शुभ दीपावली !! – हट जा ताऊ सपना आई : ‘देसी क्वीन’ सपना चौधरी की लाइफ स्टोरी

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(सभी सम्मानित पाठकों को दीपमालिका पर्व पर न्यूज़ इंडिया ग्लोबल की हार्दिक शुभकामनायें !!)

सपना चौधरी मूल रूप से एक जन-नर्तकी हैं. नृत्य एक कला है और हमारे देश में नृत्य को शास्त्रीय कला के रूप में ही स्थान मिला है. सोनल मानसिंह, मल्लिका साराभाई, यामिनी कृष्णामूर्ति आदि बड़े नाम हैं जिन्होंने नृत्य में भारत को विश्व मानचित्र पर सम्मान दिलाया है.

किन्तु एक नृत्य वह भी होता है जो हम शादी ब्याह में देखते हैं. एक नृत्य उसके अतिरिक्त भी होता है जो गाँव-कस्बों में घरेलू कार्यक्रमों में होता है और स्थानीय सार्वजनिक कार्यक्रमों में ऐसे ही नाच-रंग के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं जिनमें बाकायदा नाचने वालों को बुलाया जाता है. ये नाचने वाले स्टेज पर विभिन्न फ़िल्मी गीतों पर और स्थानीय भाषा के गीतों पर ठुमके लगाते हैं और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरते हैं.

ये कार्यक्रम मूल रूप से मनोरंजन की दृष्टि से आयोजित होते हैं, कला की दृष्टि से नहीं. इनको ही हम नाचने वाले न कह कर जन-नर्तक नाम से सम्बोधित करेंगे. इनको देखने वाले भी आम जनता के ही लोग होते हैं. आभिजात्य वर्ग का इनसे कोई लेना देना नहीं है.

सपना चौधरी ऐसी ही एक जन-नर्तकी हैं जो मूल रूप से हरियाणा की हैं. यद्यपि आज इस अट्ठाइस वर्षीय जन-कलाकार ने गायिका, डांसर और अभिनेत्री तीनों ही विधाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज की है. रोहतक शहर के मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाली सपना के पिता का 2008 में देहावसान हो गया था. और यह वही वर्ष था जब अठारह वर्ष की सपना ने जन-नर्तन की दुनिया में पहला कदम रखा.

शुरू में रागनी के गीतों पर ऑर्कस्ट्रा में नाचने वाली सपना धीरे धीरे स्टेज शो भी करने लगी. स्थानीय कार्यक्रमों में उसे स्टेज परफॉरमेंस के लिए बुलाया जाने लगा. लेकिन उनके नाचने की शैली शुद्ध रूप से जन-नाच की ही रही. अपनी इसी विशेषता को सपना ने अपनी पहचान में बदला. हरियाणा के कई शहरों में कार्यक्रम आयोजित होने लगे और उसके ठुमके देखने के लिए उसके दर्शक रात-रात भर बैठे रहा करते थे. इस तरह जन-नर्तन में दक्ष सपना धीरे धीरे सपना से सपना चौधरी बन गई.

अपने करियर की शुरुआत में सपना रागनी कलाकारो की टीम का एक मामूली हिस्सा भर थी. लेकिन फिर क्रमशः हरियाणा में और आस पास के राज्यों में रागनी प्रोग्रामो में रागनी पार्टियों में भाग लेने लगी. फिर कुछ ही समय में सपना ने स्टेज डांस करना भी प्रारम्भ कर दिया.

इसके बाद आया एक हरियाणवी लोक गीत ‘सॉलिड बॉडी रै’ जिस पर किया गया सपना का डांस हिट हो गया. लाखों लोगों ने ये वीडियो देखा. फिर तो सपना को हरियाणा की तरह ही दूसरे राज्यों से भी बुलावे आने लगे. और वह सपना चौधरी के रूप में बाकायदा डांसर के रूप में जाने जाने लगी.

इसके बाद सपना चौधरी की यात्रा लगातार आगे बढ़ती चली गई. उसने गायन के क्षेत्र में भी पदार्पण किया लेकिन यह प्रयास भी उसके नृत्य के प्रयास की भांति ही था. इसमें जन-तत्व ही था, शास्त्रीयता नहीं. कुल बीस से ज्यादा गीतों में अपनी आवाज़ दी है. फिर उनको बॉलीवुड में एंट्री मिली जर्नी ऑफ़ भांग नामक आइटम नंबर ने उन्हें मुंबई की मायानगरी में आमंत्रित किया.

