अमिताभ बच्चन कहते हैं कि उनका कोई धर्म नहीं

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वो कहते है, उनका सरनेम श्रीवास्तव है पर उनके पिता ने स्कुल में दाखिल करते समय उनका सरनेम बच्चन लिखवाया इससे उनके धर्म का पता नही लगता और उनके पिता यही चाहते थे और वे स्वयं भी इसी बात पर दृढ है इसी लिए वो आज भी ऐसा ही कह रहे हैं।

पहली बात अगर बिग बी सोचते है कि श्रीवास्तव सरनेम कोई धर्म है और बच्चन लिख देने से उनका धर्म शून्य हो जाएगा तो निश्चय ही या तो वे खुद को धोखा दे रहे हैं या उन लोगो को धोखा दे रहे हैं जिन्होंने उन्हें महानायक मान उनके प्रति श्रद्धा प्रगट की है।

पर अगर बाघम्बरी मठ के महंत द्वारा सन 2017 में बताई गई बातो को सामने रखे तो मालूम होगा कि या तो बिग बी झूठ बोल रहे है या वे एक संत को झूठा सिद्ध कर रहे हैं।

अमिताभ बच्चन का जन्म दिन 11 अक्टूबर को आता है, और इलाहाबाद में जन्में बिगबी का यहां के हनुमान मंदिर से खास नाता है। बाघंबरी गद्दी मठ के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि ने अमिताभ के बारे में कुछ बातें बताते है। वे कहते हैं कि – साल में 3 बार महानायक का कोई खास आता है, उनके नाम पर पूजा-अर्चना करवाता है और प्रसाद मुंबई ले जाता है।

  • स्वामी नरेंद्र गिरि बताते हैं, अमिताभ के पिता डॉ. हरिवंश राय हनुमान जी के परम भक्त थे। हर शनिवार और मंगलवार को वे अमिताभ-अजिताभ के साथ इस मंदिर में जरूर आते थे।
  • उस समय हरिवंश राय बाघंबरी गद्दी मठ के महंत और मेरे गुरुजी स्वामी बलदेव गिरी महाराज के पास घंटों बैठते थे। पिता के साथ आते-आते अमिताभ भी हनुमान जी के भक्त बन गए थे।
  • अमिताभ की जब भी ज्यादा तबीयत खराब होती, वो यहां जरूर आते। 2 बार उनका अनुष्ठान भी कराया गया। पहला अनुष्ठान साल 1982-83 में फिल्म कूली की शूटिंग के दौरान घायल होने पर हुआ था।
  • उस समय बाबूजी उन्हें मुंबई से इलाहाबाद लेकर आए थे। स्वामी बलदेव गिरी महाराज ने 101 वैदिक ब्राम्हणों से 11 दिन तक एकदशनी यज्ञ करवाया था। यज्ञ की पूर्णाहुति के दिन हवन करते समय सूचना मिली थी कि अमिताभ को आराम हो गया है। तब से अमिताभ बच्चन हर साल इस मंदिर में अर्जी लगवाते आ रहे हैं।
  • 2011 में जब अमिताभ दोबारा गंभीर रुप से बीमार हुए थे, तब उनके भाई अजिताभ ने अनुष्ठान कराने की गुजारिश की थी। उस समय 21 वैदिक विद्वानों से 7 दिन का सूर्योपासना यज्ञ कराया गया था। ब्राह्मणों के लिए 51 हजार रुपए की दक्षिणा अजिताभ की ओर से भेजी गई थी। उन्होंने 51 किलो का पीतल
    का घंटा भी मंदिर में टंगवाया था, जो आज भी मौजूद है।
    अगर बिग बी खुद को धर्म हीन मानते है तो ये उनका स्वयं का फैसला है जिसका उन्हें हक है पर देश की जनता को भी हक है की वो उनसे पूछे की क्यों धन और बिगड़े स्वास्थ के लिए कभी भगवान को मान लेना और अब अंतराष्ट्रीय प्रसिद्धि के लिए धर्म को ठोकर मार देना आखिर उन्हें ऐसा करने की क्यों आवश्यकता आन पड़ी।
    दुनियाँ में कोई भी व्यक्ति ऐसा नही हो धर्म हीन हो, सनातन संस्कृति में तो प्रत्येक व्यक्ति और वस्तु को दायित्व दिया गया है।
    पति धर्म ,पत्नी धर्म ,माता धर्म ,पिता धर्म ,भाई धर्म ।
    क्या बच्चन महाशय बताएँगे की वो इन धर्मो को भी त्याग चुके है।
    गाय एक पशु है पर त्याग और समर्पण के अपने धर्म को धारण किये रहने से आज वो करोडो हिंदुओं की आराध्य बन कर हिन्दू धर्म का एक अनिवार्य अंग बन चुकी है।
    एक कुत्ता भी मालिक की एक रोटी के बदले वफादारी का धर्म निबाहते हुए मालिक और उसके सारे परिवार के लिए प्राणों की बाजी लगा देता है।
    बिग बी भले ही सस्ती लोकप्रियता के लिए आज धर्म को दाँव पर लगा रहे हो पर अंत में उनके हाथ सिर्फ और सिर्फ कृतघ्नता, तिरस्कार और गुमनामी का पछतावा ही आएगा।

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