Neeraj Chopra : कैसे थे वो लम्हे जब 120 साल का इन्तजार खत्म करके India को दिलाया Gold नीरज चोपड़ा ने

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एक सौ बीस साल से इन्डिया को एथलीटिक्स में कोई पदक नहीं मिला था. आज़ादी के बाद से देखें तो भारत को पिछले चौहत्तर वर्षों से जो प्रतीक्षा थी उसका आज अंत हुआ और भारत के नीरज चोपड़ा ने देश को वह सम्मान दिलाया जिसे पाकर हर भारतवासी न केवल हर्षित है बल्कि गौरवान्वित भी है.
आज सुबह से ही भारत के दर्शक इस इन्तजार में थे कि कब आज वो प्रतियोगिता प्रारंभ हो जिसमें उनकी उम्मीद की उड़ान आसमान छू ले और  टोक्यो ओलंपिक के समापन के एक दिन पहले भारत के नाम एक स्वर्ण पदक हो जाये. कहने की आवश्यकता नहीं है कि ये उम्मीद थी भारत के उस एथलीट से जिसका नाम है नीरज चोपड़ा जो जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता के फाइनल में भारत के दावेदार थे.
और फिर आज जब ये प्रतियोगिता प्रारंभ हुई तो हर वो भारतीय जो इस का दर्शक था चाहे भारत में या दुनिया भर में – सबके दिलों की धड़कने तेज़ हो गईं. कोई भी मायूस नहीं होना चाहता था और देखा जाये तो करोड़ों भारतीयों के हृदय में ईश्वर से बस यही प्रार्थना चल रही थी कि जो कमाल नीरज चोपड़ा ने फाइनल में प्रवेश करने के पहले किया था, फाइनल में भी वही कमाल वो दुहरा दें और दुनिया भर के बड़े भाला फेंक प्रतियोगियों को पराजित करके भारत को स्वर्ण जिता दें.
चेहरे पर नज़र आता है वह आत्मविश्वास जो ताकत बना नीरज चोपड़ा का. वे जानते थे कि आज इस स्टेज पर जहाँ वे खड़े हो कर इस प्रतियोगिता का फाइनल परफार्मेन्स देने वाले हैं वहाँ उनके प्रतियोगी एक से बढ़ कर एक धुरंधर हैं और उनमें पाकिस्तान का एक दावेदार भी मौजूद था जिसने पाकिस्तानी बड़बोलेपन का परिचय देते हुए मैच से पहले ही कह दिया था कि भारत का खिलाड़ी किस्मत से यहाँ पहुँच गया है किन्तु फाइनल तो पाकिस्तान ही जीतेगा. परंतु जो परिणाम इस प्रतियोगिता का हुआ उसमें ये पाकिस्तानी दावेदारी चौथे नंबर पर हाँफती नजर आई.
 और उसके बाद आया वह क्षण जब इस फाइनल प्रतियोगिता में भारत के खिलाड़ी का नाम पुकारा गया परफार्मेेन्स के लिये. सबने सुना नीरज चोपड़ा का नाम और लोगों के दिल की धड़कने तेज होनी शुरू हो गईं. अपने पिछले राउन्ड में सोलह प्रतियोगियों के बीच प्रथम स्थान पर आने नीरज चोपड़ा को सीधे ही फाइनल में स्थान दे कर सम्मानित किया गया था. उस समय नीरज के भाले ने 87.3 मीटर की दूरी तय करके सभी को अचंभित कर दिया था. अब नीरज पर दो दबाव थे – एक तो इस प्रतियोगिता के फाइनल में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को दुहराने का और दूसरा देश भर के भारतवासियों की उम्मीदों को परवान चढ़ाने का. और उसके बाद जो इतिहास बना वो आज देश भर में वीडियो में कैद हो कर लोगों के लिये एक बहुत बड़ी खुशी की वजह बना हुआ है.
सबने देखा कि अपना परफार्मेन्स देने आये नीरज का चेहरा आत्मविश्वास से जगमगा रहा था. उसके बाद नीरज ने जब हाथ में थामे हुए भाले की तरफ देखा तो उसे सारे भारत के लोगों की उम्मीदों का चेहरा उसमें नजर आया और बजाये इसके कि नीरज दबाव में आजाते, उन्होंने अपने मन में ईश्वर का स्मरण किया और उसके बाद सारी दुनिया ने देखा जिस तरह तेजी में आकर उन्होंने नौ कदम आगे दौड़ कर जिस तरह से भाला फेंका और उसके बाद सबने देखा कि उन्होंने भाले की तरफ नहीं देखा और दर्शकों की तरफ विजयी मुद्रा में अभिवादन करते हुए अपने भावों की अभिव्यक्ति से सबको बता दिया कि विजेता कौन है. और इसके आगे बताने की आवश्यकता नहीं, परिणाम ने भी यही कहा.
सीधे शब्दों में उस प्रदर्शन की बात करें जो टोक्यो ओलंपिक में जैवलिन थ्रो प्रतियोगता के इस मैच के निर्णायक जजों ने देखा – भारत के एथलीट नीरज चोपड़ा ने फाइनल मुकाबले के अपने पहले प्रयास में ही 87.03 मीटर का थ्रो फेंका जिसका मार्क स्क्रीन पर देख कर भारतीय दर्शकों के दिल बल्लियों उछल पड़े. उठे, लेकिन अभी नीरज का टोक्यो ओलंपिक में सर्वोत्तम आना शेष था- 23 वर्षीय इस भारतीय एथलीट ने अपने दूसरा थ्रो इतना शक्तिशाली फेंका कि जजों की पैनल ने देखा कि ये दूरी तो 87.58 मीटर की है. और फिर तो नीरज चोपड़ा का नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. नीरज के बाद आने वाले प्रत्येक एथलीट ने जान लगा दी किन्तु वे भारत की शान नीरज चोपड़ा के थ्रो के मार्क के आसपास दूर तक नजर नहीं आये.
फिर आया वह सुनहरा क्षण जिसने भारत के दर्शकों की आँखों में खुशी के आँसू भर दिये. नीरज चोपड़ा नीले ट्रैक सूट में पहुंचे शेष दोनो प्रतियोगी जो रजत और कांस्य पदक विजेता थे -श्वेत परिधान में वहाँ आये. सबने देखा कि वे समतल फर्श पर खड़े थे किन्तु भारत के नीरज को बीच के ऊँचे चबूतरे पर खड़े होने का सम्मान दिया गया. और फिर शुरू हुआ एक सौ बीस वर्ष बाद भी नहीं अपितु कहें तो प्रथम बार जब एथलेटिक्स के लिये स्टेडियम में बजा भारत के राष्ट्र गान की धुन जिसने प्रत्येक भारतीय के हृदय में गौरव की तरंग पैदा कर दी. स्टेडियम में चल रहा था राष्ट्रगान और कैमरा था नीरज चोपड़ा के ऊपर. इस गौरवपूर्ण क्षण के उपरांत गोल्ड मेडल की सुनहरी सजी थाली नीरज के सामने आई औऱ उन्होंने झुक कर उसे उठाया और अपने गले में पहन लिया. उस क्षण सारा स्टेडियम तालियों से गूँज उठा. और सच कहें तो इन तालियों की आवाज हमारे कानों में हमेशा गूंजती रहेगी. भारत की शान नीरज ने बढ़ाया भारत का मान !!

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