‘हनी’ की ‘ट्रैपिंग’ पार्ट-1: एमपी में बड़ी वाली ‘रसीली’ ब्लैकमेलिंग

ये कहानी हनी ट्रैप की वो दास्तान है जिसने शांतिप्रिय मध्यप्रदेश को सुर्ख़ियों में ला दिया..

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वो तारीख थी 17 सितंबर जब मध्यप्रदेश के इंदौर जिला नगर निगम में कार्यरत इंजीनियर हरभजन सिंह ने पलासिया थाने में रपट लिखाई कि उनको ब्लैकमेल किया जा रहा है. उनकी ये एफआईआर एक आम एफआईआर नहीं थी. किन्तु रिपोर्ट लिखने वाले और लिखाने वाले दोनों को पता नहीं था कि ये एफआईआर देश भर में सुर्खियां बटोरेगी.

साइकिल स्टैन्ड में एक साइकिल का गिरना कहर ढा देता है..क्योंकि उसके बाद साइकिलों के गिरने की लाइन लग जाती है. यहां भी बात निकली तो दूर तलक गई. एक से अनेक हो गईं मध्यप्रदेश की हनीट्रैप वाली कहानियाँ. तार खुले एक से दूसरे में जुड़े और बहुत से लोगों को सिर मुड़ाते ही ओले पड़े.

इस मामले की कहानी के साथ सामने आईं कई ब्लैकमेलिंग की कहानियाँ. और शहद की कढ़ाई में डुबकी लगाने वाले फंसते नज़र आये. ऊपरी तौर पर अभी तक इस फिल्मी सी लगने वाली दासतान में कई नौकशाह, राजनेता और पत्रकारों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है. एफआईआर में हरभजन सिंह ने दावा किया था कि उन्हें 29 वर्षीय आरती दयाल नाम की एक महिला द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा था. उक्त महिला ने तीन करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की थी और रकम न चुकाने पर इंजीनियर के कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई थी.

पुलिस ने जब जांच शुरू की तब पता चला कि एक गैर सरकारी संगठन ने कथित तौर पर राजनेताओं, नौकरशाहों और कई बड़े रसूखदारों को ब्लैकमेल करने के लिए उनके अश्लील वीडियो बनाए हैं जिन्हें सार्वजनिक करने की धमकियों के एवज में उनसे जबरन वसूली की जाती थी।

जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गिरोह के द्वारा छह वरिष्ठ राजनेताओं और कम से कम 10 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के अलावा सिविल इंजीनियरों और बिल्डरों को लालच दिया गया था। इनमें से कुछ से वसूली करने की भी खबरें हैं. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.

इस मामले में पहली पकड़ हुई संदिग्ध श्वेता स्वप्निल जैन की जो कि पुलिस के मुताबिक सारे कांड की मास्टरमाइन्ड है. इसके साथ ही दबिश धर के पुलिस ने धर दबोचा पांच दूसरी सुन्दरियों को. एक पुरुष भी इसी कड़ी में गिरफ्तार हुआ. एक तरफ तो इन सभी के बचाव में इनके वकील सदाबहार घिसी-पिटी बात कह रहे हैं कि इनको फंसाया जा रहा है और इस सारे मामले को जबरदस्ती रचा गया है. इनका ये आरोप भी है कि पुलिस हिरासत में आरोपियों की कुटाई-पिटाई भी कर रही है.

इस दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर हुई जिसमें सारे मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई. इधर जैसे-जैसे जांच कदम बढ़ा रही थी वैसे वैसे ही प्रदेश की नौकरशाही और राजनीति में हड़कंप मचती नजर आ रही है. दोनो प्रधान राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर वार-पलटवार करने में लग गये हैं.

जैसा बताया गया है, इसमें शिकार को बड़े ही स्वाभाविक तरीके से फंसाया जाता था. हनीट्रैप कांड की तथाकथित प्रमुखआरोपी श्वेता विजय जैन सारी प्लानिंग करती थी. वह आरती को लीड रोल में रखती थी और पूरी तैयारी के साथ अफसरों और नेताओं से उसकी दोस्ती करवा देती थी. इनका होमवर्क इतना कामयाब होता था कि शिकार को पता ही नहीं चल पाता था कि उसने कोई कलाकारी नहीं की है, बल्कि कलाकारी तो सामने से हो रही है वो भी हर कदम गिन गिन के.

जानकारी के अनुसार आरती अपना काम पक्का करती थी और शिकार को अपने हुस्न और इश्क के जाल में पूरा फंसा कर उल्टा खड़ा कर देती थी. इसके बाद वह शिकार के साथ रंगीन प्रेमालाप का गुप्त कार्यक्रम आयोजित करती थी जिसमें वह प्रमुख भूमिका में होती थी. गैंग के सभी साथी अपनी भूमिकायें निभाते हुए इस निजी-रासलीला का फिल्मांकन कर लेते थे. मेहमान शराब और शवाब की मस्ती में ऐसा चूर होता था कि उसे अपने आसपास चल रही फिल्म की शूटिंग का ज़रा भी भान नहीं हो पाता था.

इस के बाद शुरू होता था फिल्म का शेषार्ध अर्थात रिलीज़ न करने की धमकी दे कर इस फिल्म के मुख्य नायक से पैसे की डिमान्ड की जाती थी. उस के पहले उसे मेहनत के साथ बनाई गई पूरी फिल्म का प्रीमियम शो दिखाया जाता था जिसे देख कर हीरो का कलेजा मुह में आजाता था. उसके नेचुरल अभिनय की तारीफ करते हुए श्वेता उससे इस फिल्म के ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन को रोकने के लिये मोटी रकम की मांग करती थी. और कांपते हांथों से उनका शिकार उनके हांथ में पोटली रख देता था. इंजीनियर हरभजन के लिए बिछाया गया जाल कुछ इस तरहा का ही था.

मध्यप्रदेश पुलिस ने बताया कि आरती के कई नाम हैं जैसे आरती दयाल उर्फ आरती सिंह उर्फ ज्योत्सना. पुलिस की जांच में पाया गया कि इस रंगबिरंगे गैंग की सरदार श्वेता जैन है. हैरानी की बात ये सामने आई कि हरभजन सिंह से श्वेता की मित्रता लगभग एक दशक पुरानी थी. हरभजन को देने वाली अपनी सुन्दर सेवाओं के बदले वह उससे अपने भाई राजा के लिए सरकारी ठेके हासिल करती थी. श्वेता ने आगे चल कर धीरे से इस इन्जीनियर प्रेमी को अपनी सखी आरती भेंट कर दी. वैसे तो श्वेता ने दोनो की दोस्ती कराई थी और वह इन दोनों के निजी रिश्तों से पूरी तरह वाकिफ थी लेकिन आरती के दिमाग में शायद कुछ और चल रहा था. आरती ने हरभजन से कहा कि हम दोनो के अंतरंग संबन्धों के बारे में श्वेता को कोई इल्म नहीं होने देना है.

(क्रमशः)

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