चलते -चलते यूं ही कोई मिल गया था!

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1अगस्त ट्रैजेडी क्वीन मीना कुमारी का जन्मदिवस है. दर्द को पर्दे पर ही नहींं ज़िन्दगी में भी उसी शिद्दत से जीने वाली मीना कुमारी को चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था..मगर साथ चल न सका!

इस जीवन सफर में चलते हुए हम में से हर किसी को कभी न कभी ,कोई न कोई एक ऐसा अजनबी ज़रूर मिलता है, जो बस मिलते ही, पहली ही नज़र में हमारी पूरी जिंदगी बन जाता है.और बहुत बार फिर ऐसा भी होता है कि एक दिन ये अजनबी बिन कारण बताए, हमें छोड़कर अचानक हमारी दुनिया से न जाने कहाँ चला जाता है. और फिर हम उसके इंतजार मे हर पल बेचैन रहकर उसकी वापसी की राह देखते रहते हैं मन में विश्वास लिए कि वो फिर से वापिस अवश्य आएगा.

यहां ध्यान देने वाली बात ये भी है कि उस अजनबी ने हमसे लौट आने का कोई वादा तो नहीं किया होता परंतु हम बस अपने दिल और उसमें बसे उसके प्रेम के विश्वास को आधार मानकर उसका इंतजार करने लगते हैं.

ऐसे ही एक अजनबी के मोह में बंधी मीना कुमारी अपने अजनबी के इंतज़ार में इस गीत के ज़रिए अपनी उम्मीदों का दीया जलाए बैठी हैं.. जो हमें एक प्रेमिका के दिल में उठते इंतज़ार के दर्द और उम्मीद के बीच के द्वंद को बहुत खूबसूरती से बयां करता हैं.

‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था…’ पाकीजा फिल्म का ये गीत आज भी लोगों के जुबान से नहीं उतरता. इस गीत को और भी खूबसूरत बनाया था बेपनाह हुस्न और बेहतरीन अदायगी की मलिका मीना कुमारी ने.

1971 की फ़िल्म पाकीजा का ये गीत ‘चलते-चलते’ ग़ुलाम मोहम्मद के संगीत पर कैफ़ी आज़मी ने लिखा है और इसे लता मंगेशकर ने अपने स्वर से सजाया है.

पाकीजा का ये गीत हमेशा से ही मेरे पसंदीदा नग़्मों में से एक रहा है, मैं भी अक्सर अपने अजनबी को याद कर अकेले में इसे गुनगुनाती रहती हूं.

इस गीत में मीना कुमारी की खूबसूरती और हाव-भाव हमारा दिल ही निकाल कर ले जाते हैं. मुजरे के स्टाइल में फ़िल्माया गया यह गीत जिसके बोल और पायल की झंकार पर मन बरबस ही झंकृत होने लगता है.

मीना कुमारी को नृत्य की देवी कहना ही उचित होगा क्योंकि शायद वही एक ऐसी अदाकारा हैं जिनके चेहरे का हर एक भाव तक नृत्य करता प्रतीत होता है !

‘चलते चलते यूँ ही कोई मिल गया था
सरे राह चलते चलते
वहीँ थम के रह गयी है,
मेरी रात ढलते-ढलते.’

पहली नज़र का ये प्रेम जिस पर रात ही क्या दिल भी ठहर जाता है. कोई राह चलते यूं अचानक ऐसे मिल गया हो कि आज उसके इंतज़ार में प्रेमिका की ही तरह रात भी ढलने को कतई तैयार नहीं है क्योंकि दिल कहता है कि वो अजनबी प्रेमी दिल की पुकार सुन आएगा तो अवश्य ही !

पूरे गीत में प्रेमिका की नजरें दरवाजे पर ही लगी रहती हैं और दिल की धड़कन बाहर से आती हर आहट पर घटती-बढ़ती रहती है.

‘जो कही गई ना मुझसे, वो ज़माना कह रहा है
के फ़साना बन गयी है, मेरी बात चलते चलते !’

प्रेमिका अपने प्यार की जिस बात को किसी से कहना नही चाह रही और सबसे छुपाना चाह रही है, वो बात उसका चेहरा देखकर हर कोई आसानी से पढ़ कर आपस में उसके चर्चे कर रहा है. क्योंकि ये कहा जाता हे कि प्रेम छिपाए नही छिपता और किसी भी प्यार करने वाले के चेहरे पर इसकी रौनक अलग ही दिखती है.

‘शब-ए-इंतज़ार आखिर,
कभी होगी मुख़्तसर भी
ये चिराग बुझ रहे हैं,
मेरे साथ जलते जलते
यूँ ही कोई मिल…’

अपने अजनबी प्रेमी का इंतज़ार करती प्रेमिका को पूरा विश्वास है कि उसके इंतज़ार की लंबी रात ख़त्म जरूर होगी. और केवल ये चिराग ही नहीं बल्कि इंतज़ार करते करते प्रेमिका खुद भी भीतर से कहीं न कहीं अपने प्रेमी के विरह में तिल तिल कर जल रही है.

वैसे इस गीत वाली प्रेमिका का इंतज़ार सुखद रहा था. अंत में उनका वो अजनबी प्रेमी उनके विश्वास पर खरा उतरा और चिराग बुझने से पहले अपने प्रेम का वादा निभाने चला आया. परंतु कुछ बदनसीब प्रेमी ऐसे भी हैं जिनके जीवन में आज भी एक अंतहीन, काली ,शबे-इंतजार पसरी हुई है.
ईश्वर से प्रार्थना है कि ऐसी इंतजार भरी रातें किसी भी प्रेमी के जीवन में बाकी न रहें.

और काश !’ हर किसी को उसका ‘चलते-चलते’ मिलने वाला अजनबी भी एक बार ही सही जीवन का चिराग बुझने से पहले मिलने आ जाए…वरना कोई हैरत नहीं कि इस गीत की तासीर कहीं उसके साथ अगले जन्म में भी न चली जाए…

(सुज्ञाता)

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