिख दीजिये क्रमवार कि आपको क्या क्या पसंद है अर्थात क्या क्या करना पसंद है. बस अब इस सूची में जो सबसे अधिक पसंद हो उसे सबसे ऊपर रखें और बाकियों को भी अपनी रूचि के कम होने के अनुसार नीचे रखते जाएँ.
इसके बाद देखें सर्वोच्च शिखर पर जो आपकी पसंद है वह हो सकती है आपकी सबसे बड़ी खासियत. इसका कारण भी सुस्पष्ट है. जो आपको सर्वाधिक प्रिय हो वह आपके व्यक्तित्व के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है और सर्वोच्च संभावना यही है कि यही वह ऐसा कार्य या विभाग हो सकता है जहां कोई आपका हाथ नहीं पकड़ सकता. दुसरे शब्दों में कहें तो पूरी संभावना है कि यही आपकी वह विशेषता है जो आपके व्यक्तित्व का सर्वोच्च कलात्मक सौंदर्य है.
अतएव, इस आलेख का जो संदर्भ है वही इसका सन्देश भी है. अर्थात कभी ये न सोचें कि आपको कुछ नहीं मिला है. अगर एक चीज़ आपको नहीं मिली है तो दूसरी मिली है. दूसरी नहीं तो तीसरी मिली होगी- अब ढूंढना आपको है और अपनेआप को बताना है कि मैं कुछ ख़ास नहीं हूँ बल्कि बहुत ख़ास हूँ!
इसलिये अपनी खासियत को पहचानिये, उसे आगे बढ़ाइये, उसे आसमानी बनाइये और दुनिया पर छा जाइये !!