RK Studio: एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल

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राज कपूर का एक गीत है “एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल”, यह गीत उनके पारिवारिक जीवन पर बिना शर्त के लागू होता है।
बात है जब 1927 में पृथ्वीराज कपूर मुंबई आ गए थे। उनके बड़े बेटे राज कपूर ने 1947 में मात्र 23 वर्ष की आयु में एक फ़िल्म की। इस फ़िल्म के एवज में उन्होंने पैसे की जगह चैंबूर में एक 2.2 एकड़ का प्लॉट लिया और RK स्टूडियो की स्थापना की।
फ़िल्म बरसात के एक दृश्य को जिसमे नरगीज राज साहब की बाहों में होती है उसे ही लोगो बनाया गया। RK स्टूडियो को प्रमोट करने के लिये नरगिज़ के साथ कई देशों की यात्रा की, होली और दीवाली की सबसे महंगी पार्टी यहाँ होती थी। मजदूरों से ज्यादा पसीना तो कदाचित राज कपूर ने बहा दिया था।
कपूर परिवार में दो बातें पक्की थी, एक कि घर की महिलाएं फिल्मों में काम नही करेगी और दूसरा की इनके यहाँ हमेशा नई पीढ़ी में विरासत की लड़ाई हुई है। राज कपूर ने अपने भाई शम्मी और शशि से ज्यादा लोकप्रियता हासिल करके परिवार में अपनी विशेष जगह बनाई थी।
यही अप्रत्यक्ष युद्ध अब उनके तीन बेटे रणधीर, ऋषि और राजीव में होना था। दूसरे बेटे ऋषि कपूर ज्यादा योग्य थे। ऋषि कपूर का बढ़ता कद परिवार के अन्य लोगो को सही नही लगा विशेषकर उनकी भाभी बबीता कपूर को। 1988 में राज कपूर की मृत्यु हो गयी।
आर के स्टूडियो एकदम साइड में हो गया। वैसे तो RK को रणधीर ने अपने पास रखा मगर जैसे राज साहब होली दिवाली के माध्यम से आर के को जीवंत रखते आये थे वैसा इन तीनो ही भाइयो ने नही रखा।
राज साहब के बाद इस स्टूडियो में सिर्फ तीन फिल्में शूट हुई हीना, प्रेमग्रंथ और आ अब लौट चले। इसके बाद यहाँ कोई गया ही नही, बॉलीवुड के सेलिब्रिटी पश्चिम मुंबई में रहते है जबकि स्टूडियो मध्य में है। फेल होने का कारण तो यही दिया जाता है मगर सच्चाई थोड़ी अलग है।
वास्तव में यदि यह विरासत ऋषि कपूर को मिलती तो शायद आर के स्टूडियो बच जाता, उन्हें विरासत नही मिली तो उन्होंने इसे तवज्जो नही दी। जब बॉलीवुड के लोग गुजरात और मध्यप्रदेश जाकर सेट लगा सकते है तो मुंबई में ही जाने में क्या समस्या हो सकती थी दोष व्यवस्था का था।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसे एक रियल एस्टेट कंपनी को बेचा गया, इस स्टूडियो को एक धरोहर होना चाहिए था मगर अब कोई फायदा नही 2017 में यहाँ एक आग लगी और सबकुछ जलकर खाक हो गया।
अंग्रेजी में एक कहावत है “Everything comes to an end” कपूर परिवार पर यह लोकोक्ति चरितार्थ होती है।
यहाँ आर के स्टूडियो डूब गया वही राज साहब की मृत्यु के बाद बबीता ने अपने ससुर की रीत तोड़ दी और अपनी बेटियों करिश्मा और करीना कपूर को इंडस्ट्री में उतार दिया।
वही ऋषि कपूर ने राज साहब की परंपरा निभाई और अपनी बेटी श्वेता को इंडस्ट्री से दूर रखा। उनके बेटे रणवीर कपूर मैदान में उतरे। आज वास्तविकता यह है कि करिश्मा और करीना कपूर दोनों ही अपने चरित्र के कारण कपूर परिवार का नाम डूबा चुकी है ठीक इसके विपरीत रणवीर कपूर का सितारा बुलन्द है।
भले ही रणवीर अपने पिता और दादा की तरह हिट नही हुए मगर आज जब भी कपूर विरासत की बात होती है तो रणवीर का ही नाम सामने आता है।
इस पारिवारिक कुरुक्षेत्र का भी यही अंत हुआ क्योकि अब कपूरों का सिर्फ एक ही वारिस है। दूसरी ओर हजारों कलाकारों का भविष्य संवारने वाला आर के स्टूडियो आज मिट्टी में मिल गया मगर उसके निर्माता राज कपूर साहब लोगो के दिलो में जिंदा है।
संभव है कुछ सालों में हम कपूर परिवार को भूल जाये क्योकि अब इंडस्ट्री में कई सितारे चमक चुके है। कुछ दिनों पहले चैंबूर जाना हुआ और RK स्टूडियो की हालत देखकर दुख हुआ अब तो अंदर कुछ बचा नही।
इसीलिए शास्त्रों में कहा गया है धन दौलत शाश्वत नही है मनुष्य शाश्वत है।

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