कैसे छोड़ें शराब, सिगरेट और तंबाकू

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नशा करने वाले धीरे-धीरे भूल जाते हैं कि नशे के उस पार भी जीवन है. यह सच है कि हर नशा करने वाला व्यक्ति उससे मुक्ति चाहता है. नशा-मुक्ति का यह भाव कहीं न कहीं उसके मन के भीतर होता है. वह नशे पर विजय पाना चाहता है किन्तु आत्मबल न हो पाने के कारण ऐसा हो नहीं पाटा.

किन्तु नशे से मुक्ति असम्भव नहीं है, यह जानना हर नशे के आदी व्यक्ति के लिए आवश्यक है. तीन बातें हैं जो इसमें मदद कर सकती हैं. पहली तो ये कि इस नशे के नुकसान क्या क्या हैं. दूसरी बात कि इसके छोड़ने से होने वाले फायदे क्या क्या हैं और तीसरी सबसे ज़रूरी बात कि इस नशे को छोड़ने के तरीके क्या क्या हैं.

नशे मूल रूप से तीन ही हैं – तम्बाकू, शराब और धूम्रपान. और हर नशे करने वाले ने अपने जीवन में कम से कम एक ऐसे इंसान को ज़रूर देखा है जिसने नशा छोड़ दिया हो और एक अच्छी ज़िन्दगी का हमसफ़र बन गया हो. इस बात से ये साफ़ ज़ाहिर है कि नशा छोड़ा जा सकता है. और यदि दुनिया में कोई एक आदमी भी नशा छोड़ सकता है तो आप भी छोड़ सकते हैं.

सबसे बड़ा नुकसान नशे से ज़िन्दगी का है. आप यदि कभी अस्पताल के कैंसर वार्ड में गए हों तो इस खतरे का दर्दनाक तस्वीर आपको वहां नज़र आ जाएंगी. सिर्फ जान जाती हो तो उतनी बड़ी बात नहीं, जिस दर्दनाक दौर से गुज़र का जान जाती है कैंसर में – वह गौर करने के लिए सबसे ज़रूरी बात है. चाहे तम्बाकू हो, सिगरेट-बीड़ी हो या शराब – कैंसर सबसे होता है. तम्बाकू और सिगरेट के कैंसर में जान जाने के बराबर ही एक दुसरा खतरा ये भी होता है कि आपका चेहरा, जबड़ा, मुँह, गला या सीने की बड़ी सर्जरी हों और आप एक विकलांग की तरह एक दर्दनाक जीवन गुजारने को मजबूर हो सकते हैं.

दूसरा नुकसान पैसों का है. जो पैसे आप नशे में खर्च कर रहे हैं, वो आप अपने बच्चों के हिस्से का हक मार रहे हैं. उस पैसे से अपने बच्चों के लिये आप कुछ ला सकते थे या माता-पिता के लिये दवा या कोई तोहफा भी आ सकता था उस पैसे से. ज़रा आप हिसाब लगाइये आज तक जितने पैसे आपने नशे में खर्च किये हैं या आगे के पांच सालों में खर्च करने वाले हैं – वह राशि कितनी बड़ी है. और फिर जब आप नशे के परिणामतः बीमार हो कर अस्पताल जायेंगे तो कितने पैसे आपके और आपके परिवारजनों के खर्च होने वाले हैं – यदि आप इसका सही अनुमान लगाने में सफल हो गए तो समझ लीजिये ये डर एक बड़ी चिंता बन कर अभी से आपके सर पर सवार हो जाने वाला है. सवाल पैसों का जितना है उतना ही इस बात का भी है कि यदि अस्पताल में आप ठीक हो कर घर न आ सके और दुनिया को अलविदा कह गए तो आप के इलाज में लगने वाले सारे पैसे तो बर्बाद हो ही जाएंगे, इलाज के लिए उधार लिए गए पैसे आपके परिवारजन आपके जाने के बाद चुकाएंगे.

तीसरा नुकसान इस बात का है कि जिन परिवारजनों को आप प्यार करते हैं, जो परिवारजन आपको प्यार करते हैं, आपके छोटे छोटे बच्चे आपकी बिटिया आपकी माँ और आपके पिता – सभी आपके जाने के बाद आपको याद करके रोयेंगे, मगर आपको वापस बुला नहीं पाएंगे.

चौथा नुकसान आपकी चोरी है. आप अपने परिवार जनों से या अपने माता-पिता से चुरा कर यदि कोई काम कर रहे हैं तो समझ लीजिये कि आप गलत ही कर रहे हैं. जहां तक उनका बस चलेगा, आपके माता-पिता और परिवारजन आपको कोई नशा नहीं करने देंगे. इसलिए छुपा कर करने वाला आपका काम आपके दिल पर एक बोझ बना रहेगा और जिस दिन आपके परिवारजनों को पता चलेगा, उन पर क्या बीतेगी, इसका अनुमान आप नहीं लगा सकते. यदि अनुमान लगा सकते तो ऐसा करते ही नहीं.

