चुनाव आयोग की अजीब तारीखें ही लोगों को चुनाव से दूर करती हैं

होना तो ये चाहिये कि किसी भी चुनाव में हमेशा तारीख छुट्टी वाले दिन रखी जाये ताकि लोग आराम मे बड़ी संख्या में मतदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करायें..

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चुनाव आयोग ने 7 चरणों के चुनाव के लिए ऐसी दिन  तय किये हैं जो कम से कम सरकारी कर्मचारियों को चुनाव से दूर भागने के लिए प्रेरित करते  हैं.

आप जानते हैं अधिकतर राज्यों में शनिवार को और रविवार सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी होती है और अगर चुनाव का दिन ऐसा हो कि एक दो छुट्टी ले कर सैर सपाटे के लिए जाया जा सके तो फिर व्यक्ति वोट नहीं डालता .

इस बार निर्धारित चुनाव के विभन्न चरणों की तारीख इस प्रकार हैं —
11 अप्रैल, 18 अप्रैल (दोनों बृहस्पतिवार)
23 अप्रैल (मंगलवार);
29 अप्रैल, 6 मई (दोनों सोमवार)
12 मई, 19 मई (दोनों रविवार)

बृहस्पतिवार के चुनाव के दिन तो छुट्टी होती ही है और शुक्रवार की छुट्टी ले कर 4 छुट्टी हो जाती है;मंगलवार चुनाव के दिन छुट्टी होगी तो सोमवार की छुट्टी ले कर भी 4 छुट्टी हो जाएँगी;सोमवार के दिन चुनाव से भी 3 छुट्टी मिल जाती हैं;रविवार के दिन चुनाव हो तो सोमवार की छुट्टी लेने से भी 3 छुट्टी बन जाती है .

चुनाव का दिन हर तरह से बुधवार उपयुक्त होगा क्यूंकि कम लोग ही 2 छुट्टी ले कर वोट से दूर होना चाहेंगे –हाँ जिसने वोट देना ही नहीं है उसकी बात अलग है –वैसे चुनाव के दिन के आसपास लोगों की छुट्टी लेने पर ही पाबन्दी लगा देनी चाहिए –लेकिन चुनाव आयोग को भविष्य में ऐसे दिन मतदान तय नहीं करना चाहिए जिससे लोग वोट से दूर रहें .

याद रहे बहुत से लोग सुविधाएँ सब चाहते हैं मगर वोट डालने की एक छोटी सी ड्यूटी निभाने की इच्छा नहीं होती –अगर सुविधाएं मिलनी भी बंद हो जाएँ तो बर्दाश्त नहीं करेंगे .

(सुभाष चन्द्र)

(photo courtsey – Yugliv)

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