‘जेठालाल’ को आया गुस्सा: वेब सिरीज में दी जा रही गालियों को लेकर निर्माताओं को दिया दिमाग

संस्कारी भारतीय जेठालाल को मुगलई संस्कृति की जुबान अर्थात गालियों पर घोर नाराजगी जाहिर की है खासतौर से वो गालियां जो आज की वेबसिरीज में जबर्दस्ती इस्तेमाल हो रही हैं..

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आजकल ओटीटी प्लेटफार्म्स पर भारतीय संस्कृति को गंदा करने के लिये चल रही हैं बहुत सी साजिशें. लेकिन कोई अब इन साजिशों के खिलाफ खड़ा हुआ है. सबको पता है गालियां भारत की धरोहर नहीं हैं. माताओं बहनों के अंगों और अवैध यौन संबन्धों पर आधारित करके निर्मित ये गंदी गालियां भारत को मुगलों की देन है जो उनकी संस्कृति का हिस्सा तो हो सकती हैं, भारतीय भाषाई विरासत का हिस्सा नहीं हैं. और ये भी सच है कि भारत की सात्विक संस्कृति को भाषाई तौर पर गंदा करने का हक भारत ने किसी को नहीं दिया है.

पूजा होती है भारत में नवदुर्गा की

नारी पैरों की जूती नहीं है भारत में अपितु देवी-स्वरूपा मानी जाती है. उसे जन्मते ही लक्ष्मी का रूप माना जाता है. नारी को विवाह-पूर्व तक दुर्गा का रूप माना जाता है और विवाह के उपरांत मां बन कर फिर से वह मातृशक्ति भगवान से भी पहले पूजनीया है. जिस भारतवर्ष में नवरात्रि पर नौ दिन नवदुर्गा उत्सव मनाया जाता है और देश भर में दुर्गा मां की पूजा होती है उसी देश की आमसंस्कृति में मुगलों ने मां की ही गन्दी गाली को आम-सड़क भाषा बना डाला है. देश के आम लोगों को यह बताने और जानने की आवश्यकता है कि गालियां हिन्दी के शब्द नहीं हैं अपितु बाहरी मुगल भाषा के शब्द हैं ये जिसके बोलने वालों को म्लैच्छ माना जाता था.

लगाई फटकार दिलीप जोशी ने

लोकप्रिय टीवी धारावाहिक तारक मेहता का उल्टा चश्मा के केन्द्रीय चरित्र ‘जेठालाल’ सभी वर्तमान भारतीय मनोरंजन सीरियल्स में सबसे अधिक लोकप्रिय है. जेठालाल अर्थात दिलीप जोशी जैसा संस्कारी चरित्र निभा रहे हैं, वे अपने व्यक्तिगत जीवन में भी यही सोच रखते हैं. संस्कारी भारतीय का जीवन जीने वाले दिलीप जोशी ने वेब सिरीज़ में आजकल आम हो रही गंदी गालियों के इस्तेमाल पर अपना रोष व्यक्त किया है. उन्होंने ऐसे कंटेन्ट को तैयार करने वाले निर्माताओं और लेखकों को जम कर फटकार लगाई है और कहा है कि बेहतर हो कि वे बेहतर कंटेन्ट का निर्माण करें.

”अकारण इस्तेमाल की जा रही हैं गालियां”

वेब सिरीज़ में बिना किसी कारण के इस्तेमाल होने वाली इन गालियों पर जम कर गुस्सा हुए हैं दिलीप जोशी. दिलीप कहते हैं कि बिना गालियाँ इस्तेमाल किये भी एक अच्छा और अधिक बेहतर कंटेंट बनाया जा सकता है. दिग्गज फिल्मनिर्माता यथा ऋषिकेश मुखर्जी और श्याम बेनेगल तथा राज कपूर जी को भी कभी गाली इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ी, उन्होंने बिना गाली के भी शानदार मनोरंजन प्रस्तुत करके दिखाया है.

 

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