सिल्वर स्क्रीन से सियासत की ज़मीन का सफर

सियासत की पिच पर आप पूरी जिंदगी चौके छक्के भी जमा सकते हैं... इसमें बढ़ती उम्र की थकान मायने नहीं रखती...

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सियासत का स्वाद ही कुछ ऐसा है कि हर आदमी जिंदगी में एक बार इसे चखना चाहता है… तमाम लोग सियासत में अदद एक मौका पाने के लिए कोई न कोई जुगत भिड़ाते रहते हैं ताकि इसकी रसोई में उनका भी भविष्य पककर मसालेदार और लज़ीज हो जाए… इसमें हर्ज भी क्या है सियासत है ही ऐसी फील्ड जहां आप तजिंदगी नॉट आउट रहते हैं, यहां करियर खत्म होने का डर नहीं होता, फैन फॉलोविंग भी कम नहीं होती, उम्र ढलने का भी डर नहीं होता बल्कि जैसे जैसे उम्रदराज होते है तो आपको जनता और संजीदगी से लेने लगती है…

सियासत की पिच पर आप पूरी जिंदगी चौके छक्के भी जमा सकते हैं… इसमें बढ़ती उम्र की थकान मायने नहीं रखती… सियासत में हर मिजाज के लोगों का इस्तकबाल होता है चाहे वो आम हो या खास, खेल की दुनिया का हो या गुनाहों की, संत समाज का हो या फिर अदाकारी की दुनिया का… सभी के लिए यहां उम्मीदें बरकरार रहती हैं… हम अपनी इस रिपोर्ट में बात करेंगे कुछ हसीन दिलकश अदाकारओं की जिन्होंने अपनी अदाओं से बॉलीवुड में तो खूब नाम कमाया, वहीं सियासत की दुनियां में भी अपने जलवों से विपक्षियों को चारों खाने चित कर दिया…

जयललिता

इन अदाकारओं में दक्षिण भारत की अदाकारा जयललिता सबसे ऊपर हैं… जयललिता ने न सिर्फ बॉलीवुड और साउथ की फिल्मों से लोगों का दिल नहीं जीता बल्कि राजनीति की दुनिया में भी रहते हुए उन्होंने अपनी छवि ऐसी बनाई कि जनता की दीवानगी उनके लिए और बढ़ गई… सियासत की ज़मी पर उन्हें अम्मा के नाम से पुकारा गया… जयललिता ने 1964 से लेकर 1972 तकरीबन 300 फिल्मों में काम किया, जिसमें से ज्यादतर फिल्में उन्होंने एमजी रामचंद्रन के साथ की… एमजी रामचंद्रन ने जहां उनके फिल्मी कैरियर को शानदार बनाया, वहीं उनके राजनीतिक कैरियर को भी एक दिशा और दशा दी… एमजी रामचंद्रन की मृत्यु के बाद जयललिता ने खुद को उनका वारिस घोषित कर प्रदेश राजनीति के शिखर पर जा पहुंची… जयललिता 1982 से 2016 तक के राजनीतिक सफर में पांच बार कर्नाटक की मुख्यमंत्री रहीं और उनकी गिनती देश के कद्दावर नेताओं में होती रही…

जया बच्चन

जयललिता की तरह बॉलीवुड की वर्सेटाइल एक्ट्रेस जया भादुड़ी यानि जया बच्चन ने भी फिल्मी कैरियर के ढलान आने के बाद राजनीति की ओर रुख किया… उनके पति अमिताभ बच्चन ने जहां खुद को राजनीति के लिए सही नहीं मानते हुए राजनीति को अलविदा कह दिया, वहीं जयाप्रदा को उनसे उलट सियासत में कई सम्भावनाएं नजर आईं, जिसके चलते उन्होंने राजनीति में अपने जीवन की दूसरी पारी खेलने का फैसला ले लिया…  साल 2004 में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थाम कर सियासत की चौखट में पहला कदम रखा… समाजवादी पार्टी ने भी जया बच्चन की छवि को भुनाने की पूरी कोशिश की, नतीजतन जया बच्चन इसी साल समाजवादी पार्टी से राज्यसभा की सांसद बनी… जया बच्चन पार्टी में लगातार सक्रिय रहीं, जहां उनके काम को लेकर कसीदे पढ़े गए वहीं उन पर तंज़ भी कसे गए… कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी को लेकर जया बच्चन का रुख हमेशा नरम ही रहता है… इस नरम रुख की वजह उनके पति अमिताभ बच्चन और नरेंद्र मोदी के संबंध बताए जाते हैं… लेकिन जया बच्चन ऐसी आलोचनाओं का डर कर नहीं बल्कि डट कर सामना करती हैं… जया बच्चन राजनीति में अपने बेबाकी से ही जानी जाती है… सियासत में उनकी सक्रियता की वजह से ही वो अब तक तीन बार राज्यसभा से सांसद रही हैं