पांचवां नुकसान ये है कि अपनी नज़रों में हमेशा ही गिरे रहेंगे. क्योंकि आप जानते हैं कि आप समाज के अच्छे नागरिक नहीं हैं, यदि नशा करते हैं. आप एक अच्छे कर्मचारी नहीं हैं, एक अच्छे पड़ौसी नहीं हैं, एक अच्छे पिता या पुत्र नहीं हैं, एक अच्छे भाई या अच्छे इंसान भी नहीं हैं क्योंकि अच्छे इंसान शराबी नहीं होते. अच्छे इंसान तम्बाकू के आदी नहीं होते न ही सिगरेट और बीड़ी की गन्दी आदत के शिकार होते हैं.

छठवां नुकसान ये है कि यदि आप कुंवारे हैं तो आप समझ लीजिये कि आप अपनी होने वाली पत्नी का जीवन बर्बाद करने वाले हैं. नशेबाज़ हो कर आप अपनी पत्नी का ही नहीं अपने बच्चों का जीवन भी बर्बाद करने वाले हैं. क्योंकि जिन बच्चों के आप रोल मॉडल हैं वो बच्चे आपसे अच्छा कुछ नहीं सीख पाएंगे बल्कि आपके नशे की बीमारी के शिकार आगे पीछे वो भी हो जाएंगे. आप उनको किस मुँह से कह पाएंगे कि नशा न करो, नशा करना बुरी बात है.

सातवां नुकसान नशे में बर्बाद किये गए वक्त का है. जितना वक्त आपने नशा करने में लगाया है यदि उसका आप हिसाब लगाएं तो हैरान हो जाएंगे. शायद इतना बड़ा समय आप किसी अच्छे काम या उपजाऊ काम में लगाते तो आपके काम आता.

आठवाँ नुकसान ये है कि आप नशा करने के कारण समाज में सम्मान नहीं पाएंगे. न ही अपने कार्यालय में न ही अपने पड़ौस में आपकी इज्जत होगी. लोग आपसे बच कर ही निकलना पसंद करेंगे. रिश्तेदारी में भी आप पसंद नहीं किये जाएंगे, और तो और अपने परिवार में ही आप अपना सम्मान खो देंगे और अक्सर आपके बच्चे या छोटे भाई बहन आपकी अवज्ञा करेंगे और आपको हिकारत से देखेंगे.

नवां नुकसान ये है कि आप जो भी बिज़नेस कर रहे हैं, आपके नशे का बुरा असर उस पर पड़ेगा ही. आज नहीं तो कल. और दसवें नुकसान के तौर पर आप अपने घर में साथ रहते हुए भी अपनी पत्नी से दूर हो जाएंगे – शारीरिक तौर पर भी और मानसिक तौर पर भी. क्योंकि न उसे आप प्रेम दे पाएंगे और न पत्नी के प्रति पति के आवश्यक कर्तव्यों का निर्वाह ढंग से कर सकेंगे.

अब आइये तस्वीर का दूसरा रुख देखते हैं. कुछ देर के लिए आप आत्मग्लानि से बाहर आजाइये. देखिये कि यदि आप नशा छोड़ देंगे तो उससे क्या क्या फायदे होंगे.

सबसे पहले तो आपका जीवन बड़ा हो जाएगा और कामयाब भी उतना ही हो जायेगा, क्योंकि स्वस्थ शरीर से सफल श्रम सम्भव है. और सफल श्रम कर अर्थ है कामयाबी. नशा छोड़ने के बाद न सिर्फ आप पैसे बचा सकेंगे बल्कि आपकी उत्पादकता भी बढ़ जायेगी.एक स्वस्थ जीवन जीते हुए आप अपने परिवार और मित्रों के लिए प्रेरणा बन सकेंगे. और हाँ, उसके बाद आप लोगों को नशे से मुक्त होने के लिए प्रेरित भी कर सकेंगे क्योंकि आप स्वयं एक मिसाल बन चुके हैं.

आपको चैन की नींद आएगी. आप भरपेट खाना खा सकेंगे और वह खाना आपके शरीर को लगेगा भी. आप अपने बिज़नेस में सफल हो सकेंगे और समाज में एक इज्जत की ज़िंदगी गुज़ारेंगे. इन सबके बाद आपके अंदर कोई भी ग्लानि या हीनता शेष नहीं रहेगी और आप एक सम्मानित जीवन जीने का गौरव भी महसूस करेंगे. आपमें आत्मबल भी होगा और आत्मस्वाभिमान भी.

