आरके स्टूडियो: वक्त हो चला है रुखसत होने का

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बॉलीवुड के शोमैन कहे जाने वाले राजकपूर की ज़िंदगी की सबसे बड़ी कमाई, सबसे हसीन ख्वाब अब खत्म होने वाला है… ये खबर हर उस शख्स के दिल को दुखाने वाली है जो राज कपूर का प्रशंसक रहा हो या उसकी यादें आरके स्टूडियो से जुड़ी हुई हों…    

पिछले कुछ अर्से से मुंबई के चेंबूर में स्थित आरके स्टूडियो के बिकने की खबर पर उस वक्त विराम लग गया जब शुक्रवार को रियलिटी कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज़ ने स्टूडियो की जमीन खरीदने की घोषणा की… तकरीबन 2.20 एकड़ में फैली इस परियोजना से कंपनी को लगभग 33 हजार वर्गमीटर बेचने योग्य क्षेत्र मिलेगा जिसमें आधुनिक लग्जरी अपार्टमेंट और लक्जरी खुदरा क्षेत्र शामिल होंगे…

हालांकि कंपनी ने सौदे की राशि की जानकारी नहीं दी लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दो एकड़ का ये प्लॉट 500 करोड़ रुपये से ज्यादा में बिक सकता है… कुछ दिन पहले ऋषि कपूर ने आर.के. स्टूडियो को बेचे जाने के फैसले की घोषणा की थी, ऋषि ने बताया था कि इसकी मरम्मत कराना आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है इसलिए कपूर परिवार ने इसे बेचने का फैसला किया है… गोदरेज प्रॉपर्टीज़ के कार्यकारी चेयरमैन फिरोजशाह गोदरेज ने कहा कि कंपनी ने चेंबूर स्थित इस ऐतिहासिक स्थल को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया है.

साल 1948 में निर्मित हुआ ये स्टूडियो राजकपूर के लिए किसी सपने से कम नहीं था… राजकपूर अपने शुरुआती दौर से ऐसा स्टूडियो बनाने के हसरत रखते थे जहां फिल्मों को लेकर उनकी दीवानगी को थोड़ा सुकून मिल सके… ये स्टूडियो जहां राजकपूर की सपनों की दुनिया थी तो वहीं नर्गिस के लिए उनके प्यार का इज़हार भी था, नर्गिस वैसे तो किसी और हयातेशरीफ हो चुकी थीं लेकिन राजकपूर उन्हें प्यार करने का अपना हक़ नहीं खोना चाहते थे, यही वजह थी कि राज कपूर ने आरके स्टूडियों के लोगो में नर्गिस को भी शामिल किया… आरके स्टूडियो का लोगो  राज कपूर और नर्गिस की फिल्म बरसात के एक सीन को सामने रख कर बनाया गया था, जिसमें राजकपूर की बांहों में नर्गिस झूल रही हैं…

courtesy-Youtube

राज कपूर ने अपनी जिंदगी के हसीन और गमगीन पल ज्यादातर इसी जगह पर बिताए… राज कपूर का स्टूडियों के लेकर बेहद लगाव था, राज के करीबी जानते हैं कि जितना राज कपूर की जिंदगी में नर्गिस की अहमियत थी उतनी ही आरके स्टूडियो की भी रही… उनकी बनाई हुई ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी कल्ट फिल्म जब फ्लॉप हुई तो राज कपूर बुरी तरह कर्जे में दब गए. ऐसी हालात में राज कपूर ने बड़े दुखी मन से इस स्टूडियो को गिरवी रखा… लेकिन जहां उनकी फिल्म बॉबी हिट हुई तो उन्होंने सबसे पहले अपने इस स्टूडियो का ही कर्जा चुकाया…

आरके स्टूडियो राज कपूर की कई हिट फिल्मों का गवाह रहा है… ‘आग’, ‘बरसात’, ‘आवारा’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’, ‘श्री 420’, ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी फिल्मों की शूटिंग आर.के स्टूडियो में ही की गई थी, इसके अलावा ‘सत्यम शिवम सुंदरम’, ‘प्रेम रोग’, ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी आइकॉनिक फिल्में भी यहीं बनाई गई थीं…  

आरके स्टूडियो हमेशा से बॉलीवुड के लिए खास रहा है… यहां फिल्मों का निर्माण तो होता था साथ ही कपूर खानदान के हर आम ओ खास कार्यक्रम का भी गवाह ये स्टूडियो बनता रहा है… कपूर खानदान की ओर शादी की दावते हों या होली के मिलन समारोह सबके लिए इस से मुफीद जगह उनके लिए कोई दूसरी नहीं रही… यहां पर होने वाले होली मिलन समारोह आज भी लोगों की ज़ुबान और जेहन में चढ़े हुए हैं…   

आरके स्टूडियो के सौदे को लेकर रणधीर कपूर का कहना है कि ये संपत्ति उनके और उनके परिवार के लिए बेहद खास रही है, क्योंकि यहां से कई दशक तक आरके स्टूडियो का परिचालन हुआ है. उनके मुताबिक अब इस संपत्ति की नई कहानी लिखने के लिए गोदरेज को चुना गया है.

आरके स्टूडियो पर नसीब की हर बारिश हुई… इस स्टूडियों ने हर दौर का अच्छा बुरा वक्त देखा और झेला है… साल 2017 में ये स्टूडियो आग की चपेट में आ जाने से अपनी आखिरी सांस लेने की कगार में पहुंच गया था… देखा जाए तो तब से अब तक इस स्टूडियो की सांसे वेंटिलेटर के जरिए ही चल रहीं थी… इसको ज़िंदा रखना राजकपूर के परिवार वालों के लिए भी नामुकिन हो रहा था, आर्थिक रूप से वो इसे फिर खड़ा करने की हालत में नहीं थे… सीधे अल्फाजों में कहा जाए तो यहां पर जितनी शूटिंग चल रही थी उस से आई रकम से इस स्टूडियो का रख रखाव भी नहीं हो पा रहा था, आखिरकार सामूहिक फैसले से यही तय हुआ कि अब इसके वेंटिलेटर के पाइप को निकाल दिया जाए ताकि ये नया जन्म ले सके… नतीजतन कभी कपूर परिवार की शान ओ शौकत को बढ़ाने वाला आरके स्टूडियो गोदरेज प्रॉपर्टीज के हवाले कर दिया गया…

 आरके स्टूडियो, जहां कभी कई ख्वाहिशें सांसे भरती थी, कई पलके भीगा करती थीं, कई दास्तानें गूंजती थीं, अब वहीं उसकी जगह नए घरोंदे बनेंगे, नई उम्मीदें जगेंगी और नई कहानियां तैयार होंगी क्योंकि कुदरत का यही नियम है कि जो आया है वो तो जाएगा ही… आरके स्टूडियो की कहानी भी अजीब रही, जिस आरके स्टूडियो का आगाज राज कपूर की फिल्म ‘आग’ से हुआ उसी आरके स्टूडियो को आग ने ही अंजाम तक पहुंचाया…   

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