जयाप्रदा

जयललिता, जया बच्चन की तरह दक्षिण भारत और बॉलीवुड की एक और हसीन अदाकारा ने फिल्मों के बाद राजनीति का सहारा लिया…  जयाप्रदा नाम की ये अदाकारा अपने दौर की जबर्दस्त नायिका रही हैं…  हिंदी फिल्मों के साथ साथ इनके दक्षिण भारतीय फिल्मों में इन्होंने अपने अदाकारी का जलवा जम कर बिखेरा…  पूरी फिल्मी कैरियर के दौरान इनकी इमेज बेहद साफ सुथरी और किसी भी कंट्रोवर्सी से दूर रहने वाली रही… लेकिन जयाप्रदा की राजनीति की पारी फिल्मों की कहानी की तरह रही… जिसमें हर पल ट्विस्ट और टर्न आते रहे, इस में दर्द भी रहा तो खुशी भी रही, प्यार करने वाले भी मिले तो सताने वाले भी… जयाप्रदा साल 1994 में तेलगू देशम पार्टी को ज्वॉइन कर राजनीति का ककहरा सीखा और कुछ समय बाद ही एनटी रामाराव कैंप को छोड़ कर चंद्रबाबू नायडू के गुट में शामिल हो गईं, जयाप्रदा तेलगू देशम पार्टी से पहली बार सांसद बनीं… बाद में चंद्रबाबू नायडू से मतभेदों के चलते तेलगू देशम पार्टी छोड़ कर वो समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं और इसी पार्टी से दो बार रामपुर से सांसद बनी…लेकिन बाद में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव और जयाप्रदा के राजनीतिक गुरु अमर सिंह और समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के बीच मह्त्वाकांक्षा की लड़ाई के चलते जहां अमर सिंह पार्टी से बेदखल हो गए वहीं जया प्रदा भी पार्टी में हाशिये पर चली गईं… जयाप्रदा  के लिए आजम खान उनके राजनीतिक जीवन में एक खलनायक की तरह रहे, जिनके साथ जया प्रदा का छत्तीस का आंकड़ा रहा है और दोनों के बीच शाह और मात का खेल अभी भी जारी है… अमर सिंह के बाद समाजवादी पार्टी में जयाप्रदा की उपेक्षा लगातार होने के बाद जया प्रदा राष्ट्रीय लोकदल पार्टी में शामिल हो गईं और लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन जयाप्रदा का जादू इस बार नहीं चला और वो चुनाव हार गईं… अब जयप्रदा रामपुर से बीजेपी की आस हैं और उनके सामने उनके जानी दुश्मन आजम खान हैं… देखना ये है कि आजम को मात देकर जयाप्रदा अपने ज़ख्मों का हिसाब कर पाएंगी या आजम खान के दिए घाव जयाप्रदा के लिए नासूर साबित होंगे…           

हेमा मालिनी

बॉलीवुड की ड्रीमगर्ल रहीं हेमामालिनी भी इन दिनों राजनीति की लाइम लाइट में अपनी चमक बिखेर रही हैं… साल 1999 में विनोद खन्ना के लिए पंजाब के गुरुदासपुर से चुनाव प्रचार के दौरान हेमा मालिनी बीजेपी से जुड़ गईं लेकिन आधिकारिक रूप से साल 2004 में हेमा मालिनी बीजेपी की सदस्य के साथ साथ राज्यसभा की सांसद बनीं… साल 2010 में हेमा मालिनी को पार्टी के महसाचिव की जिम्मेदारी दी गई और इसी के साथ उनकी नियुक्ति लोकसभा के सदस्य के रूप में की गई… राजनीति में हेमा की सक्रियता से उनका कद पार्टी में और बड़ा हो गया… साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने मथुरा से राष्ट्रीय लोकदल के नेता और अजीत सिंह के बेटे जयंत सिंह को हरा कर साबित कर दिया हेमा बॉक्स ऑफिस की तरह सियासत के पर्दे पर भी अपना कमाल दिखा सकती हैं… अब एक बार फिर हेमा 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए मथुरा से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, अब देखना ये है कि हेमा इस बार क्या कमाल दिखाती हैं…

किरन खेर

एक्टर अनुपम खेर की पत्नी और बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा किरन खेर भी राजनीति में पिछले कुछ सालों से बेहद सक्रिय हैं… वर्तमान में चंडीगढ़ से बीजेपी सांसद किरन खेर राजनीति में आने से पहले अदाकारी के साथ साथ समाजसेवा से भी जुड़ी रहीं… किरन खेर ने सामाजिक उत्थान से जुड़े कई मुहिम में हिस्सा लिया और समाज में चेतना जगाने के लिए उन्होंने कई प्रयास भी किए… साल 2014 में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी के भगवा रंग में रंग गईं… इसी साल उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता पंवन बंसल और आप पार्टी की उम्मीदवार गुलपनाग को हरा का लोकसभा की सांसद बनी…

      सिनेमा से सियासत का सफर बॉलीवुड की दूसरी नायिकाओं ने भी तय किए, इनके नाम तो बड़े थे लेकिन सियासत की ज़मी पर जमने की कोशिश काफी कम थीं… यही वजह रही कि ये सियासत के आसमान में ज्यादा ऊंची उड़ान नहीं भर सकीं… महज शो पीस की तरह राजनीति में रहीं… इस फेहरिस्त में रेखा, शबाना आजमी, नग्मा जैसी अदाकाराओं का नाम आता है… सियासत और सिनेमा का मिजाज अलग अलग है, जहां फिल्म के डायलॉग्स में इकरार को इकरार पढ़ना होता है वहीं सियासत के स्क्रीनप्ले में इकरार को इंकार पढ़ना होता है… सियासत की हांडी में डलकर जो इस बात को समझ गया उसका मुस्तकबिल लज़ीज़ और मसालेदार हो जाता है और जो न समझे वो…

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