Nationalistic Governance: यह है बदलते भारत की तस्वीर

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याद कीजिए 1987 में केन्द्र सरकार ने स्वीडन की कम्पनी से बोफोर्स ख़रीदा था।
आज वही कम्पनी भारत से भारत के कानपुर की ‘फील्ड गन फैक्ट्री’ में बनी हुई ‘धनुष’ नामक तोप खरीद रही है।  बोफोर्स केवल 139 कैलिबर की मात्र 27 किलोमीटर की मारक रेंज वाली तोप है। जिसको दुनिया में अभी तक सर्वश्रेष्ठ माना जाता था।
वहीं दूसरी ओर धनुष 155 कैलिबर की 42 किलोमीटर तक वार कर सकती है, जिसका सफलतापूर्वक परीक्षण मैदान, रेगिस्तान आदि के साथ सियाचिन जैसी सर्वाधिक ऊँची पोस्ट पर भी कई बार किया जा चुका है। चीन सबसे अधिक भयभीत इसी तोप से था।
इतना ही नहीं, यह स्वीडिश कम्पनी पहले सुपर रैपिड गन माउंट को इटली से खरीदती थी, जो कि सेना के बेड़े का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इटली का इस पर वर्चस्व हुआ करता था सारे संसार में। लेकिन अब वह इसको भी भारत से खरीदेगी । इटली के वर्चस्व को भारत ने छिन्न भिन्न कर दिया है।
जब आप ‘मोदी ने यह बेच दिया, वह बेच दिया’ सुनते हैं तो आपको यह भी याद करना चाहिए कि भारत में यह सब केवल छः सात सालों से ही क्यों सुनने को मिल रहा है? DRDO, इसरो, गन फैक्ट्री आदि तो पहले से ही है, तो हमें हथियार क्यों खरीदने पड़ते थे ?
कारण स्पष्ट है कि तब के पहले हम ने अपने वैज्ञानिकों को भी अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह नकारा बना रखा था।
यह है बदलते भारत की तस्वीर।
पेट्रोल लहसुन प्याज टमाटर से बाहर निकलकर इन सभी उपलब्धियों को जानने समझने, इस बदलते भारत को महसूस करने और इस पर गर्व करने की आवश्यकता है।

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