थ्री नॉट थ्री : मोदी देश के नाम !!

ये माना देश की जनता ने कि है कुछ ख़ास करिश्मा मोदी में..

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इतिहास ने भारतीय राजनीति के पटल पर एक नाम लिख दिया है – नरेंद्र दामोदर दास मोदी

सत्रहवीं लोक सभा चुनाव परिणामों ने देश को खुश कर दिया और दुनिया को हैरान कर दिया. बीजेपी की 303 सीटों के साथ 353 सीटों वाले एनडीए ने अपने राजनैतिक वर्चस्व का प्रमाणपत्र दे दिया. देश मोदी-मोदी हो गया. जिस भगवा पर उंगलियाँ उठती थीं, देश के लिये घातक, कट्टर, मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया जाता था, आज वही भगवा गौरव का विषय है भारतीय राजनीति में.

कहने की ज़रूरत नहीं. कहने को कुछ नहीं छोड़ा मोदी ने. बस देश में एक सूनामी चली और मोदी नाम की इस सूनामी ने सूखे पत्तों की तरह उड़ा दिया संपूर्ण विपक्ष को. अब विपक्ष में यूनाईटेड वी विन की जगह कहा जा रहा है – यूनाईटेड वी लूज़!!

देश ने राष्ट्रवाद को गले लगाया है और विकास के चेहरे मोदी को विजयश्री का वरन कराया है. संघ के लाखों-लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम सार्थक हुआ. हिन्दुस्तान में ही देश के भीतर दूसरी छोर से बढ़ रही कट्टरता से भयभीत हिन्दुओं का आत्मविश्वास प्रबल हुआ है. कम से कम हिन्दुओं के अच्छे दिन इस तरह से तो आये हैं.

जिन आडवाणी जी के लिए राहुल ने कहा था कि मोदी ने आडवाणी जी को लात मार कर पार्टी के मंच से नीचे फेंक दिया, मोदी शाह की विजेता जोड़ी इस ऐतिहासिक विजय के उपरान्त उन्हीं आडवाणी जी से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने उनके घर पहुंची थी.

देश की तरह विदेशों में भी मोदी की जीत का जश्न चला. लंदन के ट्रैफल्गर स्क्वेयर पर लोगों ने भांगड़ा करके मोदी की जीत की ख़ुशी मनाई. ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन में भी भारतीयों ने मोदी विजय का उत्सव मनाया.

इधर सबसे बड़े पराजित खेमे में खामोशी है. 26 मई को कांग्रेस रिविव्यु करेगी अपनी हार के कारणों का. ये रिविव्यू कौन करेगा, क्या रिविव्यू करेगा, कैसे रिविव्यू करेगा – ये अभी बताया नहीं गया है. सीडब्ल्यूसी की बैठक में और उससे पहले भी ऐसे संकेत मिले जैसे कि धकेल कर राजनीति करने की तमन्ना नहीं है राहुल की. मजबूरन अभी भी अध्यक्ष उनको ही रहना होगा.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने पीएम मोदी को बधाई दी. जिस समय भारत में मतगणना चल रही थी, दुनिया के बड़े राष्ट्राध्यक्षों ने मोदी को जीत की बधाइयाँ देनी शुरू कर दी थीं. शुरुआत की थी मोदी के दोस्त इज़राइल के प्रधानमन्त्री नेतान्याहू ने.

ज़ाहिर है, दुनिया में मोदी की जीत का सकारात्मक संदेश गया है. देश में ही नहीं दुनिया में भी मोदी अब आदमकद हैं. भारत की ग्लोबल ब्रान्डिंग करने वाले अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ मोदी की चुनावी विजय को दुनिया से समर्थन मिला है.

पर कहीं न कहीं दुनियावी स्तर पर भी कुछ असुरक्षा महसूस हुई है. दुनिया में तो मोदी ने सिर्फ मित्रता का ही सन्देश दिया है. वे मिल कर चलने में यकीन रखते हैं और सबके साथ सबके विकास की बात करते हैं फिर भी कहीं न कहीं कुछ बात तो ऐसी है कि कुछ लोगों को मोदी की विजय रास नहीं आई है.

इन आम चुनावों ने कुछ बड़े उलटफेर दिखाए. राजे-रजवाड़ों के दिन लद गए ऐसा लगता है. नामधारी युवराज राहुल हारे अमेठी से, दिग्गी राजा हारे भोपाल से और ज्योतिरादित्य सिंधिया हरे गुना से. देशद्रोह के अभियुक्त कन्हैया कुमार को सवा चार लाख से पीटा बेगूसराय की जनता ने. और देश में सीपीआई का भी सूपड़ा साफ हो गया है जैसे बिहार में लालू की राजद ज़ीरो हो गई है.

प्रतिक्रियावादी मतदान से हटकर पश्चिम बंगाल में कमल खिल गया है. जम्मू-कश्मीर में भाजपा की सरकार बन रही है. दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड और गुजरात में बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया. कई नेताओं का गर्व टूटा और सबसे बड़ी बात गांधी-नामधारी राहुल अमेठी से हारे और उनकी वहां सदा विजय होगी – ये मिथ भी टूट गया.

अमेठी में स्मृति ने राहुल को धोबी-पाट का स्वाद चखाया. राहुल ने कहा कि उम्मीद है स्मृति अमेठी की जनता का बहुत प्यार से ध्यान रखेंगी. याने कि अब तक राहुल हंटर लेकर पेश आ रहे थे अमेठी की जनता से. वायनाड ने साथ निभाया और इज्जत रख ली गांधी वंश के चश्मोचिराग की.

देश का हर वोट मोदी को गया. अब बीजेपी को अपने पक्ष में किसी धर्म या जाति के वोटों के ध्रुवीकरण की जरूरत नहीं. मोदी को देश के हिन्दुओं ने दोनों हाथों से वोट दिए हैं. अच्छी बात है कि जातिगत राजनीति को इस बार मोदी की उपस्थिति ने नकार दिया है. ये हैरानी की बात नहीं, क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है.

दिग्विजय सिंह कहाँ हैं. उन्हें ढूँढा जाए और याद दिलाया जाए कि आपने कहा था कि मैं हार गया तो जिन्दा समाधि ले लूँगा. कहीं सही में समाधि तो नहीं ले ली? नहीं ली हो तो उनसे कहा जाए कि समाधि ले लें, देर न करें.

केजरीवाल के तीन नेताओं की जमानत जब्त हो गई है. प्रकाशराज भी खेत रहे. मायावती मोदी की जीत से जल-भुन गई हैं और कहते हुए थक नहीं रही हैं कि ईवीएम की धाँधली से जीते हैं मोदी. ममता के गुस्से की तपिश बंगाल से बाहर तक आ रही है. मेहबूबा को रिज़ल्ट्स ने खामोश कर दिया है.

मोदी तो आ गए अब पीएम मोदी भी आज आ रहे हैं. विजय के वातावरण में ही आज मोदी की बायोपिक रिलीज़ ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ रिलीज़ हुई है जो वास्तव में इतनी अच्छी बनी है कि अगर टाइम पर रिलीज़ होती तो वोट बढ़ जाते मोदी के.

लगातार दूसरी ऐतिहासिक विजय के बाद अड़तीस साल पुराने मित्र ने अपने योग्य मित्र को फिर से प्रधानमंत्री बनाया. मोदी ने शाह को गले लगा कर कहा – धन्यवाद !!

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