मोदी के तूफान में उड़े कांग्रेस के ये पूर्व मुख्यमंत्री

दुनिया के सबसे बड़े चुनावों में जहाँ मोदी महाबली सिद्ध हुए, कांग्रेस अपने अंत के और करीब पहुँची..

0
1467

2019 के चुनाव नतीजों से सिद्ध हो गया है कि प्रधानमंत्री को तौर पर देश की जनता की पहले पसंदीदा नेता नरेंद्र मोदी ही हैं..

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 303 सीटों पर जीत हासिल की है. जो कि पिछली बार की तुलना में 21 सीटों की बढ़त है. इस से ये भी साबित होता है कि नरेंद्र मोदी के काम को देश की जनता ने सराहा है और आगे भी मोदी के नेतृत्व पर भरोसा दिखाते हुए मोदी को समर्थन देते हुए लोकतंत्र के सबसे बड़े पद पर आसीन कराया.

देखा जाए तो पिछली बार की तुलना में इस बार मोदी की लहर ज्यादा तेज रही इसमें कई कद्दावर और दिग्गज नेता भी अपने आप को नहीं थाम सके और मोदी की सुनामी में बह निकले. हालात ऐसे रहे कि देश की सबसे पुरानी पार्टी के 9 पूर्व मुख्यमंत्री भी मोदी की इस सुनामी में अपनी सीट सुरक्षित नहीं रख पाए. चलिए जानते हैं उन 9 पूर्व मुख्यमंत्रियों के बारे में जो मोदी के तूफान के सामने टिक नहीं सकें और धाराशाई हो गए.

दिग्विजय सिंह- कांग्रेस के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश में दो बार मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह का चुनाव हारना सबसे बड़ी हैरानी की बात रही. प्रदेश में कांग्रेस सरकार रहने के बावजूद वो अपनी सीट नहीं बचा पाए और भारी अंतराल से बीजेपी की प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर से चुनाव हार गए. प्रज्ञा ठाकुर ने ही दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाया था कि दिग्विजय सिंह की शह पर ही प्रज्ञा को भगवा आतंकी सिद्ध करने की कोशिश की गई थी जबकि वो निर्दोष थीं. इस चुनाव में प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को 364822 मतों से हराया    

शीला दीक्षित- दिल्ली कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और 15 साल तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हारने के पीछे का कारण मोदी सुनामी रही. माना जा रहा था की उत्तर पूर्व दिल्ली से बीजेपी के उम्मीदवार और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को शीला दीक्षित कड़ी टक्कर देंगी लेकिन परिणाम एकदम उलट रहा बल्कि मनोज तिवारी ने शीला दीक्षित को 366102 मतों से करारी मात दी।

भूपेंद्र हुड्डा- हरियाणा मे लगातार दो बार मुख्यमंत्री और 4 बार सांसद रहने वाले कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हारना भी कांग्रेस के लिए बड़ा मलाल रहा. भूपेंद्र हुड्डा हरियाणा के सोनीपत से चुनाव लड़े थे लेकिन भाजपा उम्मीदवार रमेश कौशिक के आगे खुद की सीट नहीं बचा सके. रमेश कौशिक ने हुड्डा को 164864 मतों से जोरदार शिकस्त दी.

हरीश रावत– उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के महासचिव हरीश रावत भी मोदी लहर के सामने टिक नहीं सके, विधान सभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव लडने के बावजूद भी हार मिलने के बाद उन्होंने लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन नतीजा वही रहा कि उन्हें करारी शिकस्त मिली. हरीश रावत को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने 3,39,096 मतों से शिकस्त दी.

अशोक चौहान- महाराष्ट्र के दिग्गज नेताओं में से एक और पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौहान नांदेड से इस बार अपनी सीट नहीं बचा सके. चौहान को भाजपा के प्रतापराव पाटिल ने 40148 वोटों से शिकस्त दी. हालांकि अशोक चौहान कम अंतराल से हारे हैं लेकिन जीत तो जीत ही होती है चाहे एक वोट से हो या फिर एक लाख वोटों से.

सुशील कुमार शिंदे– देश के पूर्व गृहमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार शिंदे के लिए भी ये चुनाव अच्छा नहीं रहा, मोदी की सुनामी में वो ऐसे बहे कि अपनी पारंपरिक सीट सोलापुर को भी नहीं बचा सके. शिंदे को भाजपा के जय सिद्धेश्वर शिवारचरी ने 1,58,608 वोटों से हराया.

नबाम तुकी- अरुणाचल पश्चिम सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी पर दांव खेला लेकिन कांग्रेस को इस दांव के एवज में मुंह की खानी पड़ी.  इस चुनावी समर में भाजपा नेता और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नबाम तुकी को 1,54,404 मतों से करारी शिकस्त दी.

मुकुल संगमा–  8 साल तक मेघालय के सीएम रहे मुकुल संगमा का हाल भी दूसरे पराजित मुख्यमंत्रियों की रहा. उन्हें भी इस चुनाव में शिकस्त का सामना करना पड़ा. उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री और नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) की आगाथा संगमा ने तौरा सीट से 64030 मतों से हराया. नेशनल पीपल्स पार्टी एनडीए की समर्थक पार्टी में से एक है.

वीरप्पा मोइली – यूपीए सरकार के दौरान केंद्र सरकार में अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली भी इस चुनाव में अपनी सीट नहीं बचा सके. मोईली अपनी पारंपरिक सीट चिकबल्लपुर से चुनाव लड़े थे और लेकिन मोदी लहर के सामने वो अपनी पारंपरिक सीट भी नहीं बचा सकें. वीरप्पा मोइली को भाजपा के बीएन बच्चे गौड़ा ने 1,82,110 वोटों से पराजित किया

नरेंद्र मोदी की सुनामी न सिर्फ इन पूर्व मुख्यमंत्रियों बहा ले गई बल्कि कई दिग्गजों के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया. मोदी लहर से राजनीतिक हालात ऐसे हो   

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here