Nepal: देउबा क्या आये, चिन्ता हो गई China को

जब से नेपाली  कांग्रेस के प्रमुख शेर बहादुर देउबा ने नेपाल के नये प्रधानमंत्री का पद संभाला है, पूरे नेपाल सहित भारत-नेपाल सीमा तथा बिहार के मधुबनी सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों में खुशी देखी जा रही है.
फिलहाल वैश्विक महामारी के इस दौर मेें भारत-नेपाल सीमा पर तनाव भी पनपा और पिछले उन्नीस महीनों से परिस्थितियाँ भी कुछ असामान्य  हैं.  बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में कई बार भारतीय मजदूरों के साथ क्रूर व्यवहार हुआ. उन्हें नेपाल के पुलिसकर्मियों द्वारा प्रताड़ित किया गया और मारापीटी भी हुई.  भारत की तरफ से  सीमा खोलने पर प्रतिबंध लागू न होने के बावजूद नेपाल ने इस  ओर कोई खास रूचि नही दिखाई थी.

रोटी-बेटी के रिश्ते अब हो सकते हैं बहाल

इसका प्रमुख कारण पिछली ओली सरकार का आड़ा- तिरछा रवैया भी रहा है और यही वजह है कि भारत-नेपाल के “रोटी-बेटी”  के संबंध जैसी निकटता नही दिखी.  सत्ता परिवर्तन तथा नए प्रधानमंत्रीेे शेर बहादुर देउबा के देश की बाग़डोर संभालने लेने से  दोनों  देशों के नाग़रिकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं.  भारत-नेपाल सीमा के खुल जाने से दोनों देशों के रिश्तों में फिर से मिठास घुल जाने की आस लगाई जा रही है.

जागी है आशा व्यापारियों की भी

रक्सौल(बिहार) भारत-नेपाल बॉर्डर से लगे इस शहर के  स्थानीय व्यापारिक संगठन इंडो-नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि नेपाल द्वारा बार्डर सील किए जाने का प्रभाव दोनों देशों के व्यापारों पर दिख रहा है. नये सरकार के आ जाने से ये आशा जगी है कि नेपाल और भारत के बीच बढ़ी दूरी पर सुधारात्मक दिशा में काम होगा.

लोगों को है बहुत उम्मीद देउबा सरकार से

नई सरकार से लोगों की बहुत उम्मीदें लगी हैं. वे सोचने लगे हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में प्रगाढ़ता फिर से देखने को मिलेगी.  ज़ाहिर है सरकार परिवर्तन से व्यापारियों में व्यवसाय के विकास को लेकर भी नई उर्जा,जागरूकता और उमंगें जगी हैं.  सीमावर्ती जयनगर अनुमंडल मुख्यालय के कपड़ा व्यवसायी अरुण जैन ने कहा कि शेर बहादुर देउबा के नये प्रधानमंत्री बन जाने से दोनों देशों के बीच व्यापार की संभावनाएँ निश्चित रूप से  बढ़ेगीं. जयनगर चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव अनिल बैरोलिया का मानना है कि अब आवागमन पर लगी बंदिश हट सकती है.  मिथिलांचल चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव शंभु गुप्ता जयनगर वाया जनकपुर-कुर्था तक रेल परिचालन को लेकर आशावादी नज़र आ रहे हैं.

अब सीमा पर सुधरेंगे हालात

पश्चिम चंपारण (नेपाल से सटा) के वाल्मीकिनगर में नाग़रिकों की प्रसन्नता का पारावार नहीं. त्रिवेणी सीमा के किराना व्यवसाय करनेवाले चंदन कुमार कहते हैं कि उनका नजरिया देउबा से पूर्व की सरकार से बिल्कुल अलग है परन्तु सर्वप्रथम सीमा (भारत-नेपाल) के हालात सुधारने की उम्मीदें लगाई जा रही है नई सरकार से. दूसरे शब्दों में बॉर्डर के हालात सुधरने से दोनों देशों के लोगों  के बी़च आवाजाही की शुरूआत होगी जो रिश्तों को और मज़बूत बनायेगा.

देउबा हैं भारत के दोस्त

नेपाल के सीतामढ़ी से भी जन-प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं.  कहा जा रहा है कि शेर बहादुर देउबा इससे पहले भी चार बार प्रधानमंत्री पद पर रह चुके हैं.  उनके कार्यकाल में भारत-नेपाल भाईचारे के सम्बंध को फलते-फूलते देखने के साक्षी लोगों का कहना है कि इस बार भी दोनों देशों के बीच सम्बंधों की बहाली में पहले से बेहतर इज़ाफा होगा ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है. सर्वविदित है कि पिछली के पी ओली की सरकार में चीन ने डबल  गेम खेलकर  नेपाल को बहला-फुसलाकर भारत से “रोटी-बेटी” के सम्बंधों में उदासीनता पैदा कर अपना पलड़ा भारी करने के प्रयास किये थे और जिसमें वो कुछ हद तक सफल भी रहा था.

चिन्ता हो गई चीन को

अब देउबा के नये प्रधानमंत्री बन जाने से चीनी कॉमरेडों की आशाओं पर पानी फिरता नज़र आ रहा है. रौतहट, महोतरी, पर्सा, बारा, सरलाही में भी इस निर्णय से जन-मानस संतुष्ट नज़र आ रहा है.  हलखोरी के राजू पांडेय का कहना है  कि दोनों देशों के बीच की खटास को दूर करने के लिए बॉर्डर पर चल रही तनाव की गतिविधियों को खत्म करना ही होगा. नेपाल-भारत मैत्री संघ के जिलाध्यक्ष रौतहट निवासी गिरीश नंदन कुमार सिंह ने बताया कि नई सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच के संबंध में निकटता बढ़ेगी.
– अंजू डोकानिया (काठमांडू ब्यूरो प्रमुख, न्यूज़ इन्डिया ग्लोबल)