पीएम मोदी के दो विशिष्ट गुण

इन दो गुणों का समन्वय मोदी को महान बनाता है और सफल भी..

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वज्रादपि कठोराणि मृदुनि कुसुमादपि
लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विक्षातुमर्हति ॥
(बाहर से) वज्र जैसे कठोर महापुरुषों का अंतःकरण पुष्प जैसा कोमल होता है । ऐसे लोकोत्तर अंतःकरण को कौन समझ सकता है.. ?

मुझे मोदीजी के दो गुण सर्वाधिक आकृष्ट करते हैं। दोनों एक दूसरे के विपरीत हैं और एक व्यक्ति में दोनों का होना दुर्लभतम घटना होती है और ये दो गुण हैं———“ईमानदारी व कुटिलता”।

अगर कोई व्यक्ति ईमानदार होता है तो वह सरल होता है और उसमें कुटिलता का अभाव होता है जैसे कि लालबहादुर शास्त्रीजी और अगर कोई कुटिल होता है तो उसमें ईमानदारी का नामोनिशान नहीं होता है जैसे कि सोनिया गांधी।

भारत में सुदूर अतीत में कृष्ण और फिर कौटिल्य में यह दुर्लभ संयोग उपस्थित थे। निकटतम अतीत में १५वीं सदी में यह असाधारण संयोग दो व्यक्तियों में देखा गया जिनमें एक था औरंगज़ेब जो अपने इस्लामिक लक्ष्य के लिये हद से ज़्यादा ईमानदार था और उसके लिये वह हर उचित अनुचित साधन प्रयुक्त करने वाला महाकुटिल भी।

यह भारत का सौभाग्य था कि उसका सामना करने के लिये हिंदुत्व के पास भी एसा ही व्यक्तित्व था और वह थे छत्रपति शिवाजी जो हिंदुत्व के प्रति पूर्णतः ईमानदार थे और जिनके पास औरंगज़ेब से भी ज़्यादा कुटिलता थी।

यह हिंदुओं का सौभाग्य है कि मोदीजी के रूप में इन दो विपरीत दुर्लभ गुणों का व्यक्तित्व एक बार पुनः अवतरित हुआ है और अगर हिंदू अपनी मूर्खता में उन्हें खो देते हैं तो वाक़ई हिंदू विलुप्त होने को डिजर्व करते हैं।..

(देवेन्द्र सिकरवार)

Disclaimer: इस आर्टिकल में लेखक के विचार पूरी तरह निजी हैं जिनकी सत्यता,व्यावहारिकता या संपूर्णता के प्रति न्यूज़ इंडिया ग्लोबल (NIG) जिम्मेदार नहीं है. लेखक के लेख को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया है और इसमें कोई छेड़छाड़ या संपादन नहीं किया गया है. इस आर्टिकल के जरिए दी गई कोई भी जानकारी, सूचना, ज्ञान, विचार, विचारधारा लेखक के निजी हैं और उनके लिए न्यूज़ इंडिया ग्लोबल (NIG) उत्तरदायी नहीं है.

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