आपके परिवारजन आपकी मिसाल देंगे, आपके बच्चे आपको अपना रोल मॉडल मानेंगे और आपकी पत्नी आप पर गर्व करेगी. स्वस्थ शरीर से आप उसे एक लम्बे समय तक प्रेम भी दे सकेंगे और दाम्पत्य सुख भी.

नशे की तस्वीर के दोनों रुख आपने देख लिए. अब आइये देखते हैं कि इससे मुक्ति कैसे पाई जाए. सबसे पहले तो ये ज़रूरी है कि आप नशे के नुकसान और फायदे जो अभी आपने ऊपर जाने हैं – अच्छी तरह से समझ लें. अब सोचें कि क्या आप भी ऐसा कर सकते हैं?

आप ऐसा कर सकते हैं. आप नशे से छुटकारा पा सकते हैं बशर्ते आप चाहें. आपको चाहना होगा, अपने मन को टटोलना होगा कि क्या सच में आप चाहते हैं कि नशे की गंदी गिरफ्त से बाहर आएं?

अगर आपका उत्तर हाँ है, तो ये समझ लीजिये कि आधा काम हो चूका है. बस आधा ही बचा है जो कि पूरा हो जायेगा. क्योंकि आप तैयार हो चुके हैं. तैयार होने से तातपर्य है कि आप मन से तैयार हो चुके हैं. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत. यहां पर सबसे पहले तो एक सीधे सीधे फॉर्मूले के समझ लीजिये कि अपने को जीतना किसी दूसरे को हराने से ज्यादा आसान है.

आदत एक बार में ही छूटेगी, धीरे-धीरे करके कोई आदत नहीं छूटती है. कम करके भी देख लीजिये आदत वहीं की वहीं रहेगी. छोड़ना है तो हलाल नहीं करना है, झटका करना है. झटका ही लम्बे समय के रिश्ते को आरपार कर सकता है, हलाल नहीं!

अब सबसे पहला कदम उन सभी लोगों का साथ छोड़ दीजिये जो नशा करते हों. साफ़ न कह सकें तो संकेतों से कह दें कि उनसे दूर होने का कारण कुछ और नहीं बस नशा ही है. नशे के स्थानों अर्थात पान की दुकानों या शराब की दुकानों से दूर रहें. और अपने आपको अधिकतम व्यस्त करने का प्रयत्न करें. खाली दिमाग नशे का घर.

मन को मारिये. अपने आपको डांटिए और कहिये कि बस कुछ दिन की ही बात है, फिर सब ठीक हो जाएगा. आपके भीतर बार बार कुलांचे मार कर नशे की तरफ भाग रहे मन को काबू में करने का एक मनोवैज्ञानिक तरीका इस्तेमाल कीजिये. अपने दिमाग के भीतर देखिये वहां एक बटन लगा है. जाइये और उस बटन को स्विच ऑफ कर दीजिये. यह बटन आपको इंसान बनाता है. यदि आप इसको ऑफ कर देते हैं तो यह आपको मशीन बना देता है जिसमे कोई संवेदना या भाव नहीं होते, सीधा ऐक्शन होता है.

बटन ऑफ करके आप मशीन बन गए हैं तो समझ लीजिये कि ऐक्शन मोड़ में आ गए हैं. अब अपनेआपको आदेश दीजिये कि आज से सिगरेट को या शराब को या तम्बाकू को हाथ भी नहीं लगाना है. बस. इसके बाद आपकी मशीन किसी संवेदना को किसी भाव को या आपके मन की किसी चाहत को कोई तरह नहीं देगी और आप सीधे सीधे नशे से कट जाएंगे. क्योंकि आपकी मशीन को आदेश मिल चूका है, अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि अब ऐसा हो नहीं पायेगा. अपने आपको मशीन भाव में रमा लीजिये फिर देखिये वास्तव में नशे की तलब दरवाजे पर दस्तक दे दे कर थक जायेगी मगर दरवाज़ा खुलेगा नहीं.

जिस भी देवी देवता को आप मानते हों, उनको बता दीजिये कि आपने फैसला कर लिया है, अब नशा आपके जीवन में नहीं रहेगा. उनसे भक्ति भाव से निवेदन कीजिये कि वे आपके आत्मबल को मजबूत रखें ताकि ये सड़कछाप आदत आपके कुलीन जीवन का हिस्सा न बन सके.

