#AchchheDin : कितने डरावने हैं अच्छे दिन कांग्रेस के

जिन अच्छे दिनों का कांग्रेस को इंतज़ार है अब वो कभी नहीं आएंगे..

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यह एक ऐसा सवाल है जो हम सिर्फ इस लोकसभा चुनाव परिणाम आने के पहले तक ही कर सकते हैं..

कांग्रेस के अच्छे दिनों पर चर्चा से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या हैं अच्छे दिन. हर व्यक्ति और हर पार्टी अच्छे दिनों की अपनी परिभाषा अपने ढंग से करती है जिसमे वह स्वयं को केंद्र में रख कर ये परिभाषा निर्धारित करती है. लेकिन देश को केंद्र में रख कर अच्छे दिनों की सार्वभौमिक परिभाषा एक ही है, वह दिन जब भारत के एक आम नागरिक के होंठों को मुस्कुराने की वजह मिले, अच्छा दिन है. जो दिन हमारे दिल को ख़ुशी और हमारे चेहरे को हंसी की सौगात दे – वह है अच्छा दिन.

अब बात करते हैं कांग्रेस के अच्छे दिनों की. मोदी पर हमला करने की कोशिश में सबसे बड़ा हथियार कांग्रेस के पास एक ही है – कहाँ हैं अच्छे दिन? कब आएंगे अच्छे दिन? तो जवाब इसका एक ही है कि कांग्रेस के अच्छे दिन अब न आने वाले. जिन अच्छे दिनों का कांग्रेस को इंतज़ार है अब वो कभी नहीं आएंगे.

कांग्रेस के अच्छे दिनों की परिभाषा दूसरी है. कांग्रेस के अच्छे दिनों की परिभाषा के केंद्र में देश नहीं स्वार्थ है, राष्ट्रवाद नहीं अवसरवाद है और देश नहीं ऐश है. पेश कर दिया है कांग्रेस ने अपने अच्छे दिनों का मैनिफेस्टो. चुनावी समर में इस डेस्परेट मैनीफेस्टो ने कांग्रेस को पूरी तरह से बेनकाब करके अब रही सही कसर भी पूरी कर दी है.

अपने मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने कहा कि हमें राष्ट्रवाद नहीं रोज़गार चाहिए. रोज़गार की बात सही है. मगर आज़ादी के बाद से पिछले सत्तर सालों में कांग्रेस ने देश को कितनी बेरोजगारी दी है ये देश को अच्छी तरह पता है. वहींं बीजेपी की अटल सरकार ने अपने शासन काल में देश के छह करोड़ लोगों को रोज़गार दिए. मोदी के पिछले पांच वर्षों के शासन में देश को न सिर्फ देशी रोज़गार मिले अपितु मेक इन इण्डिया के माध्यम से बाहर वालों से भी रोज़गार मिले.

अब रहा राष्ट्रवाद वो अगर कांग्रेस को नहीं चाहिए तो ऐसी सोच शुद्ध पशुवत सोच है जो खा कर जीने और ऐसे जी कर मर जाने की सोच है. सभ्य, स्वतंत्र और स्वाभिमानी राष्ट्र की सोच में राष्ट्रवाद अर्थात राष्ट्रभक्ति सर्वप्रथम तत्व होता है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों ने राष्ट्र के लिए न सिर्फ अपना घर त्यागा, अपना परिवार छोड़ा बल्कि अपना जीवन भी बलिदान कर दिया . उस समय भी कांग्रेसियों ने आरामखोरी ही की थी और आज भी फ्री में मिली आज़ादी को इतना सस्ता कर दिया है इन कांग्रेसियों ने. शर्म की बात है और महान नैतिक अपराध है ये कि आप जिस देश का खाते हैं, जिस देश में जीते हैं उसी देश से प्यार नहीं करते. ये है कांग्रेस के अच्छे दिन.

कांग्रेस के अच्छे दिन की दूसरी मिसाल है देशद्रोह क़ानून की समाप्ति. देशद्रोह का क़ानून समाप्त करके देश विरोधी तत्वों के हाथ खोल दिए जाएंगे ताकि वे देश के जितने चाहे टुकड़े कर सकें, देश के अस्तित्व के विरुद्ध जितने चाहे षड्यंत्र रच सकें. देशद्रोहियों के हांथ मजबूत करने की षडयन्त्र वाली ये सोच है कांग्रेस के अच्छे दिन.

कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो में कहा कि यदि उनकी सरकार आई तो कश्मीर में देश की सेना के अधिकार कम कर दिए जाएंगे. निहायत ही शर्मनाक बात है ये. भारतीय सेना दुनिया की वह इकलौती सेना है जो अपने ही देश में रोज़ पत्थर खाती है और पत्थरबाजों को झेलते हुए भी आतंकियों से दो दो हाथ करती है कश्मीर में. इस सेना के अधिकार और भी कम कर दिए जाएंगे? क्या मतलब है – कश्मीर में पूरी तरह से पकिस्तान को बसा दिया जाएगा? दूसरे शब्दों में यही बात कहें तो कश्मीर को तश्तरी में रख कर पकिस्तान को सौंप दिया जाएगा. ये हैं कांग्रेस के अच्छे दिन?

