‘पिंक पैन्थर’ पब्लिक में – दिल्ली में देखा गया खुलेआम

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‘पिंक पैन्थर’ पब्लिक में – खबर है, मज़ाक नहीं

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(पारिजात त्रिपाठी)

 

जिसे बच्चे टीवी पर देखते थे उसे दिल्ली की जनता ने सड़क पर देखा. नज़ारा था होटल हयात के सामने का. पिंक पैन्थर के हाथ में गन थी और उसके सामने थी एक महिला. डर के मारे कांप रही महिला को समर्थन मिला एक पुरुष साथी का जो वहां पहले से ही मौजूद था. उसे अभी अभी समर्थन की याद आई थी. समर्थन के बाद से उसका कांपना कुछ कम हो गया और फिर उधर शुरू हुआ वाद विवाद. ज़ोर की आवाज़ों में पब्लिक ने पिंक पैंथर की आवाज़ ही सुनी. आवाज़ में गालियां अधिक और सन्देश कम था. फिर देखते ही देखते पिंक पैंथर की बड़ी गाडी से भी एक युवती उतर कर वहां आ पहुंची और उसने भी जम कर पिंक पैंथर का हाथ बँटाया. अब मामला थोड़ा बराबर का हो गया दिख रहा था. हालांकि नवागंतुका गालियों और धमकियों दोनों में ही पिंक पैंथर से उन्नीस ही थी. यद्यपि अब तक कुछ और भी पुरुष काली सफ़ेद वर्दी में वहां टहलते हुए से पहुँच गए थे लेकिन आवाज़ सिर्फ पिंक पैंथर की ही गूँज रही थी. टहलकदमी कर के आये काली पेन्ट शर्ट वाले भले मानुस पिंक पैंथर से ज्यादा जेन्टलमैन लग रहे थे. इसलिये उन्होंने अपनी शराफत का पूरा परिचय दिया और बस खड़े ही रहे.

कुछ ही देर में ऐसा लगा कि बिनबुलाये अा पहुंचे इन वर्दीधारियों ने मामला शांत सा कर दिया है. तदोपरांत पिंक पैंथर का अपनी महिला साथी के साथ वापस अपनी गाड़ी में आगमन हुआ. उसकी कुछ और महिला साथीं गाड़ी में सवार थीं और उसकी वीरता का वीडिओ बना रहीं थीं. सभी ने तालियां बजा कर पिंक पैंथर का गाड़ी में स्वागत किया और देखते ही देखते पिंक पैंथर की गाड़ी हवा से बातें करने लगी.

होटल हयात के सामने चारों तरफ मुँह खोल कर खड़े लोगों को अचानक भान हुआ कि पिंक पैंथर जा चुका है और अब वे मुँह बंद कर सकते हैं. हैरान लोगों का मुँह बंद हुआ लेकिन उसके बाद जो चालू हुआ तो पुलिस आने तक चालू ही रहा. सब अपने-अपने ढंग से इस घटना का विवरण पेश कर रहे थे कि ऐसा लग रहा था मानो विभिन्न चैनलों के रिपोर्टर लाइव दे रहे हों.

खबर मज़ेदार कम डरावनी ज्यादा थी ऐसा लगा उन लोगों से मिल कर जो वहां तमाशबीन की भूमिका निभा रहे थे. दो एक तो इतने जोश में थे कि लगा अगर पिंक पैंथर ज्यादा देर वहां रुक जाता तो इनका हाथ उठ जाता. लेकिन लोगों ने क़ानून अपने हाथ में नहीं लिया. क्योंकि क़ानून पिंक पैंथर के हाथ में था. काली पिस्तौल लिए ये पिंक पैंथर दर असल पिंक पेंटर था अर्थात पिंक पैंट में था. पैरों में पिंक पैंट हाथों में काली पिस्तौल, काफी प्रभावशाली लुक बताया देखने वालों ने.

इसके बाद जानने वालों से बात हुई तो जो डरा हुआ था अर्थात जो डरी हुई थी कहने का मतलब है कि जिसे पिंक पैंथर ने धमकाया था, उस बेचारी के बारे में तो किसी ने कुछ नहीं बताया न ही उसके साथ वाले के बारे में किसी को कुछ बताने में दिलचस्पी थी. जिसने डराया उसके बारे में हर किसी ने बताया. कुछ ने उसे दबंग बताया. कुछ ने उसे दबंग बेटे की उपमा दी तो कुछ ने कहा कि बाप भी कम दबंग नहीं है. नाम भी बताया लोगों ने. तब पता चला कि दबंगों के ऐसे नाम भी होते हैं – आशीष. फिर बताने वालों ने आगे बताया कि आशीष जी बसपा के पप्पा के पुत्र हैं.

अब इससे भी आगे बढ़ कर कन्फर्म खबर की तलाश की कोशिश हुई तो पीटीसी करते एक टीवी रिपोर्टर महाशय पकड़ में आ गए. उनसे ज्यादा उनकी चीखती आवाज़ पकड़ में आई. आज की शाम होटल हयात के सामने ये दूसरी ऊंची आवाज़ थी. पहली सबसे ऊंची आवाज़ थी पिंक पैंथर की. जो कोई भी उसकी आवाज़ और उसका अंदाज़ देखने से वंचित रह गया था वहां, वो इतना पछता रहा था मानो कौन बनेगा करोड़पति में फास्टेस्ट फिंगर जीत कर भी बस दस हज़ार ले के ही लौटा हो.