फिर आई फिल्म वीरे की वेडिंग जिसमें सपना ‘हट जा ताऊ’ गाने में नाचती दिखाई दीं. इसी तरह फिल्म नानू की जानू जिसमे अभय देओल हीरो थे, में अपने नाम वाला ही आइटम नंबर किया. इस गीत ‘तेरे ठुमके सपना चौधरी’ ने सपना को बहुत जन-वाहवाही दिलाई.

और इस तरह सपना एक जन-सेलेब्रिटी में बदल गयी. अब राखी सावंत, पूनम पांडेय आदियों के दिन पूरे हो गए और उनका स्एथान ले लिया सपना चौधरी ने.

इन दस वर्षों ने सपना की कोशिशों को बहुत कामयाबी के मुकाम दिखाए. पिछले वर्ष बिग बॉस ने भी उन्हें अपने 11 वे सीज़न में एक प्रतिभागी के रूप में निमंत्रित क्या था.

अब तो सपना चौधरी इंस्टाग्राम पर भी हैं और नित-नए उनके रूप-चित्र उनके प्रशंसकों को लुभाते रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी पीठ पर – देसी क्वीन का टैटू गुदवाया था और उसका फोटो इंस्टाग्राम में डाला था. उसके बाद तो उनके उस पिक को पसंद करने वालों की जैसे भीड़ ही लग गई है.सपना की इस पिक को एक लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं और वह लगातार वायरल भी हो रही है. सपना के फैन्स जोरदार कमेंट्स कर रहे है वे और उनको को रियल देसी क्वीन बता रहे हैं. कोई उनको देशी क्वीन लिख रहा है तो कोई ब्यूटी क्वीन. अपने डांस से लोगों का दिल जीतने वाली सपना चौधरी ने अपने टैटू से भी उनको काफी मोहित कर रखा है.

ऐसा नहीं है कि 2008 से 2018 के इन दस वर्षों के अपने सफर में सपना चौधरी को सिर्फ फूल ही मिले हैं, उन्होंने अपने सफर में कुछ कांटे भी सही हैं. बात अधिक पुरानी नहीं है.दो साल पहले फरवरी 2016 में गुड़गांव में सपना चौधरी की शैली वाला ही एक जन-कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें सपना ने एक रागनी गाई थी. इस रागनी के दौरान ही उन पर एक आरोप लगा जिसके अनुसार उन्होंने अपनी रागनी में दलितों के लिए जातिसूचक शब्द बोले थे.

तुरंत रागनी के गीत पर आपत्ति दर्ज हो गई और एक दलित संगठन ने सपना चौधरी के विरुद्ध हिसार के थाने में एफआईआर दर्ज करा दी. यही नहीं उनके खिलाफ गुड़गांव के एक थाने में भी प्राथमिकी दर्ज हुई. सपना के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के साथ साथ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 34 के अंतर्गत भी मामला दर्ज किया गया. सारे प्रकरण की जांच हेतु एक विशेष जांच दल की नियुक्ति भी की गई.

सपना की गलती पकड़ा गई. सपना को दंड स्वरुप सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करनी पड़ी. उनके माफी मांगने के बाद भी सोशल मीडिया साईट पर दलित संगठनो द्वारा उनके खिलाफ अभियान चलाया जाता रहा. बताया जाता है कि सोशल मीडिया पर लगातार उनके खिलाफ बहुत आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती रहीं और यह सिलसिला काफी दिन चला. सपना इससे बुरी तरह परेशान हो गई और हालत यहां तक आ पहुंची कि उन्होंने आत्महत्या करने का प्रयास भी किया. बाद में सितम्बर माह में सपना को कोर्ट से बाकायदा जमानत भी मिल गई.

आज सपना भोजपुरी, पंजाबी और हरियाणवी सिनेमा की लोकप्रिय जन-गायिका और जन-नर्तकी है. सुदर्शन एवं बुद्धिमान व्यक्तित्व की स्वामिनी सपना को हो सकता है आने वाले दिनों में हम किसी हिंदी फिल्म में लीड रोल में भी देखें. क्योंकि सपना चौधरी का सफर अभी जारी है..

(पारिजात त्रिपाठी)

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