पूछता है देश: ये क्या खेल चल रहा है मॉडेर्ना-फाइजर का ?

फ़ाइज़र और मॉडर्ना के लिए सब पापड़ बेल रहे हैं - न्यायपालिका की तरफ से भी साफ नहीं कहा जा रहा है, पर लगता है कि चाहत तो ऐसी ही है कुछ..

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कल फ़ाइज़र और मॉडर्ना के खेल में एक नाम और जुड़ गया –कल The Time Magazine ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रचूर मात्रा में वैक्सीन नहीं खरीदी.
एक बड़ी साधारण से बात सबसे पहले कहूंगा कि जिस चीन ने अमेरिका के मीडिया हाउसेस को खरीद लिया, उसने भारत में किसे नहीं खरीदा होगा, ये कल्पना आसानी से की जा सकती है.
अब सारे खेल की क्रोनोलॉजी भी समझ लीजिये –
–6 / 7 मई को सुप्रीम कोर्ट कहता है कि कोरोना की तीसरी लहर के लिए तैयार होना होगा क्यूंकि वैज्ञानिकों के अनुसार इसका असर सबसे ज्यादा बच्चों पर होगा.
–7 मई को ही फ़ाइज़र 12 से 15 साल के बच्चों के लिए वैक्सीन के अनुमोदन (approval) के लिए आवेदन किया जबकि उसके पहले बच्चो की वैक्सीन की कोई चर्चा नहीं थी.
–उसके पहले 5 मई को ही कनाडा ने बच्चों के वैक्सीन के लिए अनुमोदन दे दिया था.
–फिर 11 मई को अमेरिकी सरकार ने CDC के जरिये फ़ाइज़र की वैक्सीन का अनुमोदन कर दिया.
भारत में बच्चों की वैक्सीन के ट्रायल के लिए 12 मई को भारत बायोटेक से बात की जाती है.
–16 मई को दिल्ली में पोस्टर लगाए जाते हैं और राहुल गाँधी ट्वीट करते हैं- “मुझे भी गिरफ्तार करो” मोदी जी हमारे बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी”.
लेकिन जब तक बच्चों की अलग से वैक्सीन की कोई बात नहीं उठी थी.
–लेकिन 19 मई को एक संजीव कुमार नामक वकील दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करता है कि बच्चों की वैक्सीन का ट्रायल रोक दिया जाये.
–अब केजरीवाल और पंजाब सरकारों को फ़ाइज़र और मॉडर्ना ने वैक्सीन देने से मना कर दिया – और केजरीवाल सीधा सरकार पर दबाब बनाते हैं कि वो फ़ाइज़र की वैक्सीन खरीद कर राज्यों को दें.
–उधर सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने हलफनामा दे कर कहा कि वैक्सीन के मामले में अदालत दखल न दे.
मगर कल के आदेश में जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने साफ़ साफ़ कह दिया सरकार की नीतियों की समीक्षा करना अदालत का कर्तव्य है -और टीका खरीद का शुरू से अब तक का ब्योरा मांग लिया.
इसके पहले अदालत कह चुकी है कि वैक्सीन खरीद करना केंद्र का काम है –अब कहानी हो रही है कि प्राइवेट हॉस्पिटल वैक्सीन का पैसा क्यों ले रहे हैं, सबको फ्री में क्यों नहीं मिल रही.
ऐसा लगता है कि अदालत ये समझने के लिए तैयार ही नहीं है कि 135 करोड़ जनता को वैक्सीन एक दिन में नहीं दी जा सकती वो भी तब जब राज्य सरकारें वैक्सीन बर्बाद करने में लगी हैं.
केंद्र सरकार ने कहा है कि अगस्त से दिसंबर, 2021 तक 251.6 करोड़ वैक्सीन की डोज़ उपलब्ध करा दी जाएंगी.
लेकिन सारी हाय तौबा मचाई हुई है फ़ाइज़र और मॉडर्ना की वैक्सीन खरीद के लिए जबकि फ़ाइज़र कहती है कि ”किसी को कोई नुकसान होता है उस पर कोई केस ना चले और उसका मुआवजा वहां की सरकार दे”- ये बड़े श्याणे लोग हैं !
अदालत, मीडिया, विपक्ष सब 300 रुपये की वैक्सीन को फ्री कराना चाहते हैं लेकिन फ़ाइज़र की वैक्सीन 1500 रुपये और मॉडर्ना की करीब 2000 रूपए है, केंद्र खरीद करे और फ्री में दे –क्या बात है !
(सुभाष चन्द्र)

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