परख की कलम से: आने वाले दिनों में हो सकता है World War

चीन जर्मनी की व टर्की इटली की भूमिका में है, मित्र देशों में वही सारे देश होंगे और भारत को आजाद हो कर भी इस बार भी अमेरिका का साथ देना होगा..

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राहुल गांधी से भी बड़ा बुद्धिमान अगर कही कोई है तो सऊदी अरब का युवराज मुहम्मद बिन सलमान है।
राहुल और मुहम्मद की विशेषता दुर्योधन जैसी है – दोनों मानते हैं कि उनके पिता सम्राट थे, इसलिये हस्तिनापुर उनको ही मिलना चाहिए।
1931 तक सऊदी कोई देश नही था यह कई कबीलो में बंटा हुआ था इसे एक सऊद परिवार ने एकजुट किया और वही परिवार इस पर राज करता है।
सऊदी की अपनी कोई विशेष सेना नही है इसकी मुख्य सेना बहुत छोटी है और कटप्पा जैसे उस सेना के सेनापति हैं। सुरक्षा का मूल जिम्मा अमेरिका और पाकिस्तान पर है।
जो परिवार का सबसे बड़ा सदस्य है वो ही राजा बनता है मगर 2017 में राजा सलमान बिन अजीज ने अपने भाई के स्थान पर 32 साल के अपने बेटे मुहम्मद को युवराज बनाया।
परिवार के अंदर मुहम्मद का विरोध हुआ मगर उसने परिवार के ही लोगो को मरवाना और जेल में ठूँसना शुरू कर दिया।
इस बीच उसने एक मानवाधिकार की कार्यकर्ता को जेल में डाल दिया क्योकि वो महिलाओ की ड्रायविंग की वकालत कर रही थी बाद में मुहम्मद ने खुद महिलाओ को ड्रायविंग का अधिकार दे दिया जब उस लड़की ने इसका क्रेडिट लेने की कोशिश की तो उसे फिर जेल में डाल दिया।
वाशिंगटन पोस्ट लगातार मुहम्मद बिन सलमान पर हमले कर रहा था, इसलिए मुहम्मद एक बार अमेरिका गया और वहाँ जेफ बेज़ोस से मिला।
उनसे उनका नंबर लिया और उसे हैक करके उनकी गर्लफ्रैंड के फोटो निकाल लिये और उन्हें ब्लैकमेल करने लगा।
इतने सब से आप मुहम्मद के चरित्र का अंदाज लगा सकते है। डोनाल्ड ट्रंप ईरान के विरोधी थे और सऊदी समर्थक थे मगर अब बाइडन गद्दी पर हैं और वे सऊदी के पक्के विरोधी हैं।
बाइडन ने आते ही सऊदी की डिफेंस डील रदद् की और सऊदी अकेला पड़ गया। सऊदी का साथ एक ही देश दे सकता था भारत, मगर मुहम्मद भारत का भी सगा नही हुआ।
उसने पेट्रोल के दामो पर भारत को धोखा दे दिया, नतीजा यह हुआ कि भारत ने अब सऊदी से पेट्रोल लेना इतना कम कर दिया कि वह लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुँच गया।
एक बार सलमान बिन अजीज की मृत्यु हुई और मुहम्मद बिन सलमान राजा बना – समझ लीजिए सऊदी आपको इराक से भी बुरी तरह गिरता दिखाई देगा।
इस्लाम का भविष्य टर्की के ही हाथ मे है, मेरा व्यक्तिगत आकलन है कि द्वितीय विश्वयुद्ध जैसे हालात फिर बन रहे है।
चीन जर्मनी की और टर्की इटली की भूमिका में है, मित्र देशों में वही सारे देश होंगे और भारत आजाद भले ही हो गया हो मगर इस बार भी अमेरिका का साथ देना होगा।
भारत के संविधान के कुछ दुर्बल पक्षों का फायदा उठाने वाली षड्यंत्रकारी पार्टियां भारत को 1192 का स्मरण करवा रही है। इतिहास खुद को दोहराए बेहतर है उससे पहले भारत अपनेआप को मजबूती से खड़ा करे और घर के भीतर के दुश्मनों को भी उसी तरह ठिकाने लगाये जिस तरह से बाहर के दुश्मनों को।

(परख सक्सेना)

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