पूछता है देश: क्या विपक्ष का Article 370 वापस लाने का सपना पूरा होगा?

जम्मू कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री की सर्वदलीय बैठक -सरकार ने मंशा साफ़ कर दी, अब विरोधी प्रतिज्ञा करते रहें..

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जम्मू कश्मीर पर प्रधानमंत्री की सर्वदलीय बैठक में मोदी सरकार ने अपनी मंशा साफ़ कर दी, अब विरोधी चाहे जो प्रतिज्ञा करते रहें.
प्रधानमंत्री मोदी की बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सोच-विचार कर सभी आये थे जिनमें से अपनी बात कुछ नेताओं ने बैठक के अंदर रखी  तो कुछ ने बाहर रखी.
अब महबूबा ने प्रतिज्ञा की है कि 370 की वापसी तक वो चुनाव नहीं लड़ेगी मगर उसकी पार्टी लड़ेगी — बैठक से पहले और बाद में उसने एक ही राग अलापा है कि पाकिस्तान को भी शामिल करो बातचीत में.
जबकि गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि बैठक में पाकिस्तान के बारे में किसी ने कोई बात नहीं की –आज़ाद और अन्य नेताओं ने J&K को फिर से पूर्ण राज्य बनाने पर जोर दिया.
मगर इन विपक्षी दलों ने आतंक को समाप्त करने में सरकार की कोई मदद करने का आश्वासन नहीं दिया और न आतंकवाद की निंदा की.
जब दिल्ली, 2 करोड़ आबादी होने पर भी केंद्र शासित प्रदेश हो सकती है तो 1.25 करोड़ की आबादी का J&K क्यों नहीं हो सकता –जैसे दिल्ली को विधानसभा मिली हुई है J&K को भी मिल जाएगी.
राज्य हो कर भी J&K ने कभी SC और ST विधान सभा में कभी आरक्षण नहीं दिया –जबकि 70 वर्ष में पहली बार हुए DDC के चुनावों में 33% आरक्षण महिला वर्ग को और SC और ST को आरक्षण दिया गया.
प्रधानमंत्री ने साफ़ कर दिया कि सीटों के परिसीमन के बाद चुनाव कराये जायेंगे –ऐसा भी अनुमान है कि नई विधान सभा में SC के लिए 7 और ST के लिए 11 सीट दी जाएंगी जबकि पिछली विधान सभा में केवल SC के लिए 7 सीट थी पर ST को कुछ नहीं दिया गया कभी.
कुछ न्यूज़ चैनल्स पर ये स्टोरी चलाई गई थी कि बैठक में धारा 370 को वापस लाने पर चर्चा होने की सम्भावना है –मगर वो भोले भूल गए कि अगर 370 वापस लानी होती तो हटाई ही क्यों जाती.
ऐसा बताया गया है कि प्रधानमन्त्री ने 370 और 35 ए को वापस लाने या राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए साफ़ मना कर दिया.
इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री ने ये भी साफ़ किया कि J & K को राज्य बनाने की पहल भी की जाएगी परन्तु समय आने पर ही.. और फिलहाल उसके लिए कोई समय नियत नहीं किया गया है.
सरकार ने अपनी योजनाओं का लाभ 90% लोगों तक पहुंचाने का काम किया है जो सर्वथा प्रशंसनीय है.
दूसरी तरफ घाटी के रहने वालों  ने भाजपा को मात्र 3 सीटें दीं DDC चुनाव में और बाकी सीट NC / PDP को दी –ये कश्मीरी आवाम का नजरिया बताता है — हम लेंगे तो सब कुछ मगर वोट तुमको कभी नहीं देंगे!
(सुभाष चन्द्र)

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