परिवारजनों एवं सभी मित्रों को बता दीजिये कि नशा छोड़ दिया है आपने ताकि वे भी आपका उत्साह बढ़ाएं और मान लीजिये कभी आप कमज़ोर होने लगें तो वे आपको आपकी ताकत याद दिलाएं. आपकी ताकत है आपका आत्मबल जो यदि सौ प्रतिशत तक इस्तेमाल करना आप सीख जाएँ तो मौत को भी मात दे सकते हैं, ये छोटी मोती आदतें तो क्या चीज़ हैं! शायद आप नहीं जानते कि आप अपने आत्मबल का दस प्रतिशत भी इस्तेमाल नहीं करते. पर हाँ सौ प्रतिशत तक आत्मबल का इस्तेमाल प्रयास से आएगा, उस पर अगले लेख में बात करूँगा आपसे.

अपनी प्यारी सी बेटी या माँ की फोटो अपने साथ रखें. जब भी मन विचलित हो नशे की और भागे तो बस वो फोटो एक बार देख लें. मान लो कभी उससे भी फायदा न हो तो तुरंत उनको फ़ोन लगाएं और बताएं कि मैं फिर से नशा शुरू करने जा रहा हूँ. ऐसा आप नहीं कर पाएंगे -इसलिए नशा भी दुबारा शुरू नहीं कर पाएंगे.

नशे की तलब लगने पर एक गिलास पानी पी लें. जरूरत पड़े तो थोड़ा हवा में बाहर टहल आएं. अपने मन को किसी और कार्य में व्यस्त कर लें. अपना मनपसंद संगीत सुनें. अपनी मनपसंद मूवी देखें या अपनी मनपसंद जगह घूमने जाने का प्लान बनाएं. अपना ध्यान किसी दूसरी तरफ आपकी पसंदीदा फील्ड में लगा लें. और नहीं तो किसी भी ज़रूरी काम में अपनेआप को बुरी तरह व्यस्त कर लें, नशे की तलब मर जायेगी, क्योंकि ऐसा दुर्व्यवहार आपने पहले कभी उसके साथ नहीं किया है.

एक समानांतर विकल्प भी तलाश सकते हैं आप नशे का. सिगरेट हो या तम्बाकू – आप सौंफ खा सकते हैं हर बार. मीठी रंग-बिरंगी सौंफ का पैकेट खरीद कर रखें और जब भी तलब लगे, थोड़ी सी खा लें. धीरे धीरे तलब को खुद ही शर्म आ जायेगी. और सौंफ आपकी सेहत में फायदा भी देगी.

एक मनोवैज्ञानिक तरीका और भी है. जब भी आपको तलब लगे आप हर व्यक्ति जो भी आसपास नशा करता नज़र आये, के पास जाएँ और उसे नशा छोड़ने को प्रेरित करें. उसे बताएं की मैंने छोड़ा है, आप भी छोड़ सकते हैं. इस काम में लगने वाले पांच मिनट आपको नशे के खिलाफ और सशक्त कर देंगे. तलब बेचारी क्या करेगी.

सबसे अहम् बात कि यदि आपने अपने दिमाग में जा कर अपना बटन ऑफ नहीं किया है तो आपका मन आपको बार बार बेवकूफ बताने के जतन करता ही रहेगा. और आपकी नैया बीच भंवर में कभी भी गोता खा सकती है. मान लो आपने बटन ऑफ कर भी दिया हो पर कुछ देर बाद आपको याद नहीं रहा और दरवाज़ा खुला देख कर तलब आपके भीतर प्रवेश कर गई तो उस समय साफ़ तौर पर अपने आप से कह दें – कि ऐसा होगा नहीं, क्योंकि ऐसा हो नहीं सकता क्योंकि मैं ऐसा होने नहीं दूंगा!

कभी हो सकता है हमेशा की तरह आपका मन आपसे कहे कि आज पीके छोड़ देंगे एक बोतल फिर सही / या एक सिगरेट फिर सही, यहां रखना की एक बार की चूक बड़ी भारी पड़ जायेगी आपको. क्योंकि आज तक यही तो होता आया है. आपने कई बार सोचा है कि आज पीके छोड़ देंगे एक सिगरेट फिर सही. पर हो कुछ पाया नहीं. आपकी आदत आपको लगातार बेवकूफ बनाती रही और आप बरसों से वहीं खड़े हो कर सिगरेट या शराब पीते रहे.

याद रखिये, एक लम्हे को आप चूक गए तो बस समझिये कि आप गए. एक लम्हे से इतिहास बदल जाता है और एक लम्हे में ज़िंदगी बन भी जाती है. बस इस लम्हे पर कुछ दिन नज़र रखिये. न आप छोटे हैं न आपकी तलब आपसे बड़ी है. जीत आपकी पक्की है.

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