Ayesha Suicide: ‘मेरी मुहब्बत हो तुम आरू, बहुत प्यार है तुमसे मुझे’ – मरने से पहले लिखा था आयशा ने

आयशा दुनिया से चली गई लेकिन उसने अपनेआप को बेगुनाह साबित कर ही दिया भले ही उसने अपनेआप को उस गुनाह कि सज़ा दे दी जो उसने किया ही नहीं था..

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मुहब्बत पति से भी होती है, ये साबित कर दिया आयशा ने. आज के इस दौर में जब शादी के बाद मुहब्बत का कत्ल हो जाता है, आयशा ने मुहब्बत की थी और बेपनाह की थी अपने पति से. ये बात अलग है कि उस मुहब्बत के काबिल वो कभी नहीं था. दुनिया को अलविदा कह देने वाली इस प्यार करने वाली बीवी का नाम अगर आयशा है तो उस इंसान का नाम जो बेशर्मी से इसी दुनिया में है और आयशा का पति है, उसका नाम है आरिफ.

नदी में कूद कर जान दे दी अपनी

आयशा की वजह से देश की सुर्ख़ियों में गुजरात का अहमदाबाद फिर एक बार आया. अहमदाबाद के सावरमती रिवर फ्रंट से नदी में कूदकर अपनी ज़िंदगी खत्म कर लेने वाली वाली आयशा की मौत ने लोगों को दुखी कर दिया. अफ़सोस का स्वाद कसैला हो गया जब सबको पता चला कि उसने अपने पति के कारण अपनी जान ले ली. लेकिन कमाल है ये जिसको मुहब्बत कहते हैं, मरते दम तक भी उस पति के लिए आयशा के दिल में नफरत नज़र नहीं आई.

आयशा के सुइसाइड नोट से पता चला

आयशा के सुइसाइड नोट से पता चला कि जिससे नफरत होनी चाहिए थी उसे, बहुत प्यार था उसे उससे और वो था उसका पति आरिफ. वही आयशा के जीने की वजह बना था और उसके मरने की वजह भी. आयशा ने अपनी मौत से पहले जो सुसाइड नोट लिखा था, उसमें उसकी मुहब्बत की खुशबू है तो वहीं उसका का दर्द भी छलका है. इस सुइसाइड नोट में आयशा के अलफ़ाज़ में आरिफ के लिए बेइन्तिहाँ मुहब्बत नज़र आई लेकिन डर से सराबोर एक अफ़सोस भी अपनीमौजूदगी का अहसास कराता रहा और आयशा मरते दम तक अपनी बेगुनाही का सबूत देती रही.

मौत से पहले लिखा था खत

गुजरात का मीडिया बताता है कि आयशा ने आत्महत्या से पहले अपने पति आरिफ को लिखा था एक खत जो आयशा की ज़िंदगी का आखिरी खत बन गया था. और इस खत के साथ दुहरा अफ़सोस ये जुड़ गया कि ये खत लिखा तो गया मगर भेजा नहीं गया. हिंगलिश में लिखा हुआ आयशा का ये सुसाइड लेटर अब पुलिस के पास है. इस खत की शुरुआत बहुत मार्मिक है जिसमें आयशा ने ‘माय लव आरू’ लिख कर अपने दिल की बात कहनी शुरू की थी.

‘माय लव आरू, नाराज हूं लेकिन..’

आयशा ने मुहब्बत के फूल बरसाए थे उसके लिए जिसके लिए दुनिया छोड़ दी उसने. आयशा ने लिखा था – मेरी मुहब्बत आरु, मैं तुमसे नाराज़ ज़रूर हूँ लेकिन बहुत मुहब्बत करती हूं तुमसे. तुम मुझे माफ़ कर देना लेकिन एक दरख्वास्त करती हूँ तुमसे -मुझसे इतनी नफरत न करो. ऐसी बहुत सी बाते हैं जो मैंने नहीं कहीं हैं तुमसे..

आशिफ था बीच में

जो गलतफहमी आरिफ को हुई है उसकी वजह था आशिफ, जो आयशा का दोस्त था. लेकिन निगाहों में शक उतर जाये तो दिमाग में फितूर उतर जाता है. आरिफ ने कोशिश भी न की कि हकीकत का पता लगाए और आँखों ने जो झूठे तिलस्म उसे दिखाए, उसे सच मान बैठा और फिर हुआ ये कि आयशा दुनिया से चली गई. आरिफ और आशिफ के नाम में श का फर्क था और इसी श ने शक का काम किया और शक ने ले ली ज़िंदगी एक बेगुनाह की.

‘मेरा बेस्ट फ्रेंड है वो..’

आयशा आगे लिखती है – ‘आशिफ मेरा बेस्ट फ्रेंड है, वो मेरा भाई है. लेकिन मुझे बहुत तकलीफ पहुंची जब तुमने अपनी बुराइयों को छिपाने के लिए मेरा नाम खुलेआम आशिफ के साथ जोड़ दिया. माई लव आरू, तुमको कम से एक बार मुझसे प्यार से पूछना चाहिए था, मैं तुम्हारा सारा कन्फ्यूजन दूर कर देती. मगर अफ़सोस, तुम्हारे पास तो वक्त ही कहां था.’

‘तुम्हारे अलावा किसी की नहीं हो सकती हूँ..’

आरिफ के नाम अपने आखिरी खत में आगे लिखती है आयशा – ‘आरिफ तुम खुद में बिजी रहते हो. मेरी बातें सुनना तुमको हमेशा वक्त की बर्बादी लगती है..मुझे ये भी पता है कि मुझसे तुम इर्रीटेट हो गए हो, और उसकी वजह ये है कि तुम मेरे लिए गलत सोचने लगे हो. आरू, मैं नाराज हू तुमसे, बहुत नाराज हूं इस बात से कि धोखा दिया है तुमने मुझे. लेकिन इन सबके बाद भी मैं तुमसे प्यार करती हूं. बहुत प्यार करती हूं तुमसे. मैं तुम्हारे अलावा किसी और की नहीं हो सकती. इसलिए मैंने फैसला कर लिया है कि अब चली जाऊं यहां से..’

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