तिहरा हत्याकान्ड नहीं, चार जानें ली गईं निर्दयतापूर्वक

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अफ़सोस की खबर है ये. आई है ये खबर पश्चिम बंगाल से. ये वही पश्चिम बंगाल है जहां की मुख्यमंत्री जय श्री राम बोलने पर हमला कर देने के मूड में आ जाती हैं, यहां मार दिए गए हैं तीन लोग और यहां की सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ा. ये ह्त्या मामूली ह्त्या नहीं है. यह एक जघन्य हत्याकांड है जिसमे एक संघ कार्यकर्ता, उनकी पत्नी और उनके छोटे बच्चे को मौत के घाट उतार दिया गया है.

दुर्गा पूजा की रात में निर्दयतापूर्वक इस तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया. मुर्शिदाबाद के जियागंज इलाके में यह पैंतीस वर्षीय संघ का कार्यकर्ता घर पर था अपनी पत्नी और नौ साल के बेटे के साथ. बाहर दुर्गापूजा का शोर था और अंदर हो रहा था यह नृशंस हत्याकांड. अगले दिन सुबह इन तीनों के शव रक्त-रंजीत अवस्था में घर पर पड़े मिले.  कहने को तो कहा गया कि यह तिहरा हत्याकांड था लेकिन यह तीन लोगों की नहीं चार लोगों की ह्त्या थी क्योंकि बंधु प्रकाश पॉल की पत्नी ब्यूटी पॉल गर्भवती थीं. अमानवीयता की हद है ये कि यदि बंधु प्रकाश पॉल से लोगों को राजनैतिक शत्रुता थी तो उनकी गर्भवती पत्नी का क्या कसूर था? और फिर उनके आठ साल के मासूम बेटे आंगन पॉल को क्यों मारा? उसने किसी का क्या बिगाड़ा था..

जिसकी सरकार उसकी पुलिस. ममता जैसी ना-ममता पुलिस है यहां की. पुलिस ने इसे अपना ऐंगिल देने की भरसक कोशिश की है, जांच में पुलिस ने बताया कि पति-पत्नी में आपसी झगड़ा चल रहा था. इसलिए हो सकता है कि यह इस झगड़े की वजह से हुआ हत्याकांड हो. पुलिस ने एक पत्र भी इस सिलिसिले में घटनास्थल से बरामद किया है. किन्तु पुलिस यह बताने में नाकाम रही कि पत्र में क्या लिखा था और पत्र का इस हत्याकांड से क्या लेना-देना है.

अवार्ड वापसी करने वाले लोग आजकल पत्र-लेखन में जुटे हुए हैं. पर इस अमानवीय हत्याकांड से उनको कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि मरने वाला न तो मुसलमान था न ही कांग्रेसी या तृणमूल पार्टी का या वामदलीय कार्यकर्ता नहीं था. केरल के बाद संघ कार्यकर्ताओं की ह्त्या के लिए अब पश्चिम बंगाल को भी जाना जाएगा और अगर केंद्र ने सख्ती नहीं बरती तो यह सिर्फ एक हत्याकांड नहीं होगा बल्कि हत्याओं की एक लम्बी शृंखला की शुरुआत होगी. 

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