एक था अनुच्छेद 370 – अब है एक झंडा एक देश

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भारत के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सियासी इतिहास में 31 अक्टूबर की तारीख नए अध्याय के साथ दर्ज  गई. इस दिन देश के नक्शे में  दो नए केंद्र शासित राज्य उभर कर सामने आए हैं. पहली दफे किसी एक राज्य से दो केंद्र शासित राज्य बने हैं. ये तभी मुमकिन हुआ जब सत्तर साल से चली आ रही एक सियासी रस्म का खात्मा हुआ.जब अनुच्छेद 370 को जम्मू- कश्मीर की घाटी हटा लिया गया.

देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को उनकी 144वीं जयंती के मौके पर श्रद्धांजिल देते हुए न सिर्फ कश्मीर का देश में पूर्ण विलय हो गया बल्कि दो नए राज्यों का उदय भी हुआ. 5 अगस्त को मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद आज से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही केंद्र शासित राज्य हो गए.

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी जबकि लद्दाख, चंडीगढ़ की तरह केन्द्र शासित प्रदेश होगा जहां अपनी विधानसभा नहीं होगी.इन दोनों ही राज्यों में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र के पास होगी और यहां की पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन होगी.

अभी दोनों राज्यों का एक ही हाईकोर्ट होगा लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे. सरकारी कर्मचारियों के सामने दोनों केंद्र शासित राज्यों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा.

अब तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल पद था लेकिन अब दोनों केंद्रशासित प्रदेशों में उप-राज्यपाल होंगे. जम्मू-कश्मीर के लिए गिरीश चंद्र मुर्मू तो लद्दाख के लिए राधा कृष्ण माथुर को उपराज्यपाल बनाया गया है.

पहले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता था लेकिन अब जम्मू-कश्मीर में बनने वाली नई विधानसभा का कार्यकाल देश के दूसरे राज्यों की तरह 5 साल होगा.

पिछले 67 सालों से जम्मू-कश्मीर की सरकारी इमारतों पर जम्मू-कश्मीर के राजकीय झंडे के साथ तिरंगा लहराता रहा है. जम्मू-कश्मीर के झंडे का तिरंगे के साथ फहराने का प्रोटोकॉल रहा है. लेकिन अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद अब अलग झंडा भी हमेशा के लिए झुका दिया गया है. अब केवल भारत के गौरव का प्रतीक तिरंगा ही फहराया जाएगा. दरअसल, साल 1952 में हुए ‘दिल्ली समझौते’ के तहत जम्मू-कश्मीर के अलग झंडे पर सहमति बनी थी. 5 अगस्त को अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद 25 अगस्त को श्रीनगर सचिवालय से जम्मू-कश्मीर का झंडा हटा दिया गया था.

अनुच्छेद 370 के साथ ही धारा 35-A भी खत्म हो गई. 35-A यहां के नागरिकों को विशेषाधिकार देता था. अब इस प्रावधान के खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों के नागरिक भी जमीन-मकान खरीद सकेंगे और यहां नौकरियां और कारोबार कर सकेंगे. साथ ही जम्मू-कश्मीर में लोगों की दोहरी नागरिकता खत्म हो गई है. इससे पहले वहां के लोगों जम्मू-कश्मीर के साथ ही भारत के भी नागरिक थे. लेकिन अब वो सिर्फ भारतीय नागरिक माने जाएंगे.

जम्मू-कश्मीर के नागरिक कानून के प्रावधानों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति से विवाह करने पर जम्मू-कश्मीर की नागरिकता गंवा बैठती थी. लेकिन वही कश्मीरी महिला अगर पकिस्तान के किसी शख्स से शादी करती थई तो शादी करने वाले पाकिस्तानी शख्स को जम्मू-कश्मीर की भी नागरिकता मिल जाती थी.

पिछले सात दशकों में जम्मू-कश्मीर में हज़ारों परिवारों ने पाकिस्तान में अपनी बेटियों के निकाह पढ़वाए. नतीजा ये रहा कि भारत विरोधी सोच की पीढ़ियां कश्मीर में आसानी से तैयार की जा सकीं और नई पौध को भारत के खिलाफ कश्मीर में बरगलाया जा सका.

राज्य में अधिकतर केंद्रीय कानून लागू नहीं होते थे, अब केंद्र शासित राज्य बन जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों राज्यों में कम से कम 106 केंद्रीय कानून लागू हो पाएंगे. साथ ही केंद्र की तमाम योजनाएं यहां लागू हो सकेंगी.

मोदी सरकार ने एक बेहद ही साहसिक फैसला लेते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए जम्मू-कश्मीर पर ऐतिहासिक फैसला लिया. इस फैसले से अब कश्मीर के लोग भी देश की मुख्यधारा में आकर तमाम सरकारी सुविधाओं और योजनाओं का लाभ ले सकेंगे. 

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