”गौर से देख लीजिये इस शख्स को जो अब यहां नहीं है, क्योंकि वो यहां से जा चुका है. लेकिन आप ये न सोचें कि चला गया तो चला गया, ये कहीं भी जा सकता है और ये कहीं भी आ सकता है क्योंकि ये शख्स नेता परिवार से है. और नेता परिवारों में भी ये दबंग नेता के परिवार से है . ये दबंग नेता भी दबंग पार्टी से है और इसे आप लोग डीएसपी याने कि दबंग समाज पार्टी के नाम से न पुकारें क्योंकि ये डीएसपी नहीं बीएसपी के नेता हैं. देश की राजधानी दिल्ली के फाइव स्टार होटल हयात के बाहर खुलेआम हाथों में गन लिए इस शख्स का नाम आशीष है…”

शोर से घबरा कर हमारा रिपोर्टर साइड में आ गया और एक बोतल पानी हलक में उतार कर कुछ शरीफ टाइप के लोगों से घटना के बारे में पड़ताल की. तो पता चला कि शनिवार की इस शांत संध्या को अशांत बनाया था मूल रूप से एक बहस ने. जो दोनों पार्टियों के बीच में हुई. एक पार्टी में एक ही सदस्य था जो खुद पिंक पैंथर यानी आशीष था. दूसरी पार्टी में भी एक ही सदस्य था एक महिला के साथ वाला एक पुरुष. बताने वाले ने गौर से देखा तो उसे पता चला कि विवाद में उलझी एक पार्टी में एक था तो दूसरी पार्टी में दो थे.

पिंक पैंथर अर्थात आशीष अर्थात बीएसपी नेता का बेटा, ज़ाहिर है विवाद में हर तरह भारी पार्टी था. बाप सिर्फ नेता होता तो वही काफी था, वो तो सांसद भी था. और अगर सांसद होता तो भी ठीक था, वो तो और भी बढ़ कर था अर्थात पूर्व सांसद था. सुनते हैं कि पूर्व सांसदों को गुस्सा ज्यादा आता है. और उनसे भी ज्यादा गुस्सा उनके बेटों को आता है. तो बस, आ गया गुस्सा आशीष को. उसे खुद भी पता नहीं चला कि वो पिस्तौल निकाल कर वहां पहुंचा था या उसके पहुँचने पर पिस्तौल अपनेआप निकल आई.

आशीष का नाम सुन कर उसको मन में दबंग कहने वालों को शरम सी आयी और भी ज्यादा शरम आई जब उसके पिता का नाम पता चला राकेश. नाम से तो दबंगई की ज़रा सी भी बू नहीं आ रही थी. सरनेम पर गौर किया गया तो कुछ लोग ज़रा सा डरे. यूपी में पांडेय थोड़ा दबंग टाइप के ही होते हैं. डरना वाजिब था लोगों का.

उसके बाद का सब थोड़ा इधर-उधर देख के ही बताया बताने वालों ने. बताने वालों ने बताया कि उन्होंने सुना है कि आशीष लखनऊ में शराब और रियल स्टेट का कारोबार करता है. आशीष का भाई रितेश पांडे जलालपुर, आंबेडकर नगर से विधायक है. उन्होंने ये भी बताया कि जब आशीष की बहादुरी अपने शवाब पर थी माने कि जब वो पिस्तौल हाथ में लेकर उस महिला को धमका रहा था, तो उस समय अपने आगे वाले के पीछे छुप कर किसी ने उसका वीडियो भी बना लिया था. बताने वाले ने ये भी बताया कि अब आप देख लेना, ये वीडिओ तो वायरल हो ही जाएगा !!

फिर पुलिसवालों ने कहा कि इजाज़त हो तो हम भी कुछ बता दें. फिर बिना इजाज़त ही उन्होंने बताना शुरू कर दिया -दरअसल आशीष ने अपनी गाड़ी से गन निकाली और फिर होटल गेट पर मौजूद एक कपल की ओर बढ़ गया. फिर वह वहां उनको गाली देने लगता है. अाशीष के साथ एक लड़की और गाड़ी से बाहर आकर उस कपल के साथ गाली-गलौच करने लगती है. यही नहीं,आशीष की गाड़ी में उसके साथ मौजूद लड़कियां भी वीडियो शूट कम कर रहीं थीं, उस कपल को गालियां ज्यादा दे रहीं थीं.

पुलिस ने आगे बताया कि घटना के बाद हम हरकत में आ गए हैं. आशीष के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है. इस पूरे मामले पर संज्ञान ले लिया है हमने. अपने आर के पुरम पुलिस स्टेशन में आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला भी दर्ज कर डाला है. पुलिसवालों ने गर्व से बताया कि हमने न केवल मामला दर्ज कर डाला है बल्कि मामले की जांच भी शुरू कर डाली है.

इसके बाद हमारे रिपोर्टर को एक सीनियर टाइप का पुलिसवाला हाथ पकड़ कर कोने में ले गया. वहां उसने जो बताया वो बताया कम, जताया ज्यादा. आई मीन, एहसान ज्यादा दिखाया. उसने बताया कि दिल्ली पुलिस आशीष पांडे की तलाश में लखनऊ पुलिस के संपर्क में हैं. आप घबराओ मत, जल्द ही आरोपी पकड़ लिया जाएगा. रिपोर्टर को ये समझ नहीं आया कि इसको ये कैसे समझ आया कि वो घबराया हुआ है. दरअसल हमारे रिपोर्टर के घर से फोन ऑलरेडी आ चुका था. और वैसे भी अक्सर रात को देर से घर जाने पर हमारे रिपोर्टर की धड़कनें थोड़ी बढ़ ही जाती हैं. पता नहीं क्यों..

(photo curtsy : Google)

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