Navratri : तृतीय दिवस – माँ चंद्रघण्टा का आगमन

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जय माता दी !! मित्रोंं, आज नवरात्रि का तृतीय अति-शुभ दिवस है और वो इसलिये कि मां के तीसरे रूप का मां चंद्रघंटा के वेश में आज के दिन आगमन होता है.

देवभाषा संस्कृत में इस विषय पर कहा गया है-

*पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता।*
*प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥*
मां दुर्गा की के तीसरे स्वरुप का नाम हैं माँ श्री चंद्रघंटा। नवरात्रि के तीसरे दिन इन्ही देवी की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। देवी की कृपा से साधक को दिव्य अलोक के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं।
इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। देवी माँ का यह रूप अत्यंत ही कल्याणकारी है।
अतएव हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना तथा आराधना करें । ऐसा करके भक्त सभी कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद को प्राप्त कर सकते हैं।
हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करनी चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सदगति देने वाला है।

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