पूछता है देश: क्या ये कहना उचित है कि बंगाल में बीजेपी हारी है?

बंगाल में भाजपा सत्ता में नहीं आई और इस पर पार्टी के ही समर्थक निराश हो गये और दोष हिन्दुओं को देने लगे हैं कि हिन्दू ने ही साथ नहीं दिया..

0
169
क्या ये कहना उचित है भाजपा हारी है – भाजपा की हार देखने वाले कृपया हिन्दुओं को दोष न दें!
इसमें कोई शक नहीं कि बंगाल में भाजपा सत्ता में नहीं आई और इसे ले कर कुछ पार्टी के ही समर्थक निराश हो कर सबसे पहले दोष हिन्दुओं को देने लगे हैं कि हिन्दू ने ही साथ नहीं दिया.
चुनाव में हार-जीत होती है और भाजपा की कथित हार कहते हुए ये भी देखना जरूरी है कि उसके मुकाबले अन्य दल
क्या कर पाए हैं बंगाल में.
भाजपा असम में अपनी सरकार फिर से बनाने में सफल हुई है –अगर वामपंथी लोग केरल में दुबारा सरकार बनाने को अपनी बड़ी जीत बता सकते हैं तो असम में ये जीत भाजपा के लिए भी बड़ी जीत है.
पुडुचेरी चाहे छोटा सा ही भारत का एक प्रान्त सही किन्तु यहाँ भी कांग्रेस से सत्ता छीनने में सफल रही है भाजपा.
अब बात बंगाल की करते हैं जहां 2016 में भाजपा की मात्र 3 सीटें थीं जो बढ़ कर इस बार 78 पहुँच गई हैं –क्या ये बढ़ोतरी छोटी बात है और क्या ये बिना हिन्दुओं के एकजुट हुए बिना संभव हो पाई है –नहीं, और इसलिए ये कहना उचित नहीं है कि हिन्दू ने ही साथ नहीं दिया.
बंगाल में TMC की जीत में 2 फैक्टर मुख्य रहे हैं और पहले भी रहे हैं –पहला मुस्लिम फैक्टर और दूसरा सरकारी कर्मचारी का ममता के लिए झुकाव –ये बात आपको शायद गलत लगे मगर यही सत्य है जिसकी व्याख्या करनी होगी.
याद रखिये जब सरकारी कर्मचारी किसी भी शाशन करने वाली पार्टी के साथ होता है तो उस पार्टी को हराना कठिन होता है.
बंगाल में सरकारी कर्मचारियों को कई साल से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं मिला मगर क्या किसी ने उनको इसके लिए आंदोलन करते देखा है?
उन्होंने कभी ऐसा आंदोलन नहीं किया क्यूंकि कटमनी, टोलाबाजी – ये सब कुछ सरकारी कर्मचारियों के जरिये ही TMC चालू रखती है –वो कर्मचारी तो हैं हीं पर वे एक तरह से सरकार के कर्मचारी कम और TMC के लिए काम करने वाले ‘करमचारी’ अधिक हैं.
वो क्यों चाहते कि भाजपा के आने से उनके पेट पर लात पड़े और कटमनी का काला धंधा बंद हो जाये.
और यही वजह थी जिसकी वजह से उनका समर्थन ममता को मिलता रहा है और इस बार भी मिला –ऐसा काम
वो 35 साल के वामपंथी शासन में भी करते रहे हैं.
अब देखिये, बंगाल में कांग्रेस की पिछले चुनाव की 44 सीट और CPM की 26 सीट जीरो हो गईं और वो खुश हो रहे हैं कि भाजपा हार गई –ये इनके लिए ऐसे हो गया जैसे इनका पति मर गया मगर ये सौतन के विधवा होने पर खुश
हो रहे हैं.
फुरफुरा शरीफ के जरिये मुस्लिम वोटों को साधने की कोशिश में भी ये दोनों दल फेल हो गए –खुद तो डूबे, साथ में सनम को भी ले डूबे –उछल कूद कर ओवैसी भी गया था 7 सीट लड़ने मगर सब पर जमानत जब्त हो गई.
इसलिए मेरा यही कहना है कि भाजपा तो लम्बे समय तक संघर्ष करने की आदी है, आज नहीं तो कल बंगाल भी फतह हो ही जायेगा मगर अगले 5 वर्ष बहुत कठिन रहने वाले हैं बंगाल के लिये.
ममता की पार्टी जरूर जीत गई मगर चाहे 1600 वोट से ही सही, वो खुद नंदीग्राम हार गई –और एक दिन में टांग में चोट का ड्रामा भी ख़तम हो गया. खेला हो गया.
(सुभाष चन्द्र)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here