इस तरह की सोच भी देशद्रोह है. गद्दारों के लिए दुनिया के किसी भी देश में जगह नहीं है. पर भारत ने कांग्रेस को पाला पोसा है जिसका ऐतिहासिक सिला मिला है भारत को. देश को गद्दारों से भर देने की कल्पना का मेनिफेस्टों है ये जो कहता है कि कांग्रेस ने सरकार बनाई तो देशद्रोह क़ानून समाप्त कर दिया जाएगा. देशद्रोहियों से भरा हुआ भारत है अच्छा दिन कांग्रेस का. अगर कोई और देश होता तो मेनिफेस्टो के इस बिंदु का पूर्ण संज्ञान ले कर कांग्रेस की चुनाव लड़ने की योग्यता निरस्त कर दी जाती और देशद्रोह की सोच रखने वाली इस पार्टी का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता.

देश के दुश्मन से गले मिलना है अच्छा दिन कांग्रेस का. भारत के सबसे बड़े शत्रु पाकिस्तान को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा कांग्रेस ने दिया. कांग्रेस के नेता मणिशंकर अय्यर बहुत बड़े पाकिस्तानी अय्यार हैं. वे पाकिस्तान जाकर वहां की सरकार से मोदी सरकार को गिराने की साजिश में लिप्त थे. कांग्रेस का नेता नवजोत सिद्दू पाकिस्तान जा कर बाजवा के गले मिलता है, वहां के नेताओं को अपने आलिंगन पाश में भरता है. कांग्रेस की मुरादाबाद रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते हैं. भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वाले देशद्रोही गैंग को जिस केजरीवाल ने सपोर्ट किया था कांग्रेस ने उस केजरीवाल को सपोर्ट किया है. ये देशद्रोही सोच कांग्रेस के अच्छे दिन हैं.

कांग्रेस का वंशवाद है कांग्रेस के अच्छे दिन. नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया फिर राहुल और उसके बाद प्रियंका और फिर प्रियंका की संतानें राज करेंगी इस देश में पूरे लाइसेंस के साथ. ये गांधियाना लाइसेंस है जो वंशवादी कांग्रेस चलाती है. योग्यता गई तेल लेने, इस देश पर राज करने का लाइसेंस ले कर पैदा हुआ है ले नकली गांधी वंश. ये भी है कांग्रेस का अच्छा दिन.

घोटालों की सरकार भी है कांग्रेस के अच्छे दिन. डचों, कुषाणों, शाक्यों, यवनों, हूणों, मुगलों और उसके बाद आंग्ल आक्रांताओं ने जितना देश को पिछले चार सौ सालों में लूटा है उसे अधिक स्वतंत्रता मिलने के बाद सत्तर सालों में उनकी ही परिपाटी पर चलने वाली कांग्रेस ने लूटा है. अंग्रेज़ों से पहले के आक्रांता तलवार की धार पर लूटमारी करते हुए राज करते थे और देश को लूटते थे अँगरेज़ फूट डाल कर देश पर राज करते हुए लूटते थे. कांग्रेस ने आज़ादी के बाद देश की भोली जनता को बेवकूफ बना कर राज करते हुए देश को लूटा. लेकिन अब बात कुछ और है. कांग्रेस के अच्छे दिन गए. अब देश के अच्छे दिन आ रहे हैं.

टूजी, थ्रीजी, फोरजी और जीजाजी घोटालों ने देश की हवा में घोटालों की बदबू भर दी थी. अब हवा की वह गंदगी धीरे धीरे साफ़ हो रही है. अब देश की जनता वह दुःस्वप्न दुहराना नहीं चाहती. आने वाली पीढ़ियों के लिए अच्छी तैयारी करना चाहती है आज के वोटरों की पीढ़ी. कांग्रेस से ठगने और लूटने को वह कदापि तैयार नहीं.

कांग्रेस के ऐतिहासिक अच्छे दिन तो तभी से ही प्रारम्भ हो गए थे जब नेहरू गांधी ने मिल कर सत्ता की खातिर देश को गुमराह किया था. देश के बंटवारे के दौरान हुआ रक्तपात कभी भुलाया नहीं जा सकता. वो थे कांग्रेस के अच्छे दिन. सत्तर के दशक में भारत कांग्रेस सरकार के राज में
तीन युद्ध हारा – वे थे अच्छे दिन.

1974 में देश में आपातकाल लगा कर तानाशाह सरकार चलाने वाली कांग्रेसी प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने तो हद कर दी थी. जिस वन्दे मातरम का घोष करके भारतीय स्वतंत्रता सेनानी फांसी के फंदे को चूम कर अपने गले में डाल लेते थे वही वन्दे मातरम बोलना अपराध बना दिया गया था और वन्दे मातरम बोलने वालों को जेल की कोठरियों में बंद कर दिया जाता था. वो भी थे कांग्रेस के अच्छे दिन.

1984 में इंदिरा गाँधी की संदेहास्पद हत्या के दौरान देश भर में सिक्खों का कत्ले आम करने वाली कांग्रेस के अच्छे दिनों का चेहरा उन लोगों को अच्छी तरह से याद है जिन्होंने अपनी नंगी आँखों से वो मंज़र देखा था. इसके आगे कहने को और कुछ नहीं बचता. अब और कहना भी क्या है. ईश्वर इस देश को कांग्रेस के काले दिन कभी न दिखाये..

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