अमृतसर रेल हादसा : शुक्रवार की दुखद याद, और आज के हालात

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शुक्रवार 19 अक्टूबर को हुए अमृतसर रेल हादसे में, जिसमें ६० से अधिक लोग मारे गए हैं, अमृतसर के अस्पतालों के हालात काफी अफरातफरी के हैं. घायलों को माकूल इलाज मिल नहीं पा रहा है. लेकिन सरकारी कोशिशें जारी हैं.

कल शुक्रवार की शाम एक दर्दनाक इतिहास जुड़ गया अमृतसर शहर में दशहरे के साथ, और दशहरे की इस शाम 6.50 बजे अमृतसर में दशहरे के अवसर पर रावण दहन के दौरान तूफानी रफ्तार से आ रही एक ट्रेन से कट कर कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई.

सीएमओ ने अमृतसर के सिविल अस्पताल में लाये गये हताहतों के बारे में बताते हुए कहा कि 60 लोगों की मौत और 51 के घायल हुए हैं.

कल हादसे के बाद घायलों को ढो कर ले जाने वाले लोगों को बुरी तरह अफरातफरी का सामना करना पड़ा. एम्बुलेंस नहीं मिल रही थे, और कन्धों पर तथा हांथों पर उठा कर ले जाते घायलों को लेकर जब वे सड़क पर पहुंचे तो वहां भी कोई मदद नहीं मिल रही थी. लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि अस्पताल किस तरफ है. कोई बताने वाला नहीं था. और फिर पता चले तो उधर ले कैसे जाएँ. तमाम समस्याएं थीं. ऊपर से घायलों का खून बाह रहा था. उनकी हालत खराब हो रही थी. पुलिस ने भी मदद नहीं करी.

यह हादसा जोड़ा रेल फाटक के पास उस वक्त हुआ जब पठानकोट से अमृतसर जा रही डेमू ट्रेन गुजर रही थी. मारे गये लोगों में अधिकांशतः उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग थे. घटनास्थल पर कम से कम 300 लोग थे जो पटरियों के निकट मैदान में खड़े हो कर रावण दहन देख रहे थे.

हादसे की याद करते हुए लोगों ने बताया कि उनके देखते देखते ही अचानक सब कुछ हो गया. पटाखों की तेज़ आवाज़ में ट्रेन की आवाज़ छुप गई और बस जो दिखा वो ये दिखा कि ट्रेन लोगों के ऊपर से गुजरती चली जा रही है. यहां तक की चीख-पुकार की आवाज़ भी गाड़ी के गुजर जाने के बाद ही आई.

दुर्घटना के बाद जहां 16 ट्रेनों के रूट बदले गये हैं वहीं अमृतसर-मनावला सेक्शन की 10 मेल और 27 पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है.

पन्जाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बयान दिया है हादसे के बाद उनका सारा प्रशासनिक अमला काम में लगा है. उन्होंने कहा कि हम यहां जितना जल्द हो सकता था, उतना जल्द पहुंचे हैं. पूरा पंजाब सरकार के सभी मंत्री भी यहां अमृतसर में ही है.

जो नई जानकारी सामने आई है उसने कल के इस सवाल का जवाब दे दिया है कि इस आयोजन को अनुमति कैसे मिली थी? दरअसल रेलवे ट्रैक के पास रावण दहन के लिए आयोजकों को पुलिस ने ही अनुमति दी थी.

कल शाम 6.50 पर हुए इस दर्दनाक हादसे की तुरंत जानकारी मिल जाने के बाद भी मुख्यमंत्री नहीं आये. रात की बजाये सुबह आने की अपनी समझदारी पर सवाल खड़े होने पर उन्होंने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया कि कृपया सवाल करके राजनीति न करें.

मुख्यमंत्री बिना पूछे ही बार-बार बता रहे हैं कि उन्होंने पांच लाख का मुआवजा प्रत्येक मृतक के लिए घोषित कर दिया है. अधिक पूछने पर वे हादसे में मारे गए लोगों की गिनती बताते रहे. उनके अनुसार 59 लोगों की मौत हो गई है वहीं, 57 लोग घायल हैं. उन्होंने कहा कि शवों का पोस्टमार्टम जल्द से जल्द करने की कोशिश की जाएगी. ज्यादातर शवों की पहचान कर ली गई है, केवल 9 शव की पहचान की जानी बाकी है.

सीएम से जब बार बार पूछा गया कि उन्होंने अमृतसर पहुंचने में 15 घंटे क्यों लगा दिए. तो उन्होंने फिर उसका भी जवाब दे ही दिया. मुख्यमंत्री के अनुसार जब यह घटना घटी तब मैं एयरपोर्ट पर था और इजरायल के आधिकारि यात्रा पर जाने के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहा था.

रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि यह दुर्घटना लापरवाही के कारण हुई है इसलिए कोई कारण नहीं बनता कि रेलवे इस घटना की जांच कराए. उन्होंने कहा कि यह साफ़ तौर पर रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण का मामला है.

लोकल गवर्नेन्स मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू भी विलंब से ही घटनास्थल पर पहुंचे. इसे प्राकृतिक आपदा बताते हुए सिद्धू ने बताया कि – दुर्घटना में ही हो गई जब ट्रेन तेज रफ्तार से आई. ट्रेन से हॉर्न भी नहीं बजाया गया.

जहां एक तरफ रेल विभाग ने अपनी गलती मानने से इंकार कर दिया है, अमृतसर पुलिस ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया है और लोकल गवर्नेंस मंत्रालय भी अपने को दोषी नहीं मान रहा है और आयोजक भी फरार चल रहा है, तब ऐसी हालत में तो लगता है कि जो भी हो कुल मिला कर दोष बदनसीबी का है जो लोगों को खींच कर दशहरा देखने के लिए आखिरी बार वहां ले गई थी.

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं और चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है. साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की राशि देने के लिए 3 करोड़ रुपए के फंड को तुरंत जारी करने का आदेश दे दिया है.

रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने दुर्घना पर शोक प्रगट किया है. उन्होंने कहा कि लोगों को भविष्य में पटरियों के नजदीक सार्वजनिक आयोजन करने से बचना चाहिए. ट्रैन के चालक के लिए उन्होंने कहा कि ड्राइवर को ट्रेन कहां स्लो करनी है, इसके लिए विशेष निर्देष दिए जाते हैं. रेलराज्यमंत्री के अनुसार वहां एक घुमाव था. ड्राइवर आगे मोड़ के पार नहीं देख सका. उन्होंने पूछा कि हमें किस बात के लिए जांच का आदेश देना चाहिए. क्या ट्रेन स्पीड में चल रही थी इसकी जांच की जाए या किसी और चीज़ की?

रूस में अमृतसर रेल हादसे पर प्रतिक्रया देखी गई है. वहां रहने वाले भारतीयों में दुख है. वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दुर्घटना पर दुःख जताया है और मृतकों के प्रति शोक व्यक्त किया है. उन्होंने फ़ोन करके भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस शोक के क्षणों में बात कर अपनी संवेदना प्रकट की है. दुर्घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी इस हादसे पर शोक व्यक्त किया है.

एक ज़रूरी सवाल जो प्रशासन, रेल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन से नहीं पूछा गया कि यदि यहां ट्रेन की पटरियों पर नमाज़ पढी जा रही होती तब भी क्या प्रशासनों को खबर नहीं होती?

(अर्चना शैरी)

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