पिया तोसे नैना लागे रे !

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स्वर साम्राज्ञी लताजी ने ‘पिया तोसे नैना लागे रे ‘ को जिस प्रकार गाया , वह अमर हो गया , और वहीदा जी ने इस गीत के बोलों को अपने खूबसूरत ,सम्मोहक नृत्य द्वारा जिस प्रकार पर्दे पर उतारा , मानो संपूर्ण सृष्टि की सांसे ही थम गई , कि अब जब नैना मिल ही गए तो फिर क्या शेष रहा ?
यहीं अंत हुआ सब !

और उस अंत के बाद जैसे आगे और कुछ कहने, सुनने, सोचने, समझने को बाकी ही न रहा !

वैसे भीे प्रेम में नयनों की गुपचुप स्वीकृति मिलने के बाद फिर दिलों में और किसी चाह के लिए स्थान बचता ही कहां है ?

वर्ष 1965 में ‘नवकेतन फिल्मस ‘ के बैनर तले, विजय आनंद द्वारा निर्देशित सुपरहिट फिल्म ‘गाइड’ के इस गीत में राजू गाइड(देव आनंद ) से नैना मिला कर रोज़ी (वहीदा रहमान ) तो मानो अपनी सुध बुध भूल कर जैसे उसके हाथों में अपना संपूर्ण जीवन थमा, निश्चिंत होकर प्रेम में ऐसे डूब गई कि फिर न रास्तों का होश रहा और न ही मंजिल का !

पिया तोसे नैना लागे रे’ एक अद्भुत मधुर शास्त्रीय रचना है जिसे रुपक ताल में नृत्य द्वारा प्रस्तुत किया गया है. कहा जाता है कि यह फिल्म अपने रिलीज के तय वक्त से दो महीने देरी से रिलीज़ हुई थी , कारण था , कि सचिन देव बर्मन को इस गीत में एक खास प्रकार का वाद्य यंत्र चाहिए था जो मिल नहीं पा रहा था.
आखिरकार वह मिला, गीत पूरा हुआ और सचिन दा के उस समर्पण का परिणाम दुनिया के सामने है.

वहीदा रहमान के अनुसार उनकी नृत्य कला को फिल्म इंडस्ट्री ने काफी देर से पहचाना क्योंकि लोगों की राय थी कि वे एक नृत्यांगना की तरह कभी दिखती नहीं थी !

क्योंकि यह गीत हमेशा से ही वहीदा जी के दिल के सबसे करीब रहा , एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया भी था कि “जब फिल्म बन रही थी तब मैंने विजय आनंदजी से खास गुज़ारिश की थी कि चाहे मेरे डायलाग्स बेशक कम कर दो लेकिन मेरा डांस ज़रा सा भी मत काटना! विजय आनंद ने अपना वायदा निभाया और शायद तभी यह जादुई प्रस्तुती हमें अपने जादू में बांधती है.”

चार महान कलाकार , सचिन देव बर्मन, शैलेंद्र,लता और वहीदा ने मिलकर ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ नामक गीत की जो जादुई कलाकृति रची वह अजर अमर है. इस जादुई गीत में हमारी भारतीय सभ्यता की बहुत ही शालीनता के साथ सभी त्यौहारों की सुन्दर झलक देखने को मिलती है. पहली बार प्यार में पड़ने का क्या अहसास होता है , वह वहीदा जी को देख कर समझ आ जाता है.

और वैसे भी प्रेम में पगा मन तो बिन त्यौहार ही त्यौहार सा आनंद पाता है! देखा जाए तो यह गीत केवल एक गीत ही नहीं है~
यह तो रोज़ी और राजू के प्रेम में डूबी एक ऐसी कलाकृति है जिसमें आपको झलक मिलेगी ~

रंगों , दीपों और
तबले की थाप की !
चमकते चांद की !
महावर सजे पैरों में
खनकती पायल की !
गाढ़ी मेंहंदी लगे गोरे हाथों में
खनकती ,हरी-भरी चमकीली
चूड़ियों की चमचमाहट की!
भोर की लाली में , पनघट पर
चिड़ियों की चहचहाहट
के बीच हंसती खिलखिलाती
और चुहल करती सखियों की!
नदिया की चंचल लहरों पर सवार
पहले प्रेम के हर अहसास को जीती
प्रिया के सुधबुध खोकर,
प्रेम में लयबद्ध होकर
थिरकते घुंघरु बंधे पैरों के
बेमिसाल नृत्य कौशल की !
सोने के पिंजरे से निकल ,
ऊँचे आसमान में निडर होकर
उड़ती एक सोन चिरैया की !
चहकती, फुदकती पंक्तिबद्ध हो नाचती
खूबसूरत परियों के झुरमुट की!
और ये झलक मानों सदा के लिए दिल में बसी रह जाती है !

8 मिनट लंबे इस गीत को जिसने नहीं जीया वह जीवन के एक बहुत ही खूबसूरत रंग से अछूता रह गया! गीत की लंबाई अधिक होने के बावजूद भी यदि एक बार इसे सुनने बैठेंगे तो यकीन मानिए बीच में चाह कर भी न छोड़ पाएंगे पूरा ही करके उठेंगे !

इसका संगीत कुछ ऐसा है कि यदि इसे किसी निराश एवं जीवन से हार चुके किसी व्यक्ति को सुनाया जाए तो वह निराशा से बाहर निकल आएगा!

