चल रे मन कुम्भ के तीर : प्रयागराज – 2019

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प्रयागराज की पुण्य भूमि पर विश्व की महानतम अध्यात्मिक चेतना के जीवंत प्रतिबिम्ब कुम्भ का हम स्वागत करते हैं !!

कुम्भ .. विश्व का महानतम आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संगम है. कुम्भ… ज्ञान, ध्यान और चेतना की त्रिधारा है. कुम्भ… सनातन परम्परा का वाहक, धारक और प्राण है. कुम्भ जहाँ दशो दिशाओं से आये दिव्य आत्माओं, ऋषियों, मुनियों, साधू संतों का दर्शन लाभ होता है.  कुम्भ.. जहाँ उतरते हैं 35 करोड़ देवी देवता. कुम्भ भारत को झाँकने अपूर्व, सुंदरतम और अकल्पनीय झरोखा है. कुम्भ… जिसे यूनेस्को ने अपूर्व, अतुलनीय और अकल्पनीय सांस्कृतिक धरोहर की संज्ञा दी है.

सनातन परम्परा का वाहक, धारक और प्राण है. कुम्भ जहाँ दशो दिशाओं से आये दिव्य आत्माओं, ऋषियों, मुनियों, साधू संतों का दर्शन लाभ होता है.  कुम्भ.. जहाँ उतरते हैं 35 करोड़ देवी देवता. कुम्भ भारत को झाँकने अपूर्व, सुंदरतम और अकल्पनीय झरोखा है. कुम्भ… जिसे यूनेस्को ने अपूर्व, अतुलनीय और अकल्पनीय सांस्कृतिक धरोहर की संज्ञा दी है.

पुराणों में वर्णन है कि समुद्र मंथन से निकले अमृत कुम्भ यानि कलश को पाने के लिये देवों और दानवों में 12 दिन तक संघर्ष चला था. इसी के प्रतीक 12 वर्ष पर कुम्भ का आयोजन होता है. जिन स्थानों पर अमृत की बूँदें छलकी थी उनमे हरिद्वार, प्रयागराज. नासिक और उज्जैन शामिल हैं. इसीलिये इन पावन स्थानों पर कुंभ का आयोजन किया जाता है. जब वृष राशि में वृहस्पति हो और जिस दिन सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करें उस योग को कुम्भ योग कहते हैं. ऐसा योग प्रयाग के लिये दुर्लभ माना जाता है. पुराणों में यह भी कहा गया है एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने और लाख बार पृथ्वी की परिक्रमा करने का जो लाभ मिलता है वह फल मानव को कुम्भ पर्व के स्नान से मिलता है.

महर्षि भारद्वाज को प्रयाग का प्रथम निवासी माना जाता है. इन्होंने ही प्रयाग को बसाया था. धरती के सबसे बड़े गुरुकुल की स्थापना की थी. भगवान् राम अपने वन गमन से पूर्व भारद्वाज ऋषि के आश्रम में आये थे, ऋषि भारद्वाज ने भगवान् राम को चित्रकूट जाने की सलाह दी थी. जो भी श्रद्धालु कुम्भ स्नान को आता है वह भारद्वाज ऋषि के आश्रम अवश्य जाता है. 

दीर्घकालिक कल्पवास की परम्परा सिर्फ प्रयाग में है. शास्त्रों में प्रयाग के संगम को पृथ्वी का केंद्र माना गया है. प्रयाग में ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि सृजन के लिए यज्ञ किया था. प्रयागराज के अलावा किसी दूसरे कुम्भ में आस्था का ऐसा महान विराट दर्शन नही मिलता. गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी जहाँ मृत और अमृत दोनों तत्वों के समीकरण से बनी एक ऐसी धारणा है जो मृत्यु पर मानसिक रूप से विजय प्राप्त करके जीवन में व्याप्त अमृत तत्व को सर्व सुलभ बनाता है.  

कुम्भ – 2019 को अपूर्व बनाने के लिए प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने रात दिन एक कर दिया है. कुम्भ में इस बार बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो पहले नही हुआ है. मकर संक्रांति के प्रथम शाही स्नान के साथ महाकुम्भ का आगाज़ होता है .अखाड़ों की पारम्परिक जुलूस हाथी घोड़े ऊंट पर सवार संगीत वाद्य यंत्रों के बीच नागा साधुओं के शाही स्नान लोगो को आकर्षित करते हैं. पौष पूर्णिमा, मौनी अमावश्या, वसंतपंचमी, माघ पूर्णिमा स्नान के मुख्य पर्व है.                    

पूरे कुम्भ को चार मुख्य टेंट खण्डों में बांटा गया है. हर टेंट खण्डों में निवास करने वाले कल्पवासियों को निवास की सारी मूल सुविधाए मुहैया कराई जा रही है. कुम्भ के कुछ टेंटों में फाइवस्टार होटलों जैसी सुविधा प्रदान की जा रही है. विदेशी श्रद्धालुओ के लिए एक हजार स्विस काटेज बनाये गये है. कल्प वासियों के लिए राशन कार्ड की व्यवस्था की गई है. घाटों को जोड़ने के लिए प्लास्टिक के पीपों का पुल बनाया गया है. नदी पार करने के लिए लोहे का अस्थायी पुल बनाया गया है.  मुख्य स्नान घाटों को चौड़ा किया गया है ताकि श्रद्धालु सुगमता से स्नान कर सकें. मेले की व्यापक सुरक्षा का इंतजाम किया गया है. अग्निशमन यंत्रो, पुलिस चौकियां, जल पुलिस, एम्बुलेंस, डिजिटल वायरलेस सिस्टम, सी सी टी वी कैमरों का जाल, ड्रोन कैमरों आदि से अभूतपूर्व पहरेदारी की व्यवस्था की गयी है. इस बार कुम्भ मेले की छटा का विश्व स्तर पर सजीव प्रसारण की भी व्यवस्था की गयी है. प्रयागराज के इतिहास, संस्कृति और पौराणिक महत्व को लोगों से परिचित कराने के लिए पेंट माय सिटी योजना के तहत पूरे शहर को पेंट किया गया है. मेला स्थल में मुख्यरूप से पांच सांस्कृतिक मंच बनाये गये है. इन मंचो पर लगभग 300 सांस्कृतिक दलों के 5000 कलाकारों द्वारा शास्त्रीय, उप शास्त्रीय और लोक कलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा. प्रयागराज के 25 अन्य सांस्कृतिक मंचो पर 6000 लोक कलाकारों द्वारा लोक प्रस्तुतियां प्रस्तुत की जायेंगी.

कुम्भ ज्ञान, वैराग्य, और भक्ति का पर्व है. इस पर्व में धार्मिक माहौल बहुत ही अनुपम होता है, इस पर्व पर वेदमंत्रो का पाठ, व्याख्या, महा काव्य, प्रार्थना, साधू संतो के उपदेशों पर आधारित नृत्य होते हैं. कुम्भ पर्व पवित्रता का पर्व है. इस पर्व पर विभिन्न भाषा, बोली, वेश भूषा खानपान एक साथ देखे जा सकते हैं. धार्मिक विश्वास के अनुसार कुम्भ में श्रद्धापूर्वक स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते है.  मोक्ष की प्राप्ति होती है!!

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