क्या सचमुच किया फ्लिपकार्ट के सीईओ बिन्नी बंसल ने यौन उत्पीड़न?

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यह विवाद का विषय है किन्तु ज़ाहिरा तौर पर तो नहीं लगता कि ऐसा वास्तव में हो सकता है.

इन्डस्ट्री के भीतर वाले ही नहीं, बाहर वाले भी मानते हैं कि बिन्नी बंसल ने वाकई ऐसा किया होगा, कहना मुश्किल है. पर यह समझना आसान है कि यह आरोप एक षड्यंत्र का हिस्सा भी हो सकता है और बंसल को बाहर का रास्ता दिखा कर यह षड्यंत्र सफल भी हो गया, लगता है.

जो वक्तव्य हाल ही में वॉलमार्ट की ओर से जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि – ‘बिन्नी बंसल ने आज फ्लिपकार्ट समूह के सीईओ पद से तत्काल इस्तीफे की घोषणा की। बिन्नी कंपनी की सहस्थापना के वक्त से ही अहम हिस्सा रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम को लेकर बिन्नी ने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है.

अभी बहुत लंबा अरसा नहीं बीता है जब वॉलमार्ट द्वारा फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण हुआ है. अभी आधा साल ही बीता है याने कि सिर्फ 6 महीने..और इस वजह से भी इस घटना की वजह कुछ कुछ समझ आती है.

और ऐसा होना भी कुछ विचित्र दृष्टिगत होता है कि कम्पनी के सीईओ ने खुद अपने पद छोड़ने की घोषणा क्यों नहीं की. क्यों आखिर कम्पनी को उनके इस्तीफे की बात दुनिया को बतानी पड़ी? 

बिन्नी बंसल के इस्तीफे का यह ढंग कुछ पर्दे के पीछे की छुपी हुई साजिशों की तरफ कोई संकेत तो नहीं?

उधर कम्पनी बिन मांगे अपनी सफाई देते हुए यह कह रही है कि जब जांच हुई तो उसके बाद उस जांच के परिणामों से प्रभावित हो कर सीईओ ने इस्तीफे की पेशकश की जिसे स्वीकार कर लिया गया.  परंतु यह भी अभी तक कम्पनी की तरफ से या स्वयं बंसल की ओर से इस तरह की कोई जानकारी नहीं आई है कि अब आगे निवर्तमान सीईओ कम्पनी बोर्ड में रहेंगे या नहीं.

जैसा कि सुविदित है, बिन्नी बंसल ने अपने मित्र सचिन बंसल के साथ मिलकर फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी, लेकिन सचिन ने कंपनी के बिकने के समय ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

कमाल की बात ये है कि जांच में बंसल पर लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है. फिर ऐसा क्यूं हुआ कि बंसल ने अपने इस्तीफे की पेशकश की?

वैसे प्राप्त जानकारी के अनुसार यह यौन दुर्व्यहार का मामला अभी का नहीं है, कुछ वर्ष पूर्व का है. अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि ‘ बंसल के विरुद्ध यह आरोप जुलाई में सामने आया था. जिस महिला ने ये आरोप लगाया था वह फ्लिपकार्ट की पूर्व-कर्मचारी थी. दिलचस्प बात यह भी बताई गई कि आरोप लगाने के समय वह कंपनी में काम नहीं कर रहीं थीं.

जो रिपोर्ट बंसल के आरोप की जांच को लेकर सामने आई है उसमें इन आरोपों को ‘गंभीर निजी दुर्व्यवहार के आरोप कहा गया है और यह स्पष्ट किया गया है कि यह एक स्वतंत्र जांच थी जो कि फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट की ओर से की गई थी.

रिपोर्ट में बताया गया कि इस्तीफे का निर्णय स्वयं बंसल का है जो कि स्वतंत्र जांच के बाद उन्होंने लिया. यद्यपि बंसल ने पूरी दृढ़ता अपने विरुद्ध लगे आरोपों को निराधार बताया किन्तु पूरी जांच के दौरान बिन्नी ने जिस तरह से व्यवहार किया उससे उनका पक्ष कमजोर दिखा और उनकी ओर से पारदर्शिता का अभाव दिखाई दिया. तदोपरांत कम्पनी को उनके इस्तीफे को स्वीकार करना पड़ा.


वैसे इस फील्ड के कुछ दिग्गज मानते हैं कि यह तो होना ही था, इस स्थिति की ही अपेक्षा की जा रही थी.

(पारिजात त्रिपाठी)

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