मिसेज़ मारको अपने सपनो को पूरा करने के लिए फिर से रोज़ी उर्फ मिस नलिनी बन अपनी नृत्ययात्रा राजू गाइड के दिशा निर्देशन में कस्बे के छोटे से विद्यालय के वार्षिकोत्स्व के स्टेज से जो एक बार शुरू करती हैं तो वह यात्रा फिर महानगरों के थ्रीडी स्टेज पर डिजिटल लाइट्स, तालियों की गड़गड़ाहट और मिस नलिनी के आटोग्राफ देते खूबसूरत हाथों पर जाकर ही ठहरती है.

सफलता के इस गुलदस्ते का श्रेय राजू और रोजी दोनों ही एक दूसरे को सौंपने को तत्पर दिखाई देते हैं !

राजू गाइड की रोज़ी जो कल तक 40 साल की औरत लगा करती थी ,इस गीत में आज एक नवयौवना लग रही है जो भोली ,नादान, शरारती और जीवन से भरपूर है , और फिर जब वो अपने पहले प्रेम के अहसास में डूबी नृत्य करती है तो दुनिया स्तब्ध रह जाती है!

वियोग के अहसास से भरे इस गीत के सभी अंतरे बेहद ही खूबसूरती से निभाए गए हैं –

‘रात को जब चाँद चमके जल उठे तन
मेरा मैं कहूँ मत करो चंदा इस गली का फेरा
आना मेरा सैयाँ जब आए
चमकना उस रात को जब
मिलेंगे तन-मन मिलेंगे तन-मन,
पिया तोसे नैना लागे रे!’

वो चांद जिसकी रौशनी में हर प्रेमी जोड़ा अपने प्रेम को परवान चढ़ाता है , वही चांद तब अवांछित और तुच्छ हो जाता है जब प्रेमी से बिछुड़ कर प्रेमिका व्यथित होती है और चांद से कह देती है कि यहां आकर कर चमकने की आवश्यक्ता नहीं , फिलहाल वो यहां से चला जाए और कहीं और जाकर चमके क्योंकि वह अपने पिया की यादों के अंधेरे में ही खुश है!

सच भी तो है कि पिया बिन शायद चांद की शीतल रौशनी भी विरहिणी का तन जलाती ही होगी न !

‘भोर की बेला सुहानी, नदिया के तीरे
भर के गागर जिस घड़ी मैं चलूँ धीरे धीरे
तुम पे नज़र जब डालूं
जाने क्यों बज उठे कंगना
छनक छन छन छनक
छन छन, पिया तोसे
पिया तोसे नैना लागे रे !’

इस अंतरे में , भोर की खूबसूरत बेला में सिर पर गागर रख नदिया के तट पर पिया से शर्माती-लजाती , रोज़ी से अधिक खूबसूरत कभी कोई और नायिका शायद ही लग पाए! पूरा अंतरा जब देखते सुनते हैं तो मंदिर की घंटियों सा ही कानों में बजता प्रतीत होता है !

इस गीत में न जाने क्यों वहीदा जी को देखकर यह विश्वास और अधिक पुख्ता हो जाता है कि हां , वास्तव में , स्त्री ही ईश्वर की बनाई सबसे खूबसूरत कृति है!

‘आई होली आई सब रंग लाई
बिना तेरे होली भी ना भाए
भर पिचकारी सखियों ने मारी
भीगी मोरी सारी हाए हाए
तन बदन मोरा कांपे थर-थर
धिनक धिन-धिन तिनक तिन-तिन
पिया तोसे नैना लागे रे!’

होली के सभी रंग चाहे कितने ही गाढ़े हों लेकिन प्रेम के रंग के बिन सब व्यर्थ हैं !यदि प्रिय साथ हो तभी हर रंग खूबसूरत है. ऐसे पिया के बिना होली जैसे रंगों भरे त्यौहार की कल्पना ही नहीं की जा सकती !

‘जग ने उतारे धरती पर तारे ,
और मन मेरा मुरझाए
उन बिन आली , कैसी दीवाली
मिलने को जिया अकुलाए
आ सजन पायल पुकारे
झनक झन झन झनक झन झन
पिया तोसे नैना लागे रे!’

पिया साथ नहीं तो चाहे ये संसार कितना भी रौशन क्यों न हो विरहिणी के मन में तो घनघोर अंधेरा ही छाया रहता है !

वैसे देखा जाए तो दो प्यार भरे दिलों का मिलन जिस भी दिन होता है , वह दिन उन दोनों के लिए किसी भी त्यौहार से बढ़कर होता है !

पिया मिलन में ही होली, दीवाली ,ईद सभी त्यौहार अचानक एक साथ मनाने का जी स्वत: ही करने लगता है!

प्यासा की गुलाबो ,काला बाज़ार की अल्का, बीस साल बाद की राधा , रेशमा और शेरा की रेशमा , नीलकमल की सीता और गाइड की रोज़ी उर्फ ‘नलिनी’ का किरदार निभाने वाली वहीदा रहमान और ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ गीत का तिलस्म शायद सदियों तक यूं ही कायम रहेगा !

और हां , यदि भविष्य में कभी किसी गीत को खूबसूरत गीतों का ‘ब्रैंड ऐंबेसेडर’ बनाने की आवश्यक्ता पड़ेगी तो यकीनन वह गीत यही होगा~

‘पिया तोसे नैना लागे रे !’

(सुज्ञाता)

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