सज्जन कुमार बाहर क्यूँ?

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कानून जानने वालों के लिये ये समझ से बाहर की बात है कि सज्जन कुमार जेल में क्यूँ नहीं हैं? 

सजा ट्रायल कोर्ट दे या हाई कोर्ट –एक ही बात है. 3 साल से ज्यादा सजा पर तुरंत गिरफ़्तारी होती है. फिर सज्जन कुमार को जेल से बाहर क्यों छोड़ा गया ?

कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 के सिक्ख नरसंहार मामले में 30 अप्रैल, 2013 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट कर हाई कोर्ट ने दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा सुनाई है –जस्टिस एस मुरलीधर और विनोद गोयल की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सज्जन  कुमार बाकी जीवन जेल में बिताएंगे -सज्जन की अभी आयु 73 वर्ष है .

आज हाई कोर्ट से सज्जन कुमार “दुर्जन” साबित हुए, हो सकता है सुप्रीम कोर्ट से वो फिर “सज्जन” बन जाये –29 साल बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला हुआ और 5 साल बाद हाई कोर्ट का आर्डर हुआ –मालूम नहीं सुप्रीम कोर्ट कितना समय लगाएगा .

लेकिन सबसे अजीब बात मुझे ये लगी कि सज्जन कुमार को हाई कोर्ट ने समर्पण करने के लिए 31 दिसम्बर तक का समय दे दिया जबकि उसे दोषी करार दिया और उम्र कैद की सजा दी –सजायाफ्ता अपराधी को खुला कैसे छोड़ा जा सकता है –हाई कोर्ट में सजा सुनाते ही उसे 
गिरफ्तार कर लेना चाहिए था — अपील के साथ जमानत की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में दी जा सकती है लेकिन उसे तुरंत जेल में डालना चाहिए था .

कांग्रेस अभी भी सिखों के नरसंहार में अपना “हाथ” नहीं देख रही -तरह तरह की दलील दे रहे हैं –कपिल सिब्बल कहते हैं कि गुजरात में तो लोगों को पोजीशन मिली हुई थी जबकि कांग्रेस ने सज्जन को कोई पोस्ट नहीं दी –‘प्रेम’ के साथ लेडी जज बनाने वाले महान अधिवक्त कह रहे हैं कि सज्जन की सजा पर राजनीति ना की जाये –इधर सिब्बल को नहीं पता कि आज आपने तो एक ऐसे 
ही आरोपी को मुख्यमंत्री बना दिया .

मतलब कांग्रेसी कहना चाहते हैं कि 35 साल पहले कांग्रेस ने सिक्खों को नहीं मारा मगर वे ये दावा जरूर करते हैं कि 70 साल पहले संघ ने गाँधी को मारा था –सज्जन कुमार की सजा पर राजनीति ना की जाये मगर कांग्रेस को अधिकार है 70 साल से गाँधी वध पर राजनीति करते रहने की. 

27 अक्टूबर 2018 को हाई कोर्ट के जजों ने फैसला सुरक्षित किया था जिसे सुनाने में देर हुई है –ये फैसला भी 5 राज्यों के चुनावों से पहले आ सकता था –हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सज्जन कुमार और अन्य का कुकर्म मानवता के खिलाफ अपराध था और उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था .

राजनीतिक संरक्षण किसी पार्टी का तब मिलता है जब उसके बड़े नेता जो पार्टी को चलाते हैं, वो ऐसा संरक्षण देने का फैसला करें –कांग्रेस के कौन नेता थे सज्जन कुमार को संरक्षण देने वाले, ये कौन बताएगा –क्यूंकि सज्जन कुमार, हरि किशन लाल भगत, धर्मदास शास्त्री और जगदीश टाइटलर सभी अपने आप को इंदिरा गाँधी का बेटा कहते थे .

लेकिन सुना है आज की कांग्रेस पार्टी ने सज्जन कुमार को बचाने के लिए अदालत में अपने वकील खड़े करने का मन बनाया है –हो सकता है उन्हें डर हो, कही सज्जन कुमार कोई भेद ना खोल दे .

मेरे दिमाग में कल से ही ये प्रश्न कौंध रहा है और कुछ इस बारे में कल भी लिखा था –जब 3 साल से ज्यादा की सजा ट्रायल कोर्ट देता है तो मुजरिम को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है और जमानत 
हाई कोर्ट से ही मिलती है –मतलब ऊपरी अदालत से जहाँ मुजरिम  अपील कर सकता है .

अब सजा ट्रायल कोर्ट दे या हाई कोर्ट दे, एक ही बात है, सज्जन कुमार को 3 साल से ज्यादा क्या, पूरी उम्र की कैद की सजा हुई है और मगर उसे तुरंत गिरफ्तार न करके, समर्पण करने के लिए 
31 दिसम्बर तक का टाइम हाई कोर्ट ने दे दिया .

इस तरह हाई कोर्ट ने ही सज्जन कुमार को 2 हफ्ते की जमानत दे दी जबकि ये जमानत सुप्रीम कोर्ट ही दे सकता था –क्या ये कानून का मजाक उड़ाने वाली बात नहीं है – कल हाई कोर्ट खुद ट्रायल कोर्ट की ही भूमिका में था क्यूंकि उसने सज्जन कुमार की सजा पर फैसला  करना था -जैसे ट्रायल कोर्ट में फैसला सुनाते समय आरोपी हाजिर होता है वैसे ही कल सज्जन कुमार को कोर्ट में मौजूद रहने के लिए कहा जाना चाहिए था .

लेकिन अब सज्जन कुमार एक दिन के लिए भी जेल नहीं जायेगा क्यूंकि 31 दिसम्बर से पहले वो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर देगा और वहां से हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लग जाएगी –उसके बाद तो ईश्वर ही जाने सुप्रीम कोर्ट कब फैसला करेगा .

क्या वास्तव में इस संबन्ध में कोई कानूनी प्रावधान नहीं है? 

(सुभाष चन्द्रा)

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